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Sheikh Hasina: क्या नए हालात के बीच अब भी भारत आएंगे बांग्लादेश आर्मी चीफ? रक्षा संबंधों पर पड़ेगा ये बड़ा असर
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Bangladesh Crisis
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ढाका से जाने के बाद बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने उनके इस्तीफे का एलान किया था। रिश्ते में शेख हसीना के जीजा जनरल वकार-उज-जमान को इस साल जून में ही इस पद पर नियुक्त किया गया था। प्रधानमंत्री पद से हसीना के इस्तीफे के बाद, नई सरकार बनने तक उनकी असली परीक्षा भारत से मजबूत संबंधों को बरकरार रखने की होगी। बांग्लादेश में सत्ता का फेरबदल ठीक उस समय हुआ है, जब दोनों देश रक्षा-सैन्य संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। इसी के चलते जनरल वकार-उज-जमान इस महीने के आखिर में भारत का दौरा भी करने वाले थे। लेकिन वहां उपजे नए हालात के बाद रक्षा संबंधों को लेकर अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।
भारत आने वाले थे बांग्लादेश के सेना प्रमुख
सैन्य सूत्रों ने बताया कि 58 वर्षीय बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान इन्फैंट्री के अफसर रहे हैं। वे इस महीने के अंत में भारत का दौरा करने वाले थे। 23 जून को तीन साल के लिए सेना प्रमुख बनने के बाद जनरल वकार-उज-जमान की यह पहली विदेश यात्रा होती। हालांकि अब वे भारत दौरे पर आएंगे या नहीं, इस पर संशय है। सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, नई दिल्ली के साथ ढाका के द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में कोई कमी नहीं आई थी। सूत्रों ने बताया कि दोनों देश सैन्य स्तर पर बातचीत फिलहाल जारी है, क्योंकि बांग्लादेश में अभी कोई सरकार नहीं है। वहीं, सूत्रों ने यह भी बताया कि बांग्लादेश वायु सेना जोधपुर में होने वाली भारतीय वायुसेना की तरंग शक्ति में हिस्सा लेगी। बांग्लादेश वायु सेना दूसरे चरण में हिस्सा लेगी, जो 29 अगस्त से शुरू होगा। भारतीय वायु सेना पहली बार बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास कर रही है, जिसमें लगभग 30 देश भाग ले रहे हैं, जिनमें 11 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा ले रहे हैं।
पिछले माह ही भारत के साथ की थी ये डिफेंस डील
सूत्रों के मुताबिक एक माह पहले ही, बांग्लादेश ने कोलकाता में भारतीय रक्षा शिपयार्ड जीआरएसई के साथ 800 टन का एडवांस समुद्री जहाज के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस सौदे के लिए नई दिल्ली ने ढाका को रक्षा खरीद के लिए 500 मिलियन डॉलर बतौर ऋण दिए थे, जिसके तहत किया गया पहला बड़ा सौदा था। ढाका के साथ यह कॉन्ट्रैक्ट नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी की चार दिवसीय बांग्लादेश यात्रा के दौरान हुआ था। यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने और समुद्री सहयोग के लिए नए रास्ते तलाशने के लिए जनरल वकार-उज-जमान के अलावा नौसेना और वायु सेना प्रमुखों एडमिरल एम नजमुल हसन और एयर मार्शल हसन महमूद खान के साथ चर्चा भी की थी।
वेट एंड वॉच की स्थिति में भारत
सूत्रों ने बताया कि समुद्री जहाज के ऑर्डर के अलावा बांग्लादेश भारत से गश्ती जहाजों को भी खरीदने के लिए इच्छुक था। साथ ही, अपनी वायुसेना के बेड़े में शामिल रूसी मूल के मिग-29 और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए पुर्जों की खरीदारी को लेकर बातचीत कर रहा था। वहीं इंडियन मिलिट्री अकादमी में बांग्लादेश के सैन्य कर्मी दशकों से ट्रेनिंग लेते रहे हैं। अभी भी कई सैन्य प्रतिष्ठानों में बांग्लादेशी सैन्य कर्मी ट्रेनिंग ले रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि लेकिन बांग्लादेश के बदलते हालात के चलते भारतीय सेना अब वेट एंड वॉच मोड में हैं। इस बात की समीक्षा की जा रही है कि वहां नई अंतरिम सरकार बनने के बाद द्विपक्षीय सैन्य संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
सरकार में आई बीएनपी और जमात, तो होगी मुश्किल
वहीं एक दूसरे सैन्य सूत्र ने बताया कि जनरल वकार-उज-जमान का नजरिया भारत समर्थक है। वे बांग्लादेश की सेना को मॉर्डन बनाने की पैरोकारी करते रहे हैं। बांग्लादेश के आर्म्ड फोर्स डिविजन के प्रिंसिपल स्टॉफ ऑफिसर के पद पर जब वे तैनात थे, तो उन्होंने 2022 और 2023 में द्विपक्षीय सालाना डिफेंस डॉयलॉग्स में भारतीय रक्षा सचिव के साथ सह-अध्यक्षता की थी। उन्होंने अंदेसा जताया कि अगर अंतरिम सरकार में भारत विरोधी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, तो मामला बिगड़ सकता है। उनका कहना है कि जमात ने पिछले कुछ सालों में बांग्लादेशी सेना में भी अपना प्रभाव बढ़ाया है।
चीन से हथियार खरीदता रहा है बांग्लादेश
सूत्र ने बताया कि हालांकि बांग्लादेश सबसे ज्यादा हथियार चीन से खरीदता है, लेकिन पिछले कुछ समय से वह भारत से डिफेंस डील्स करने का मन बना रहा था। 2019 से 2023 के दौरान बांग्लादेश ने चीन से सबसे ज्यादा हथियार खरीदे और जहां पाकिस्तान ने चीन से 61 फीसदी हथियार खरीदे, तो 11 फीसदी डील्स के साथ चीन दूसरे नंबर पर रहा। बांग्लादेश अपने हथियारों के 70-80 फीसदी आयात चीन से करता करता है, जिसमें चेंगदू जे-7 3.5 जनरेशन का एक्सपोर्ट एडिशन एफ-7 फाइटर जेट, मेन बैटल टैंक और कोरवेट से लेकर नौसेना की बंदूकें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, राइफलें और गोला-बारूद शामिल हैं। चीन ने 2016 में बांग्लादेश को दो पुरानी मिंग-क्लास पनडुब्बियां भी बेहद कम दामों पर दी थीं। इसके अलावा चीन ने बांग्लादेश को कॉक्स बाजार के पेकुआ में अपना पहला पूर्ण विकसित पनडुब्बी बेस बनाने में भी मदद की है, जिसे पिछले साल दिसंबर में बीएनएस शेख हसीना के रूप में कमीशन किया गया था।
वकार से पहले सेना पर भरोसा कम ही करती थीं हसीना
एक अन्य सूत्र ने बताया कि भले ही शेख हसीना प्रधानमंत्री पद पर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने एक बड़ी सीख अपनी पिता की हत्या से ली थी। 15 अगस्त 1975 की सुबह को कुछ हथियारबंद लोगों ने घर में घुस कर राष्ट्रपति और उनके पिता मुजीबुर रहमान और मां समेत परिवार के 17 सदस्यों की हत्या कर दी थी। उस समय देश की सेना ने उनके पिता के खिलाफ बगावत कर दी थी। हालांकि तब शेख हसीना अपने पति वाजिद मियां और बहन शेख रिहाना के साथ यूरोप में थीं। जिसके बाद वे सेना पर भरोसा कम ही करती थीं। जनरल वकार-उज-जमान को हसीना ने इसलिए चुना क्योंकि वह निष्पक्ष और संतुलित हैं। वहीं, 1966 में ढाका में जन्मे वकार-उज-जमान की शादी हसीना के चाचा जनरल मुहम्मद मुस्तफिजुर रहमान की बेटी साराहनाज कमालिका जमान से हुई है, जनरल मुहम्मद मुस्तफिजुर रहमान 1997 से 2000 तक सेना प्रमुख रह चुके हैं, जब हसीना पहली बार सत्ता में थीं।
डिफेंस स्टडीज में एमए की डिग्री
जनरल वकार-उज-जमान ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में एमए की डिग्री और लंदन के किंग्स कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में मास्टर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई की है। सेना प्रमुख बनने से पहले तक उन्होंने चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने सैन्य अभियानों और खुफिया जानकारी, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों और डिफेंस बजट जैसे अहम टास्क की देखरेख की। लगभग 30 सालों के करियर में, उन्होंने हसीना के साथ मिलकर काम किया है, और प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत आर्म्ड फोर्स डिविजन में प्रिंसिपल स्टाफ अफसर के पद पर भी रहे हैं।