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US Tariffs: भारत पर 10% टैरिफ क्यों? सरकार बोली- यह सेक्शन 301 की कार्रवाई, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी
Sat, 25 Jul 2026 01:11 AM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 25 Jul 2026 01:11 AM IST
सार
अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लागू किए हैं। भारत को 10 प्रतिशत वाले निचले टैरिफ समूह में रखा गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सेक्शन 301 की प्रवर्तन कार्रवाई है और भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है।
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रणधीर जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित नए वैश्विक टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने इस फैसले का संज्ञान लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि यह अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत की गई प्रवर्तन (Enforcement) कार्रवाई है। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है।
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क्या बोला विदेश मंत्रालय?
साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने अमेरिकी घोषणा का संज्ञान लिया है। यह सेक्शन 301 के तहत की गई प्रवर्तन कार्रवाई है, जिसकी शुरुआत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद हुई थी। इस विषय पर भारत अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुका है। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के उद्देश्य से बातचीत जारी है।"
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क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने गुरुवार को ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए टैरिफ की घोषणा की। ये शुल्क शुक्रवार से प्रभावी हो गए हैं। अमेरिका का कहना है कि जिन देशों ने 'फोर्स्ड लेबर' (जबरन श्रम) से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक नहीं लगाई है, उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
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भारत को 10% टैरिफ श्रेणी में क्यों रखा गया?
नई व्यवस्था के तहत भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ वाले निचले समूह में रखा गया है। इस श्रेणी में भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मेक्सिको और बांग्लादेश सहित कुल 17 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में भारत को 12.5 प्रतिशत टैरिफ वाले उच्च समूह में रखा जाना प्रस्तावित था, लेकिन श्रम मानकों को लेकर अमेरिका के साथ सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत के बाद भारत को 10 प्रतिशत की श्रेणी में रखा गया।
किन देशों पर कितना टैरिफ लगाया गया?
यूएसटीआर के अनुसार, 10 प्रतिशत टैरिफ उन देशों पर लागू होगा, जिन्होंने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का कानून बनाया है, ऐसा करने की प्रतिबद्धता जताई है या फिर आंशिक व्यवस्था लागू की है। वहीं यूरोपीय संघ, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड के कुछ उत्पादों पर 10 से 12.5 प्रतिशत के बीच अलग-अलग दरें लागू की गई हैं। जांच के दायरे में आए अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत का पूरा शुल्क लगाया गया है।
सेक्शन 301 की जांच कैसे हुई?
यूएसटीआर ने मार्च में 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ सेक्शन 301(बी) के तहत जांच शुरू की थी। इस दौरान 45 से अधिक देशों की सरकारों से परामर्श किया गया, कई सार्वजनिक सुनवाई आयोजित हुईं और 1,600 से अधिक लिखित टिप्पणियों का अध्ययन किया गया। इसके बाद यह फैसला लिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या संबंध है?
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अपनी व्यापार नीति को आगे बढ़ाने के लिए सेक्शन 301 के वैधानिक प्रावधानों का सहारा लेते हुए नए टैरिफ लागू किए।