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एक्सप्लेनर: लोकसभा-विधानसभा ईवीएम से तो राज्यसभा-एमएलसी चुनाव में बैलेट पेपर क्यों, पहले कैसे होता था मतदान?

Fri, 30 Oct 2026 04:13 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 30 Oct 2026 04:13 PM IST
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सार
भारत में कभी हर उम्मीदवार के लिए अलग बैलेट बॉक्स होता था, तो कभी एक ही मशीन से वोट डालने की व्यवस्था बनी। आज भी सभी चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता। आखिर चुनाव के हिसाब से मतदान का तरीका क्यों बदल जाता है? आइए जानते हैं।
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Why Do Lok Sabha, Assembly Use EVMs While Rajya Sabha, MLC Polls Use Ballot Papers?
ईवीएम और बैलेट पेपर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजे आ चुके हैं। ये चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। बैलेट पेपर से हुए चुनाव के दौरान भी ईवीएम की खूब चर्चा रही। प्रधानमंत्री से लेकर विपक्षी दलों तक की ओर से इसे लेकर बयानबाजी हुई।  



दरअसल, इन चुनावों में कांग्रेस ने 28 में से केवल एक सीट नागपुर में जीती। पीएम ने इसे लेकर कांग्रेस पर तंज किया। वहीं, पलटवार करते हुए कांग्रेस नेताओं ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए। साथ ही आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।


विधान परिषद चुनाव के अलावा और कहां-कहां अब भी बैलेट पेपर इस्तेमाल होता है? इसके पीछे की वजह क्या है? किन चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल होता है? देश में मतदान की प्रक्रिया कैसे बदली? आइए समझते हैं।

कैसे बदली प्रक्रिया?
कैसे बदली प्रक्रिया? - फोटो : Amar Ujala

देश में मतदान की प्रक्रिया कैसे बदली?

1. 1951-52: भारत का पहला आम चुनाव

  • भारत में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ।
  • उस समय हर उम्मीदवार के लिए अलग-अलग बैलेट बॉक्स रखे जाते थे।
  • प्रत्येक बॉक्स पर उम्मीदवार का चुनाव चिह्न लगा होता था।
  • मतदाता को एक बैलेट पेपर दिया जाता था। वह इसे अपनी पसंद के उम्मीदवार के चुनाव चिह्न वाले बॉक्स में डालता था।

2. 1962: मतदान के तरीके में बदलाव

  • 1962 के तीसरे आम चुनाव में मतदान के लिए निशान लगाने की व्यवस्था शुरू हुई।
  • अब सभी उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न एक ही बैलेट पेपर पर छपे होते थे।
  • मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने विशेष रबर की मुहर से निशान लगाते थे।
  • इसके बाद बैलेट पेपर को मोड़कर एक साझा बैलेट बॉक्स में डाल दिया जाता था।

3. 1982: पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल

  • 1982 में केरल के पारूर विधानसभा क्षेत्र में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल किया गया।
  • यहां 50 मतदान केंद्रों पर ईवीएम लगाई गई थीं।
  • हालांकि, उस समय ईवीएम के इस्तेमाल के लिए कानून में जरूरी प्रावधान नहीं था।

4. 1998: ईवीएम का इस्तेमाल बढ़ा

  • 1998 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया।
  • इसके बाद धीरे-धीरे चुनावों में ईवीएम का दायरा बढ़ाया गया।

5. 2004: सभी लोकसभा सीटों पर ईवीएम

  • 2004 के लोकसभा चुनाव में पहली बार सभी 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम से मतदान कराया गया।
  • इसके साथ ही लोकसभा चुनावों में बैलेट पेपर की जगह ईवीएम का इस्तेमाल शुरू हुआ।

6. 2013: वीवीपैट की शुरुआत

  • 2013 में वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की शुरुआत हुई।
  • इसके जरिए मतदाता वोट डालने के बाद अपनी पसंद के उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न एक पर्ची पर देख सकते हैं।
  • कुछ सेकंड बाद यह पर्ची मशीन के सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है।

7. 2019: सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट

  • 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल किया गया।
  • इससे हर मतदाता को अपने वोट की पुष्टि के लिए पर्ची देखने की सुविधा मिली।

बैलेट पेपर
बैलेट पेपर - फोटो : Amar Ujala

किन-किन चुनावों में आज भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है?

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल होता है, लेकिन देश में कई दूसरे चुनावों में आज भी बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है। इनमें पंचायत, राज्यसभा, विधान परिषद और राष्ट्रपति चुनाव शामिल हैं।

पंचायत चुनाव: कई राज्यों में बैलेट पेपर से मतदान
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला पंचायत के चुनावों में कई राज्यों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। वहीं कुछ राज्यों में ईवीएम से भी मतदान कराया जाता है।

पंचायती राज मंत्रालय की 2023 की एक रिपोर्ट में पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर और ईवीएम के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 53 प्रतिशत राज्य ग्राम पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं।

केवल तीन राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में सभी ग्राम पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम से चुनाव होते हैं। इनमें केरल, सिक्किम और दादरा व नगर हवेली और दमन व दीव शामिल हैं।

22 प्रतिशत राज्यों ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम अपनाई है, जबकि बाकी क्षेत्रों में बैलेट पेपर से मतदान होता है। जिला पंचायत चुनावों में 17 प्रतिशत राज्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का इस्तेमाल करते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ राज्यों में पंचायत चुनावों के सभी स्तरों पर ईवीएम का इस्तेमाल होता है, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है।

क्या कहते हैं आंकड़े?
क्या कहते हैं आंकड़े? - फोटो : Amar Ujala

राज्यसभा चुनाव में क्यों होता है बैलेट पेपर का इस्तेमाल?

राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग होती है। यहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली अपनाई जाती है।

संविधान के अनुच्छेद 80(4) के अनुसार, राज्यों से राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 59 के तहत राज्यसभा चुनाव में खुली मतपत्र व्यवस्था लागू है।

एकल संक्रमणीय मत प्रणाली क्या है?
इस व्यवस्था में विधायक उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्राथमिकता देते हैं। पहली पसंद वाले उम्मीदवार के सामने 1, दूसरी पसंद के सामने 2 और तीसरी पसंद के सामने 3 लिखते हैं।

सबसे पहले पहली प्राथमिकता के वोटों की गिनती होती है। अगर किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी वोट मिल जाते हैं, तो वह निर्वाचित हो जाता है। इसके बाद बची हुई सीटों के लिए नियमों के अनुसार अतिरिक्त वोट और बाहर हुए उम्मीदवारों के वोट अगली प्राथमिकताओं को हस्तांतरित किए जाते हैं।

खुली मतपत्र व्यवस्था क्या है?
राज्यसभा चुनाव में खुली मतपत्र व्यवस्था 2003 में लागू की गई थी। इसके तहत राजनीतिक दल अपने विधायकों के वोट की पुष्टि के लिए अधिकृत एजेंट नियुक्त कर सकते हैं।

  • पार्टी का विधायक वोट डालने से पहले अपना बैलेट पेपर पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाता है।
  • विधायक अपना बैलेट पेपर किसी दूसरी पार्टी के एजेंट को नहीं दिखा सकता।
  • अगर पार्टी का विधायक अपना बैलेट पेपर अपने अधिकृत एजेंट को नहीं दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य हो जाता है।
  • निर्दलीय विधायक को अपना बैलेट पेपर किसी एजेंट को दिखाने की जरूरत नहीं होती।

इस व्यवस्था का उद्देश्य राजनीतिक दलों को अपने विधायकों के मतदान की पुष्टि करने का अवसर देना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में कुलदीप नैयर बनाम भारत संघ मामले में इस व्यवस्था को संवैधानिक माना था।

विधान परिषद चुनाव: बैलेट पेपर से होता है मतदान

जिन राज्यों में विधान परिषद है, वहां विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी के चुनाव में भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 171(4) के तहत विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।

इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्राथमिकता देते हैं। पहली पसंद के लिए 1, दूसरी पसंद के लिए 2 और आगे की पसंद के लिए क्रम से अंक लिखते हैं।

विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से होता है। इनमें स्थानीय निकायों, स्नातकों और शिक्षकों के निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा के निर्वाचित विधायक भी विधान परिषद के कुछ सदस्यों को चुनते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव: गुप्त मतदान से चुने जाते हैं राष्ट्रपति

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव भी बैलेट पेपर से कराया जाता है। इसमें ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 55(3) के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है।

इस चुनाव में निर्वाचित सांसद और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गुप्त होता है। यानी किसी राजनीतिक दल को यह देखने का अधिकार नहीं होता कि उसके सांसद या विधायक ने किस उम्मीदवार को वोट दिया है।

कैसे होता है मतदान?

  • मतदाता उम्मीदवारों के नाम के सामने अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3 और आगे के अंक लिखते हैं।
  • पहली प्राथमिकता दर्ज करना जरूरी है, जबकि बाकी प्राथमिकताएं देना वैकल्पिक है।
  • सांसदों के लिए हरे रंग का और विधायकों के लिए गुलाबी रंग का बैलेट पेपर होता है।
  • निर्वाचन आयोग मतदान के लिए विशेष बैंगनी रंग का पेन उपलब्ध कराता है।
  • मतदाता को अपनी प्राथमिकताएं इसी पेन से दर्ज करनी होती हैं।

नगर निकाय चुनाव: राज्यों के अनुसार अलग-अलग व्यवस्था

नगर निगम और नगर निकाय चुनावों में मतदान का तरीका संबंधित राज्य के चुनावी नियमों के अनुसार तय होता है। इसलिए सभी राज्यों में एक जैसी व्यवस्था नहीं है।

उदाहरण के लिए, दिल्ली नगर निगम के चुनाव ईवीएम से कराए जाते हैं, जबकि पंजाब ने 2026 में नगर निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल करने का फैसला किया।

इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। 22 मई 2026 को हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब नगर निकाय चुनाव नियम, 1994 में बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों से मतदान कराने का प्रावधान है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग को दोनों में से किसी एक तरीके को चुनने का अधिकार है।

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