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बंगलूरू: उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री पर विवाद क्यों? एबीवीपी ने एनएलएसआईयू से स्क्रीनिंग रद्द करने को कहा

Sun, 13 Sep 2026 03:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 13 Sep 2026 03:20 PM IST
सार

बंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में 14 सितंबर को कार्यकर्ता उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने की मांग की है। वहीं अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने भी स्क्रीनिंग पर आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम को लेकर क्या फैसला करेगा? अकादमिक स्वतंत्रता की सीमा क्या होगी? इस विवाद के बढ़ने की वजह क्या है? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
 

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why Bengaluru ABVP Opposes Umar Khalid Documentary Screening  Seeks Cancellation at NLSIU
उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री का विरोध क्यों? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बंगलूरू की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में कार्यकर्ता उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट की 14 सितंबर को प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर विवाद शुरू हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कार्यक्रम का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी अनुमति रद्द करने की मांग की है। एबीवीपी बंगलूरू ने कहा कि उसने स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग को लेकर एनएलएसआईयू प्रशासन को शिकायत दी है, लेकिन उसे अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन ललित वाचानी ने किया है।

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एबीवीपी ने स्क्रीनिंग रद्द करने के लिए क्या तर्क दिया?

  • एबीवीपी ने उमर खालिद के नाम को 2016 के जेएनयू प्रदर्शनों के दौरान लगे नारों, अफजल गुरु की बरसी से जुड़े कार्यक्रमों, सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों से जुड़ी विवादित घटनाओं के संदर्भ में रखा है। संगठन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई और राष्ट्रीय एकता होना चाहिए।
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  • एबीवीपी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर को राजनीतिक प्रचार या नागरिक अशांति को महिमामंडित करने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन ने एनएलएसआईयू प्रशासन से कार्यक्रम के लिए दी गई सभी अनुमतियां तुरंत रद्द करने की मांग की है।
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अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने विश्वविद्यालय से क्या कहा?

अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने भी शनिवार को एनएलएसआईयू के कुलपति और रजिस्ट्रार को ईमेल भेजकर प्रस्तावित स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें हिरासत, जमानत, असहमति, संवैधानिक स्वतंत्रता और आपराधिक न्याय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अकादमिक चर्चा से आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनका तर्क है कि ऐसे विषयों पर चर्चा एक संतुलित कार्यक्रम के जरिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर एनएलएसआईयू इन मुद्दों पर अकादमिक चर्चा करना चाहता है तो उसमें संवैधानिक विशेषज्ञों, कानूनी जानकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पक्ष और आतंकवाद तथा अलगाववादी हिंसा से प्रभावित लोगों का पक्ष भी शामिल होना चाहिए।

अकादमिक स्वतंत्रता को लेकर भारद्वाज ने क्या सवाल उठाया?

  • भारद्वाज ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के साथ संस्थान की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय को यह देखना चाहिए कि किसी कार्यक्रम से छात्रों और संस्था से जुड़े मूल्यों पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने एनएलएसआईयू से कार्यक्रम पर दोबारा विचार करने की अपील की।
  • दूसरी ओर, एबीवीपी भी विश्वविद्यालय की संस्थागत पहचान और उसके शैक्षणिक माहौल का हवाला देते हुए स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग कर रही है। इस तरह 14 सितंबर की प्रस्तावित स्क्रीनिंग अब अकादमिक चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक और वैचारिक विवाद का विषय बन गई है।

अब एनएलएसआईयू के सामने क्या विकल्प हैं?

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्क्रीनिंग को लेकर कोई जवाब सामने नहीं आया है। एबीवीपी ने कार्यक्रम की सभी अनुमतियां रद्द करने की मांग की है, जबकि भारद्वाज ने संतुलित कार्यक्रम के जरिए संबंधित मुद्दों पर चर्चा कराने का सुझाव दिया है। विवाद का केंद्र यही है कि उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को अकादमिक चर्चा के रूप में देखा जाए या इसे राजनीतिक प्रचार का मंच माना जाए। अब नजर एनएलएसआईयू प्रशासन के फैसले पर है कि वह 14 सितंबर को प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर क्या कदम उठाता है।
 

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