Dara Singh Chauhan: हारे खिलाड़ी पर BJP ने क्यों लगाया दांव, राम के साथ दारा सिंह का गठजोड़ कितना होगा कामयाब?
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विस्तार
दारा सिंह चौहान पर भाजपा ने एक बार फिर दांव लगाया है। उन्हें यूपी विधान परिषद के उपचुनाव में पार्टी की तरफ से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके पहले उन्होंने मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था, लेकिन इसी सीट पर जब उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया, तो उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुधाकर सिंह ने करारी मात दी थी।
प्रश्न यही है कि भाजपा ने एक हारे हुए खिलाड़ी पर दोबारा दांव क्यों खेला? दारा सिंह चौहान भाजपा के लिए कितने लाभकारी हो सकते हैं? चर्चा यह भी है कि उन्हें एमएलसी बनाने के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है। भाजपा जिस समय उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश में 'राम लहर' होने का दावा कर रही है, उस समय उसे अपनी जीत के लिए दारा सिंह चौहान पर इतना भरोसा क्यों है?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह उत्तर प्रदेश की जातिगत राजनीति में दारा सिंह का करिश्मा ही है कि वे जिस भी दल में जाना चाहते हैं, वह उन्हें अपनाने के लिए तैयार रहता है। वे इसके पहले भी सपा, बसपा और भाजपा में रह चुके हैं। इसका बड़ा कारण है कि उनकी जाति नोनिया चौहान पर उनका काफी प्रभाव है। जब भाजपा ने अपने अति पिछड़ा वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश किया तो उसे दारा सिंह चौहान जैसे ही नेताओं की जरूरत थी, जो अपनी जातियों के वोट एकमुश्त लाकर उसकी झोली में डाल दें। दारा सिंह चौहान ने यही काम किया था।
अब इंडिया गठबंधन की जातिगत समीकरणों की राजनीति और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की रणनीति को चुनौती देने के लिए भाजपा को एक बार फिर दारा सिंह चौहान जैसे लोगों की जरूरत है। यही कारण है कि घोसी सीट को हारने के बाद भी भाजपा ने उन्हें न केवल विधान परिषद का प्रत्याशी बना दिया, बल्कि उन्हें मंत्री भी बनाए जाने की तैयारी है।
मिशन 80 में होंगे उपयोगी
भाजपा इस बार यूपी की सभी 80 सीटों को जीतने का प्लान बना रही है। उसका मानना है कि राम लहर में उसका यह काम काफी आसान रहेगा। 2014 और 2019 में भाजपा की यूपी में शानदार सफलता उसके दावों पर बहुत ज्यादा संदेह करने का कारण भी नहीं पैदा होने देती। लेकिन इसके बाद भी वह पिछड़ी, अति पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को अपने साथ ज्यादा मजबूती के साथ बांधकर रखना चाहती है।
शायद इसका कारण अमित शाह की चुनाव लड़ने की वह रणनीति ही है, जिसमें वह अपनी जीत को 100 फीसदी सुनिश्चित करने के लिए हर फैक्टर को अपने साथ जोड़ लेना चाहते हैं। दारा सिंह चौहान इसी रणनीति में फिट बैठने के कारण उपचुनाव के लिए भाजपा की पहली पसंद बन गए।
मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड पिछड़े-गरीबों के साथ- भाजपा
उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अमर उजाला से कहा कि दारा सिंह चौहान को पार्टी ने अवसर क्यों दिया है, यह समझने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का ट्रैक रिकॉर्ड देखना चाहिए। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पिछड़ों, अति पिछड़ों और गरीबों को आगे बढ़ाने का काम किया है। केंद्र सरकार से लेकर यूपी सरकार के मंत्रिमंडल में उचित महत्त्व देकर पिछड़ी-अति पिछड़ी जातियों का सम्मान किया गया है। उन्होंने कहा कि दारा सिंह चौहान अति पिछड़ी जाति के प्रमुख नेता हैं और उन्हें महत्त्व देकर पार्टी ने गरीबों-पिछड़ों की आवाज को मजबूत करने का काम किया है।