क्यों गलत निकला मौसम विभाग का दिसंबर से फरवरी का पूर्वानुमान, पड़ रही कड़ाके की ठंड
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पूर्वानुमान लगाया था कि इस बार सर्दी का मौसम (दिसंबर से फरवरी तक) सामान्य से ज्यादा गर्म रहेगा। हालांकि देश में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने मौसम विभाग के पूर्वानुमान को गलत साबित कर दिया है।
मौसम के पूर्वानुमानों के लिए मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्टिंग सिस्टम (एमएमसीएफएस) मॉडल का उपयोग कर मौसम कार्यालय ने कहा था कि आगामी सर्दियों के मौसम (दिसंबर से फरवरी) में भारत के उत्तरी हिस्सों के अलावा अधिकांश हिस्सों में तापमान औसत न्यूनतम से अधिक रहने की संभावना है। देशभर में मौसम के हाल ने यही संकेत भी दिए हैं।
मौसम विभाग ने दिसंबर से फरवरी के दौरान जबरदस्त शीत लहर वाले क्षेत्रों में भी कड़ाके की शीत लहर चलने की किसी भी संभावना से इनकार किया था। शीत लहर वाले इन क्षेत्रों (कोल्ड वेव जोन) में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, मध्य महाराष्ट्र शामिल हैं।
क्यों गलत हुआ पूर्वानुमान?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव एम राजीवन नायर ने कहा कि पूर्वानुमान केवल एक प्रवृत्ति का संकेत देते हैं। पूर्वानुमान पूरे दिसंबर से फरवरी तक के मौसम के लिए था। इस स्पेल के साथ भी मौसम में तापमान औसत सामान्य या सामान्य से ऊपर रह सकता है।
उन्होंने कहा कि हम जो स्पेल देख रहे हैं वह सुबह के घंटों में कोहरे के साथ सर्दियों के महीनों की खासियत है, जिसमें अधिकतम तापमान या दिन का तापमान बहुत कम रहता है। इस तरह के स्पेल फिर से हो सकते हैं।
क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगा कि इस बार की सर्दियों में उत्तर भारत में औसत तापमान कितना रहेगा। यह सामान्य सीमा में हो सकता है। मौसमी दृष्टिकोण ने मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के लिए सामान्य सर्दियों के तापमान से अधिक का संकेत दिया था, जहां हम बादल छाने और नमी के बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। कोल्ड वेव जोन के लिए भी यह कहना मुश्किल है कि अब जनवरी और फरवरी कैसे रहेंगे।