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टू प्लस टू वार्ता: अमेरिका की आंखों में खटक रही है भारत- रूस की दोस्ती, ईरान से बढ़ता तेल का व्यापार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 29 Jun 2018 09:54 AM IST
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अमेरिका का भारत के साथ होने वाली टू प्लस टू वार्ता आखिरी समय में टाला जाना दोनों देशों में तेजी से रिश्तों में बढ़ती खटास का ही नतीजा माना जा रहा है। विदेश मामलों के जानकार और कूटनीतिज्ञ इसे दुर्भाग्यपूर्ण और ट्रंप प्रशासन की कूटनीति का हिस्सा बता रहे हैं। वैसे अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि अमेरिका और भारत के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली यह वार्ता दूसरी बार क्यों स्थगित की गई है।
वैसे जानकारों का यह भी मानना है कि विदेश मंत्री पोम्पियो इन्हीं दिनों में कोरिया और रूस की यात्रा पर हैं और यह एक वजह इस वार्ता को टालने की हो सकती है। वहीं बताया यह भी जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों काफी व्यस्त हैं।
बता दें कि टू प्लस टू वार्ता 6 जुलाई को होने वाली थी जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री पोम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस भाग लेने वाले थे। यह पहली बार नहीं है जब वार्ता टाली गई हो। इससे पहले मार्च में भी यह वार्ता टाली गई थी तब अमेरिका कोई अंदरूनी मामला ही था।
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पिछली बार जब वार्ता टाली गई थी तब उसका कारण ट्रंप का तत्कालीन विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को पद से हटा दिया जाना बताया गया था जबकि ऐसा माना जा रहा है कि इस बार भी मौजूदा विदेश मंत्री जिम मैटिस ट्रंप की आंखों में खटक रहे हैं।
वैसे जानकार इस वार्ता के स्थगित होने की वजह रूस और ईरान से भारत के बढ़ते रिश्ते भी मान रहे हैं। भारत ने रूस से 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि अमेरिकी चुनाव में रूस के दखल के चलते दोनों देशों के रिश्ते बिगड़े हैं। इसको लेकर अमेरिका ने रूस के खिलाफ अगस्त 2017 में काटसा कानून पारित किया था। भारत चाहता है कि रूस से उसके रक्षा सौदे इस कानून के दायरे से बाहर हों।
यही नहीं जानकार तो यह भी मान रहे हैं कि अमेरिका को भारत की रूस से करीबी रास नहीं आ रही थी। इसके अलावा वार्ता के स्थगन से एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने भारत और अन्य देशों से चार नवंबर तक ईरान से तेल आयात खत्म करने या प्रतिबंधों का सामना करने को कहा था। इसको भी इस वार्ता के टाले जाने की वजह माना जा रहा है।
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वैसे जानकारों का यह भी मानना है कि विदेश मंत्री पोम्पियो इन्हीं दिनों में कोरिया और रूस की यात्रा पर हैं और यह एक वजह इस वार्ता को टालने की हो सकती है। वहीं बताया यह भी जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों काफी व्यस्त हैं।
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बता दें कि टू प्लस टू वार्ता 6 जुलाई को होने वाली थी जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री पोम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस भाग लेने वाले थे। यह पहली बार नहीं है जब वार्ता टाली गई हो। इससे पहले मार्च में भी यह वार्ता टाली गई थी तब अमेरिका कोई अंदरूनी मामला ही था।
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पिछली बार जब वार्ता टाली गई थी तब उसका कारण ट्रंप का तत्कालीन विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को पद से हटा दिया जाना बताया गया था जबकि ऐसा माना जा रहा है कि इस बार भी मौजूदा विदेश मंत्री जिम मैटिस ट्रंप की आंखों में खटक रहे हैं।
वैसे जानकार इस वार्ता के स्थगित होने की वजह रूस और ईरान से भारत के बढ़ते रिश्ते भी मान रहे हैं। भारत ने रूस से 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि अमेरिकी चुनाव में रूस के दखल के चलते दोनों देशों के रिश्ते बिगड़े हैं। इसको लेकर अमेरिका ने रूस के खिलाफ अगस्त 2017 में काटसा कानून पारित किया था। भारत चाहता है कि रूस से उसके रक्षा सौदे इस कानून के दायरे से बाहर हों।
यही नहीं जानकार तो यह भी मान रहे हैं कि अमेरिका को भारत की रूस से करीबी रास नहीं आ रही थी। इसके अलावा वार्ता के स्थगन से एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने भारत और अन्य देशों से चार नवंबर तक ईरान से तेल आयात खत्म करने या प्रतिबंधों का सामना करने को कहा था। इसको भी इस वार्ता के टाले जाने की वजह माना जा रहा है।
वहीं अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में ईरान को दुनिया के लिए खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत ईरान के साथ अपने रिश्तों पर पुनर्विचार करे।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत को तय करना है कि वह ईरान के साथ कारोबार करना जारी रखना चाहता है या नहीं। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत समेत अन्य देशों को 4 नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद करने की चेतावनी के बाद आया है।
उन्होंने कहा कि ईरान में धर्मशासित तानाशाही है जो अपने लोगों का उत्पीड़न करने के साथ ही आतंकवाद को फंड दे रहा है। साथ ही मध्य पूर्व में संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी ईरान के साथ कारोबार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात हुई।
बता दें कि दोनों देशों में व्यापार और कई तरह की संधि को लेकर शुरू होने वाली इस वार्ता को लेकर बात जून 2017 में ही हुई थी। इस अहम बैठक को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई थी जो आज तक शुरू नहीं हो पाई है।
बता दें कि पिछले दिनों जिस तरह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार को लेकर खटास बढ़ी है उसे देखते हुए लग रहा है कि दोनों के रिश्ते जल्द सामान्य नहीं होंगे। वैसे भारत अमेरिका से व्यापारिक रिश्ता सुधारने के लिए 1000 नागरिक विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया है। दोनों देशों के रिश्तों में खटास इसी महीने के मार्च में शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले एल्युमिनियम और इस्पात पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिका से आयात होने वाली मोटरसाइकिल, सेब, बादाम समेत 30 उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
टू प्लस टू वार्ता क्या है
भारत और अमेरिका के बीच यह विशेष वार्ता (टू प्लस टू) है जिसमें दोनों देशों के बीच कारोबारी मुद्दों पर बात होनी थी। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं। जिसमें दोनों देशों के रणनीतिक, कूटनीतिक और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होनी है।
टू प्लस टू वार्ता दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार के लिए अहम मानी जा रही है। इस बैठक का अहम मकसद दोनों पक्षों के सुरक्षा व रणनीतिक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर आपसी हितों पर चर्चा करना भी है।
इस वार्ता की शुरुआत राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी जिसमें भारत के साथ कूटनीतिक व वाणिज्यिक वार्ता होती थी जिसमें दोनों देशों के विदेश, रक्षा, वित्त, वाणिज्य व ऊर्जा मंत्री शामिल होते थे।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत को तय करना है कि वह ईरान के साथ कारोबार करना जारी रखना चाहता है या नहीं। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत समेत अन्य देशों को 4 नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद करने की चेतावनी के बाद आया है।
उन्होंने कहा कि ईरान में धर्मशासित तानाशाही है जो अपने लोगों का उत्पीड़न करने के साथ ही आतंकवाद को फंड दे रहा है। साथ ही मध्य पूर्व में संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी ईरान के साथ कारोबार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात हुई।
बता दें कि दोनों देशों में व्यापार और कई तरह की संधि को लेकर शुरू होने वाली इस वार्ता को लेकर बात जून 2017 में ही हुई थी। इस अहम बैठक को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई थी जो आज तक शुरू नहीं हो पाई है।
बता दें कि पिछले दिनों जिस तरह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार को लेकर खटास बढ़ी है उसे देखते हुए लग रहा है कि दोनों के रिश्ते जल्द सामान्य नहीं होंगे। वैसे भारत अमेरिका से व्यापारिक रिश्ता सुधारने के लिए 1000 नागरिक विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया है। दोनों देशों के रिश्तों में खटास इसी महीने के मार्च में शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले एल्युमिनियम और इस्पात पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिका से आयात होने वाली मोटरसाइकिल, सेब, बादाम समेत 30 उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
टू प्लस टू वार्ता क्या है
भारत और अमेरिका के बीच यह विशेष वार्ता (टू प्लस टू) है जिसमें दोनों देशों के बीच कारोबारी मुद्दों पर बात होनी थी। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं। जिसमें दोनों देशों के रणनीतिक, कूटनीतिक और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होनी है।
टू प्लस टू वार्ता दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार के लिए अहम मानी जा रही है। इस बैठक का अहम मकसद दोनों पक्षों के सुरक्षा व रणनीतिक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर आपसी हितों पर चर्चा करना भी है।
इस वार्ता की शुरुआत राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी जिसमें भारत के साथ कूटनीतिक व वाणिज्यिक वार्ता होती थी जिसमें दोनों देशों के विदेश, रक्षा, वित्त, वाणिज्य व ऊर्जा मंत्री शामिल होते थे।