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Arvind Kejriwal: क्या 23 जून की बैठक का बहिष्कार करेंगे केजरीवाल? विपक्षी दलों की एकता के सामने बड़ी चुनौती

Thu, 22 Jun 2023 05:18 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 22 Jun 2023 05:18 PM IST
सार

बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की असलियत देश का हर व्यक्ति जानता है। विपक्ष के सभी राजनीतिक दल भी उनकी सोच से परिचित हैं। यही कारण है कि विपक्ष भी अरविंद केजरीवाल को महत्त्व नहीं देगा।

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Will Kejriwal boycott the June 23 meeting? Big challenge before the unity of opposition parties
सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विपक्षी दलों की एकता के लिए 23 जून को पटना में होने वाली बैठक के लिए राजनीतिक दलों का बिहार पहुंचना शुरू हो चुका है। इस बैठक को लोकसभा चुनाव 2024 की दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक से यह तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाएगी कि 2024 की लड़ाई कैसी होगी। लेकिन इतनी महत्त्वपूर्ण बैठक के पहले आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर 'सबसे पहले मेरी बात' वाली नीति पर चलते हुए पटना में पोस्टरबाजी शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी सूत्रों ने यहां तक कहा है कि यदि कांग्रेस ने दिल्ली अध्यादेश के मामले पर अरविंद केजरीवाल का साथ नहीं दिया तो पार्टी विपक्षी दलों की बैठक का बहिष्कार भी कर सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केजरीवाल की इस तरह की जल्दबाजी विपक्षी एकता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। 
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अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले प्रेस कांफ्रेंस कर यह कहा कि विपक्षी दलों की बैठक में सबसे पहले दिल्ली अध्यादेश का मुद्दा तय होना चाहिए। इस अध्यादेश को उन्होंने संविधान और देश के लिए बेहद आवश्यक बताया और कहा कि यदि यह अध्यादेश कानून बन गया तो बाद में इसी तरह अध्यादेश के जरिए दूसरे राज्यों के अधिकारों में भी कटौती की जाएगी। इससे देश की संसदीय प्रणाली को खतरा पैदा हो जाएगा। इसके बाद आप ने विपक्षी दलों की बैठक में संविधान की पुस्तक लेकर जाने की बात कही और बैठक के ठीक एक दिन पहले पटना की सड़कों-गलियों में पोस्टरबाजी शुरू कर दी। इसे अरविंद केजरीवाल की विपक्षी दलों की बैठक में अपनी भूमिका को दमदार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।   
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पहली बैठक से क्या उम्मीद
अभी यह विपक्षी दलों की पहली बैठक है। इस बैठक से केवल यही उम्मीद की जा सकती है कि सभी विपक्षी दल एक साझा एजेंडे पर सहमत हो जाएं। विपक्षी एकता के गठबंधन का नाम और उसके राष्ट्रीय संयोजक के रूप में किसी नेता पर सहमति बन जाए तो भी यह इस बैठक की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी क्योंकि इसके बाद गठबंधन के आकार और उसके स्वरूप का रास्ता आसानी से तय किया जा सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिस्थिति में किसी भी दल के द्वारा कोई जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। 
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कांग्रेस भी नहीं चाहेगी आप की मजबूती
राजनीतिक विश्लेषक कौशलेंद्र प्रियदर्शी ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल बैठक में सबसे पहले अपने मुद्दे पर सहमति बनाकर अपना काम निकालना चाहते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि केंद्र में कोई भी सरकार भाजपा या कांग्रेस के बिना बनना संभव नहीं है। भाजपा खुद यह अध्यादेश लेकर आई है जो केजरीवाल के पर कतरना चाहती है। वहीं, कांग्रेस भी यह जानती है कि आम आदमी पार्टी के कारण यदि किसी दल की राजनीति को सबसे ज्यादा खतरा है तो वह कांग्रेस ही है।  ऐसे में कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि अरविंद केजरीवाल को खुलकर खेलने का मौका मिले और वे मजबूत हों। ऐसे में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस केजरीवाल के रुख पर क्या फैसला लेती है।    

कौशलेंद्र प्रियदर्शी ने कहा कि दिल्ली में अजय माकन से लेकर संदीप दीक्षित जैसे अनेक कांग्रेस नेता हैं जो अरविंद केजरीवाल से किसी भी तरह के गठबंधन के खिलाफ हैं। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश चुनाव परिणामों ने कांग्रेस को यह तो बता ही दिया है कि यदि वह केजरीवाल की मुफ्त की बिजली वाली राजनीति अपनाती है तो वह न केवल उन्हें पीछे छोड़ सकती है, बल्कि भाजपा को भी हरा सकती है। इन चुनाव परिणामों ने अब कांग्रेस की दूसरे दलों पर निर्भरता को कम कर दिया है, जबकि कांग्रेस बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ती दिख रही है। कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि केजरीवाल मजबूत हों। ऐसे में यदि वह भी अध्यादेश को राज्यसभा में पास होने से रोकने में केजरीवाल की मदद न करे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। 

विपक्ष भी केजरीवाल को नहीं देगा महत्त्व
बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की असलियत देश का हर व्यक्ति जानता है। विपक्ष के सभी राजनीतिक दल भी उनकी सोच से परिचित हैं। यही कारण है कि विपक्ष भी अरविंद केजरीवाल को महत्त्व नहीं देगा। भाजपा सांसद तिवारी ने कहा कि दिल्ली का अध्यादेश इसलिए लाया गया है क्योंकि अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीति के कारण आम आदमी को नुकसान पहुंचा रहे थे। वे अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन अब इस कानून के आने के बाद वे ऐसा नहीं कर सकेंगे। 

देश-संविधान बचाना आवश्यक- आप
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी अपना कोई एजेंडा लेकर नहीं चल रही है। उनका एजेंडा वही है जो इस समय देश के हित में है और इस समय सबसे ज्यादा आवश्यक है कि देश और संविधान बचाने के लिए सभी लोग एकजुट होकर खड़े हों। उन्होंने कहा कि उनके नेता अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वर्तमान सरकार दुबारा चुनाव जीत जाती है तो देश में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। जिस तरह एक अध्यादेश लाकर दिल्ली के अधिकारों को समाप्त किया गया है, बाद में उसी तरह दूसरे राज्यों के साथ भी हो सकता है। 


उन्होंने कहा कि, इसलिए आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि सब लोग एक साथ खड़े होकर देश और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ें। विपक्षी एकता की पहली परीक्षा दिल्ली अध्यादेश को राज्यसभा में पास होने से रोककर प्रामाणिक रूप से दिखाई जा सकती है। यदि विपक्षी दल एकता के लिए गंभीर हैं तो उन्हें यह करने की कोशिश करनी चाहिए।
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