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Explained: कनाडा की घटना के बाद क्यों चर्चा में इंदिरा गांधी की हत्या, इसका ऑपरेशन ब्लू स्टार से क्या कनेक्शन?
Mon, 12 Jun 2023 11:05 AM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 12 Jun 2023 11:05 AM IST
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इंदिरा गांधी
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में एक झांकी में खालिस्तान समर्थकों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की घटना का जश्न मनाया था। भारत सरकार ने कनाडा से इस पर आपत्ति जताई है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उधर, कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसी ने कहा है कि भारत की पूर्व पीएम की हत्या की झांकी निकाले जाने का मामला कानून रूप से घृणा अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। इसको लेकर ब्रैम्पटन शहर के मेयर पैट्रिक ब्राउन के कार्यालय ने बयान भी जारी किया है। मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आइए शुरुआत से जानते हैं पूरी कहानी...
शुरुआत देश की आजादी और पंजाब से करते हैं
देश को जब आजादी मिली तो हिंदुस्तान के साथ पंजाब का भी बंटवारा हुआ। एक हिस्सा पाकिस्तान को मिला। आजादी के साथ ही पंजाब में पंजाबी बोलने वालों के लिए अलग राज्य की मांग के साथ पंजाबी सूबा आंदोलन शुरू हुआ। 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ये मांग मान ली। पंजाब को तीन हिस्सों में बांट दिया गया। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़। पंजाबी बोलने वालों के लिए पंजाब, हिंदी बोलने वालों के लिए हरियाणा अस्तित्व में आया। दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ बनाई गई। चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश है। दोनों राज्यों के बीच इस शहर को लेकर अभी भी विवाद जारी है। नया राज्य बनने के कुछ दिनों बाद सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग उठने लगी।
देश को जब आजादी मिली तो हिंदुस्तान के साथ पंजाब का भी बंटवारा हुआ। एक हिस्सा पाकिस्तान को मिला। आजादी के साथ ही पंजाब में पंजाबी बोलने वालों के लिए अलग राज्य की मांग के साथ पंजाबी सूबा आंदोलन शुरू हुआ। 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ये मांग मान ली। पंजाब को तीन हिस्सों में बांट दिया गया। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़। पंजाबी बोलने वालों के लिए पंजाब, हिंदी बोलने वालों के लिए हरियाणा अस्तित्व में आया। दोनों राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ बनाई गई। चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश है। दोनों राज्यों के बीच इस शहर को लेकर अभी भी विवाद जारी है। नया राज्य बनने के कुछ दिनों बाद सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग उठने लगी।
फिर उठी खालिस्तान की मांग
1969 में पंजाब विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में टांडा सीट से रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार जगजीत सिंह चौहान को हार मिली। चुनाव हारने के बाद वह लंदन चला गया। वहां से वह सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग उठाने लगा। 1971 में न्यूयॉर्क टाइम्स में एक विज्ञापन जारी कर उसने लोगों से चंदा भी मांगा। तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने खालिस्तान बनाने के लिए मदद का प्रस्ताव दिया और आईएसआई को इसमें सक्रिय कर दिया। 1977 में जगजीत भारत लौटा और 1979 में वह फिर वापस चला गया। यहां उसने खालिस्तान नेशनल काउंसिल की स्थापना की।
1969 में पंजाब विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में टांडा सीट से रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार जगजीत सिंह चौहान को हार मिली। चुनाव हारने के बाद वह लंदन चला गया। वहां से वह सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग उठाने लगा। 1971 में न्यूयॉर्क टाइम्स में एक विज्ञापन जारी कर उसने लोगों से चंदा भी मांगा। तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने खालिस्तान बनाने के लिए मदद का प्रस्ताव दिया और आईएसआई को इसमें सक्रिय कर दिया। 1977 में जगजीत भारत लौटा और 1979 में वह फिर वापस चला गया। यहां उसने खालिस्तान नेशनल काउंसिल की स्थापना की।
पंजाब को अधिक अधिकार देने की बात होने लगी
एक तरफ ब्रिटेन से जगजीत खालिस्तान को लेकर देश के खिलाफ साजिश रच रहा था, तो दूसरी ओर पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने राज्य को अधिक अधिकार देने मांग उठा दी। 1973 और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुरी साहिब प्रस्ताव पास किया। इसमें पंजाब को अधिक अधिकार देने का जिक्र था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि भारत सरकार का पंजाब में दखल केवल रक्षा, विदेश, संचार और मुद्रा के मामलों तक ही सीमित रहेगा। हालांकि, इसमें अलग देश की मांग नहीं थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ... उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया।
एक तरफ ब्रिटेन से जगजीत खालिस्तान को लेकर देश के खिलाफ साजिश रच रहा था, तो दूसरी ओर पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने राज्य को अधिक अधिकार देने मांग उठा दी। 1973 और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुरी साहिब प्रस्ताव पास किया। इसमें पंजाब को अधिक अधिकार देने का जिक्र था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि भारत सरकार का पंजाब में दखल केवल रक्षा, विदेश, संचार और मुद्रा के मामलों तक ही सीमित रहेगा। हालांकि, इसमें अलग देश की मांग नहीं थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ... उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया।
हिंसा की आग में जला पंजाब
13 अप्रैल 1978 को अकाली और निरंकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें 13 अकाली दल के कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। इसके बाद पंजाब में रोष दिवस मनाया गया और यहीं से जरनैल सिंह भिंडरावाले की एंट्री हुई। भिंडरावाले ने पूरे पंजाब में रैलियां शुरू कर दीं और इसमें वह भड़काऊ भाषण देने लगा। अलग खालिस्तान की मांग उठाने लगा। 1982 में भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर यानी श्री हरमंदिर साहिब को अपना घर बना लिया। यहीं से वह पूरे प्रदेश को कंट्रोल करने लगा। 1983 में पंजाब के डीआईजी एएस अटवाल की हत्या हो गई। इन सभी हत्याओं के पीछे भिंडरावाले का हाथ बताया गया। इसके कुछ दिन बाद ही रोडवेज बसों पर हमला हुआ और कई गैर सिखों को इसमें मार डाला गया। बढ़ती हिंसक घटनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पंजाब की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया और सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा दिया।
13 अप्रैल 1978 को अकाली और निरंकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें 13 अकाली दल के कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। इसके बाद पंजाब में रोष दिवस मनाया गया और यहीं से जरनैल सिंह भिंडरावाले की एंट्री हुई। भिंडरावाले ने पूरे पंजाब में रैलियां शुरू कर दीं और इसमें वह भड़काऊ भाषण देने लगा। अलग खालिस्तान की मांग उठाने लगा। 1982 में भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर यानी श्री हरमंदिर साहिब को अपना घर बना लिया। यहीं से वह पूरे प्रदेश को कंट्रोल करने लगा। 1983 में पंजाब के डीआईजी एएस अटवाल की हत्या हो गई। इन सभी हत्याओं के पीछे भिंडरावाले का हाथ बताया गया। इसके कुछ दिन बाद ही रोडवेज बसों पर हमला हुआ और कई गैर सिखों को इसमें मार डाला गया। बढ़ती हिंसक घटनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पंजाब की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर दिया और सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा दिया।
फिर हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार
पंजाब की स्थिति खराब हो रही थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार लॉन्च हुआ। एक जून 1984 को सेना ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी शुरू की। तीन जून 1984 को पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया और इसके एक दिन बाद यानी चार जून की शाम से स्वर्ण मंदिर के पास गोलियां चलने लगीं। सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक भी पहुंची और सेना ने चारों तरफ से मोर्चा संभाल लिया। छह जून को भिंडरावाला मारा गया। सेना ने स्वर्ण मंदिर को आतंकियों के कब्जे से मुक्त करा लिया। इस ऑपरेशन में सेना के 84 जवान शहीद और 249 घायल हुए थे। 493 अलगाववादी भी मारे गए थे और 1592 को गिरफ्तार भी किया गया था।
पंजाब की स्थिति खराब हो रही थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार लॉन्च हुआ। एक जून 1984 को सेना ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी शुरू की। तीन जून 1984 को पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया और इसके एक दिन बाद यानी चार जून की शाम से स्वर्ण मंदिर के पास गोलियां चलने लगीं। सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक भी पहुंची और सेना ने चारों तरफ से मोर्चा संभाल लिया। छह जून को भिंडरावाला मारा गया। सेना ने स्वर्ण मंदिर को आतंकियों के कब्जे से मुक्त करा लिया। इस ऑपरेशन में सेना के 84 जवान शहीद और 249 घायल हुए थे। 493 अलगाववादी भी मारे गए थे और 1592 को गिरफ्तार भी किया गया था।
प्रधानमंत्री की हत्या
स्वर्ण मंदिर पर हुई कार्रवाई से कांग्रेस में फूट पड़ गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। कई जगहों पर सिखों का प्रदर्शन शुरू हो गया। इस बीच 31 अक्तूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। उनके ही बॉडीगार्ड्स सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उन पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे।
स्वर्ण मंदिर पर हुई कार्रवाई से कांग्रेस में फूट पड़ गई। कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। कई जगहों पर सिखों का प्रदर्शन शुरू हो गया। इस बीच 31 अक्तूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। उनके ही बॉडीगार्ड्स सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उन पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे।