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HC: 'ब्रांडेड कपड़े, सामान..', पत्नी की पति से हर महीने छह लाख रु. भत्ता देने की मांग, जज बोलीं- खुद कमाओ

Thu, 22 Aug 2024 06:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 22 Aug 2024 06:20 PM IST
सार

Karnataka HC: वकील ने अदालत को बताया कि महिला को घुटने के दर्द और फिजियोथेरेपी और अन्य दवाओं के इलाज के लिए 4-5 लाख रुपये की जरूरत है। वहीं, सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने महिला की मंशा पर सवाल उठाए। न्यायाधीश ने कहा कि यह अदालत की प्रक्रिया का शोषण है।

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Wife demands maintenance of Rs 6 lakh from husband every month, judge says earn yourself
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

अदालत में सुनवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला के वकील उसके पति से छह लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता दिलाने के लिए दलीलें दे रहे हैं। वकील ने अदालत को बताया कि उसे महिला को जूते, कपड़े, चूड़ियां आदि के लिए 1500 रुपये प्रति माह और घर में खाने के लिए 60 हजार रुपये की हर महीने जरूरत है। 

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वकील ने अदालत को बताया कि महिला को घुटने के दर्द और फिजियोथेरेपी और अन्य दवाओं के इलाज के लिए 4-5 लाख रुपये की जरूरत है। वहीं, सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने महिला की मंशा पर सवाल उठाए। न्यायाधीश ने कहा कि यह अदालत की प्रक्रिया का शोषण है। अगर वह इतना पैसा खर्च करना चाहती हैं तो वह कमा सकती हैं। कृपया अदालत को यह न बताएं कि एक व्यक्ति को बस इतना ही चाहिए। क्या कोई अकेली महिला हर महीने अपने लिए 6,16,300 रुपये खर्च करती है?  
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न्यायाधीश ने आगे वकील से कहा कि अगर वह (महिला) खर्च करना चाहती हैं तो उन्हें कमाने दो। आपके पास परिवार की कोई और जिम्मेदारी नहीं है। आपको बच्चों को देखभाल करने की जरूरत नहीं है। आप इसे अपने लिए चाहती हैं। आपको संवेदनशील होना चाहिए। न्यायाधीश ने वकील से कहा कि महिला उचित राशि की मांग करे, नहीं तो याचिका खारिज कर दी जाएगी। 

पूरा मामला क्या है
दरअसल, राधा मुनुकुंतला की ओर से खर्च का ब्यौरा दाखिल न करने के मामले पर 20 अगस्त को सुनवाई हुई। 30 सितंबर, 2023 को बंगलूरू के पारिवारिक न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने उसे उसके पति एम. नरसिम्हा से 50 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण राशि दिलाने का आदेश दिया। महिला ने अंतरिम भरण-पोषण राशि में वृद्धि का अनुरोध करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया। 

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