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Tamil Nadu: तमिलनाडु के राज्यपाल ने मंत्री को बर्खास्त करने का फैसला क्यों लिया, इसे लेकर संविधान में क्या है?
Fri, 30 Jun 2023 05:07 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 30 Jun 2023 05:07 PM IST
सार
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को कैबिनेट मंत्री वी सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। हालांकि, राज्यपाल ने अपने फैसले को देर शाम रोक दिया। इस बीच, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने फैसले को असंवैधानिक करार दिया। डीएमके नेता टीकेएस ईलनगोवन ने कहा, 'संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना राज्यपाल किसी भी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकता है।'
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तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और मंत्री वी सेंथिल बालाजी
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा राज्य के मंत्री वी सेंथिल बालाजी को पद से हटाने के फैसले पर बवाल मच गया है। गुरुवार को राज्यपाल रवि ने बालाजी को उनके पद से बर्खास्त करने का आदेश दिया लेकिन बाद में इस फैसले को रोक दिया। इस बीच, डीएमके, कांग्रेस, शिवसेना उद्धव (गुट) समेत कई विपक्षी दलों ने इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया।
राज्यपाल के फैसले पर सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि तमिलनाडु के राज्यपाल ने क्या फैसला लिया है? उन्होंने मंत्री बालाजी को पद से हटाने का निर्णय क्यों लिया? इसमें राजनीति क्या हो रही है? क्या राज्यपाल ऐसा फैसला ले सकते हैं, संविधान क्या कहता है? आइए जानते हैं...
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राज्यपाल के फैसले पर सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि तमिलनाडु के राज्यपाल ने क्या फैसला लिया है? उन्होंने मंत्री बालाजी को पद से हटाने का निर्णय क्यों लिया? इसमें राजनीति क्या हो रही है? क्या राज्यपाल ऐसा फैसला ले सकते हैं, संविधान क्या कहता है? आइए जानते हैं...
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तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन रवि
- फोटो : Social Media
तमिलनाडु के राज्यपाल ने क्या फैसला लिया है?
राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को कैबिनेट मंत्री वी सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। हालांकि, राज्यपाल ने अपने फैसले को देर शाम रोक दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इस बारे में देर शाम पत्र भी भेजा। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में राज्यपाल ने कहा कि अटॉर्नी जनरल से वे इस बारे में चर्चा करेंगे। अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय लेंगे।
राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को कैबिनेट मंत्री वी सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। हालांकि, राज्यपाल ने अपने फैसले को देर शाम रोक दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इस बारे में देर शाम पत्र भी भेजा। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में राज्यपाल ने कहा कि अटॉर्नी जनरल से वे इस बारे में चर्चा करेंगे। अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय लेंगे।
तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
राज्यपाल ने मंत्री बालाजी को पद से हटाने का निर्णय क्यों लिया?
सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करते हुए राजभवन ने एक विज्ञप्ति जारी की। विज्ञप्ति में कहा गया था कि बालाजी कई गंभीर मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस दौरान मंत्री रहने के कारण वह जांच को प्रभावित कर रहे हैं। सेंथिल कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसी आशंकाएं हैं कि वी सेंथिल बालाजी के मंत्रिपरिषद में बने रहने से निष्पक्ष जांच सहित कानून की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे राज्य में संवैधानिक तंत्र टूट सकता है। इन परिस्थितियों में राज्यपाल ने सेंथिल बालाजी को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौकरी के बदले नकदी मामले में बालाजी को 14 जून को गिरफ्तार किया था।
सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करते हुए राजभवन ने एक विज्ञप्ति जारी की। विज्ञप्ति में कहा गया था कि बालाजी कई गंभीर मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस दौरान मंत्री रहने के कारण वह जांच को प्रभावित कर रहे हैं। सेंथिल कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसी आशंकाएं हैं कि वी सेंथिल बालाजी के मंत्रिपरिषद में बने रहने से निष्पक्ष जांच सहित कानून की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे राज्य में संवैधानिक तंत्र टूट सकता है। इन परिस्थितियों में राज्यपाल ने सेंथिल बालाजी को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौकरी के बदले नकदी मामले में बालाजी को 14 जून को गिरफ्तार किया था।
डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन।
- फोटो : अमर उजाला
इसमें राजनीति क्या हो रही है?
राज्यपाल के फैसले पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि राज्यपाल के पास अधिकार नहीं, हम कानूनी तौर पर इसका सामना करेंगे। उनकी पार्टी डीएमके के नेता टीकेएस ईलनगोवन ने कहा, 'संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना राज्यपाल किसी भी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकता है।'
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राष्ट्रपति से तमिलनाडु के राज्यपाल को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा, 'राज्यपाल अपनी सीमा नहीं जानते हैं। राज्यपाल कभी भी ऐसे गैर संवैधानिक कदम नहीं लेते हैं।' वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने राज्यपाल के फैसले को गलत बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'यह गलत है। किसी को सरकार से बर्खास्त करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। भाजपा अपने शासन वाले राज्यों में संविधान का उल्लंघन कर रही है।'
राज्यपाल के फैसले पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि राज्यपाल के पास अधिकार नहीं, हम कानूनी तौर पर इसका सामना करेंगे। उनकी पार्टी डीएमके के नेता टीकेएस ईलनगोवन ने कहा, 'संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना राज्यपाल किसी भी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकता है।'
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राष्ट्रपति से तमिलनाडु के राज्यपाल को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा, 'राज्यपाल अपनी सीमा नहीं जानते हैं। राज्यपाल कभी भी ऐसे गैर संवैधानिक कदम नहीं लेते हैं।' वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने राज्यपाल के फैसले को गलत बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'यह गलत है। किसी को सरकार से बर्खास्त करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। भाजपा अपने शासन वाले राज्यों में संविधान का उल्लंघन कर रही है।'
तमिलनाडु भाजपा
- फोटो : Social Media
क्या फैसले का समर्थन भी हो रहा है?
भाजपा के कई नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन किया है। पार्टी के नेता नारायणन तिरुपति ने एक बयान में कहा, 'राज्यपाल को बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है क्योंकि वह मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं, उन्होंने कारण बताया है कि उन्होंने सेंथिल बालाजी को क्यों बर्खास्त किया...सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, सरकार ने SIT का गठन नहीं किया।'
वहीं, अन्नाद्रमुक पार्टी के प्रवक्ता कोवई सत्यम ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को अक्षम मुख्यमंत्री बताया। उन्होंने कहा, 'एमके स्टालिन तमिलनाडु के अब तक के सबसे अक्षम मुख्यमंत्री रहे हैं। राज्यपाल ने चिट्ठी भेजकर कहा था कि बालाजी सेंथिल मंत्री पद पर बने नहीं रह सकते हैं।'
भाजपा के कई नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन किया है। पार्टी के नेता नारायणन तिरुपति ने एक बयान में कहा, 'राज्यपाल को बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है क्योंकि वह मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं, उन्होंने कारण बताया है कि उन्होंने सेंथिल बालाजी को क्यों बर्खास्त किया...सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, सरकार ने SIT का गठन नहीं किया।'
वहीं, अन्नाद्रमुक पार्टी के प्रवक्ता कोवई सत्यम ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को अक्षम मुख्यमंत्री बताया। उन्होंने कहा, 'एमके स्टालिन तमिलनाडु के अब तक के सबसे अक्षम मुख्यमंत्री रहे हैं। राज्यपाल ने चिट्ठी भेजकर कहा था कि बालाजी सेंथिल मंत्री पद पर बने नहीं रह सकते हैं।'
संविधान
- फोटो : अमर उजाला
क्या राज्यपाल ऐसा फैसला ले सकते हैं, संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 153 राज्यों के राज्यपाल का उल्लेख करता है। इसके मुताबिक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद के बारे में उल्लेख करता है। अनुच्छेद 163(1) कहता है जिन बातों में इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने कृत्यों या उनमें से किसी को अपने विवेकानुसार करे, उन बातों को छोड़कर राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
अनुच्छेद 164 में मंत्रियों के बारे में जिक्र किया गया है। अनुच्छेद 164 (1) कहता है मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा तथा मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त अपने पद धारण करेंगे।
इस विषय पर कानूनी जानकार राजेश नारायण सिंह कहते हैं कि अनुच्छेद 164 (1) (b) को 91वें संशोधन के तहत जोड़ा गया था। जोड़ा गया यह संशोधन राज्य के मंत्री की अयोग्यता यानी डिसक्वालीफिकेशन को संदर्भित करता है। हटाए गए मंत्री के मामले में तीन दिन पहले मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई है। यह जनहित याचिका कोर्ट में मंत्री पर लगे आरोपों और उसके बाद जेल में होने के बाद भी मंत्रिपरिषद में बने रहने को लेकर दाखिल की गई थी। इस मामले में फिलहाल सात जुलाई को अगली तारीख लगी है।
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 153 राज्यों के राज्यपाल का उल्लेख करता है। इसके मुताबिक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद के बारे में उल्लेख करता है। अनुच्छेद 163(1) कहता है जिन बातों में इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने कृत्यों या उनमें से किसी को अपने विवेकानुसार करे, उन बातों को छोड़कर राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
अनुच्छेद 164 में मंत्रियों के बारे में जिक्र किया गया है। अनुच्छेद 164 (1) कहता है मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा तथा मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त अपने पद धारण करेंगे।
इस विषय पर कानूनी जानकार राजेश नारायण सिंह कहते हैं कि अनुच्छेद 164 (1) (b) को 91वें संशोधन के तहत जोड़ा गया था। जोड़ा गया यह संशोधन राज्य के मंत्री की अयोग्यता यानी डिसक्वालीफिकेशन को संदर्भित करता है। हटाए गए मंत्री के मामले में तीन दिन पहले मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई है। यह जनहित याचिका कोर्ट में मंत्री पर लगे आरोपों और उसके बाद जेल में होने के बाद भी मंत्रिपरिषद में बने रहने को लेकर दाखिल की गई थी। इस मामले में फिलहाल सात जुलाई को अगली तारीख लगी है।