Vice President: नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल होगा या बचा टर्म करेंगे पूरा? जानें क्या कहता है संविधान
Vice President: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार देर शाम संविधान के अनुच्छेद 67 ए के तहत स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है। उनके इस्तीफे के बाद अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया और कहा कि वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। धनखड़ ने राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में कहा, स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं। धनखड़ पद पर रहते हुए इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। इससे पहले वीवी गिरि ने 20 जुलाई, 1969 को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे ही आर. वेंकटरमन ने 24 जुलाई 1987 को पद से इस्तीफा दे दिया था।
नए उपराष्ट्रपति को मिलेगा पूरे पांच साल का कार्यकाल?
यदि भारत के उपराष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त होने से पहले इस्तीफा देते हैं, तो अगले उपराष्ट्रपति पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की पूरी अवधि तक के लिए चुने जाते हैं। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 के प्रावधानों के अनुसार होता है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल सामान्य रूप से पांच वर्ष का होता है और रिक्त पद को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति को पूर्ण कार्यकाल मिलेगा, न कि पिछले उपराष्ट्रपति के शेष कार्यकाल के लिए उनका चुनाव होगा।
अनुच्छेद 68- पद खाली होने की स्थिति में चुनाव और नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
(1) यदि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने वाला हो, तो नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कार्यकाल पूरा होने से पहले कर लेना चाहिए।
(2) यदि उपराष्ट्रपति का पद बीच में मृत्यु, इस्तीफे या हटाए जाने के कारण खाली हो जाता है, तो जल्द से जल्द चुनाव कराना जरूरी है। अनुच्छेद 67 के नियमों के अनुसार, चुना गया नया उपराष्ट्रपति जिस दिन से पदभार संभालेगा। उस दिन से पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगा।
इसका एक उदाहरण 2002 में देखने को मिला था। उस समय उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का पद पर रहते हुए वर्ष 2002 में निधन हो गया था। तब वह उपराष्ट्रपति पद पर थे। तब उनके निधन के कारण उपराष्ट्रपति का पद अस्थायी रूप से रिक्त हो गया। नया चुनाव हुआ और भैरों सिंह शेखावत को उपराष्ट्रपति चुना गया था। भैरो सिंह ने अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया था।
1. संसद के दोनों सदनों के सदस्य वोट डालते हैं: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं। हर सदस्य केवल एक वोट ही डाल सकता है। राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचित सांसदों के साथ-साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है।
2. मनोनीत सांसद भी डाल सकते हैं वोट: राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसद वोट नहीं डाल सकते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसा नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसे सदस्य भी वोट कर सकते हैं। इस तरह से देखा जाए तो उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के 788 निर्वाचक हिस्सा लेते हैं। इसमें राज्यसभा के चुने हुए 233 सदस्य और 12 मनोनीत सदस्यों के अलावा लोकसभा के 543 चुने हुए सदस्य वोट करते हैं। इस तरह से इनकी कुल संख्या 788 हो जाती है।
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव इलेक्शन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति से किया जाता है। इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफेरेबल वोट सिस्टम कहते हैं। आसान शब्दों में समझें तो इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है। मसलन वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को एक, दूसरी पसंद को दो और इसी तरह से अन्य प्रत्याशियों के आगे अपनी प्राथमिकता नंबर के तौर पर लिखता है।
यूं तो उपराष्ट्रपति की संवैधानिक जिम्मेदारियां बहुत सीमित हैं लेकिन राज्यसभा के सभापति के तौर पर भूमिका काफी अहम हो जाती है। इसके अलावा उनकी जिम्मेदारी तब और अहम हो जाती है, जब राष्ट्रपति का पद किसी वजह से खाली हो जाए। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी उपराष्ट्रपति को ही निभानी पड़ती है क्योंकि राष्ट्रप्रमुख के पद को खाली नहीं रखा जा सकता। देश के प्रोटोकॉल के हिसाब से भी राष्ट्रपति सबसे ऊपर होता है। इसके बाद उपराष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री।