फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why is RBI governor Urjit Patel and Finance Secretary silent on demonetisation? 

नोटबंदी पर आरबीआई गवर्नर और वित्त सचिव चुप क्यों?

Sun, 27 Nov 2016 08:38 AM IST
राजीव जायसवाल
राजीव जायसवाल Updated Sun, 27 Nov 2016 08:38 AM IST
विज्ञापन
Why is RBI governor Urjit Patel and Finance Secretary silent on demonetisation? 

नोटबंदी के फैसले के बाद आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल, वित्त सचिव अशोक लवासा और बैंकिंग सचिव अंजुलि छिब दुग्गल की गहरी चुप्पी से शेयर और करेंसी मार्केट चिंतित हैं। कारोबारियों और उद्योगपतियों में इस बात को लेकर हताशा है कि अब तक सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिलाने वाली कोई बात क्यों नहीं कही गई। 

विज्ञापन


विशेषज्ञों के मुताबिक भ्रम की स्थिति की वजह से बाजार में अस्थिरता है। 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले से पहले सेंसेक्स 27,600 पर था लेकिन दस कारोबारी सत्रों में ही लुढ़क कर 25,700 पर पहुंच गया। ऐसे वक्त में आरबीआई गवर्नर, वित्त, बैंकिंग सचिव और वित्तीय और मौद्रिक व्यवस्था का नियमन करने वाली संस्थाओं के कर्ता-धर्ताओं को निवेशकों का डर दूर करने लिए कुछ बोलना चाहिए था।  
विज्ञापन

हालांकि वित्त मंत्री ने थोड़ी कोशिश की और उनके साथ आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास भी ऐसी पहल करते दिखे। लेकिन ऐसा लग रहा था कि वही दोनों आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों की ओर से बोल रहे हों।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक आरबीआई काफी हद तक एक स्वतंत्र नियामक है, जिसका निवेशकों की धारणाओं पर असर पड़ता है। इसी तरह बाजार में वित्त और बैंकिंग सचिवों के बयानों को भी काफी तवज्जो दी जाती है।

आरबीआई गवर्नर की चुप्पी आश्चर्यजनक

Why is RBI governor Urjit Patel and Finance Secretary silent on demonetisation? 

ऐसे में बैंकिंग सचिव को साफ तौर पर बैंकिंग से जुड़े संकट को हल करते हुए दिखना चाहिए था, लेकिन यह बेहद आश्चर्यजनक है कि 500 के गलत नोट जारी किए जाने के बाद भी आरबीआई गवर्नर चुप्पी साधे रहे।

देश के कारोबारी और उद्योगपति सरकार की संवाद करने की रणनीति को लेकर हैरान हैं। बृहस्पतिवार की देर शाम सरकार की ओर से लिया गया फैसला पहेली बन गया। कोई कह रहा है कि अघोषित रकम पर पेनाल्टी 50 फीसदी होगी, तो कोई कह रहा है 60 फीसदी तो कोई 90 फीसदी। कोई साफ तस्वीर नहीं उभर रही है। लोग दहशत में हैं। 

ज्वैलर्स का कहना है कि सरकार से पक्का आश्वासन मिलने के बाद और शीर्ष अधिकारियों की ओर से पुष्टि के बाद ही वे अपनी दुकानें खोलेंगे।

आम आदमी और गृहिणियां भी भ्रम की स्थिति में हैं। आदेशों में तुरंत बदलाव दिख रहे हैं। एक कारोबारी ने कहा, पहले आपने कहा कि 4000 रुपये तक के नोट बदले जा सकते हैं। फिर कहा कि सीमा 4500 रुपये तक बढ़ा दी गई है। फिर 2000 रुपये तक के नोट बदलने की इजाजत दी गई। अब आपने नोट बदलने पर बिल्कुल ही रोक लगा दी।

बैंकर्स भी रोज-रोज बदलने वाले नियमों के बारे अनजान हैं। उन्हें तुरंत जानकारी नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि सरकार को नोटबंदी से जुड़ी एक वेबसाइट बना कर नियमों में बदलाव को रियल टाइम में अपडेट करना चाहिए।   

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed