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ढांचा विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपी बरी, जानिए फैसले पर किसने क्या कहा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 30 Sep 2020 08:33 PM IST
ढांचा विध्वंस मामले पर नेताओं की प्रतिक्रिया
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सीबीआई की एक विशेष अदालत ने बुधवार को ढांचा विध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ढांचा विध्वंस की घटना पूर्वनियोजित नहीं थी। यह आकस्मिक घटना थी। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले, बल्कि इन्होंने उन्मादी भीड़ को रोकने के प्रयास किए थे। 



संघ ने विशेष अदालत के फैसले का स्वागत किया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विवादित ढांचा विध्वंस मामले में विशेष अदालत के फैसले का स्वागत किया है। संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा, सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा विवादास्पद ढांचे के विध्वंस मामले में सभी आरोपियों को ससम्मान बरी करने के फैसले का संघ स्वागत करता है। इस निर्णय के बाद समाज के सभी वर्गों को परस्पर विश्वास और सौहार्द के साथ एकजुट होकर देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए देश को प्रगति की दिशा में ले जाने के काम में जुट जाना चाहिए।


विशेष कोर्ट का फैसला न्याय और सत्य की विजय : विहिप
राममंदिर आंदोलन की अगुवाई करने वाले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने विशेष कोर्ट के फैसले को सत्य और न्याय की विजय बताया। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, अदालतों को न्याय देने में 28 वर्ष लग गए। उम्मीद है कि अब इस निर्णय से उन विषयों का पटाक्षेप हो जायेगा, जो 472 वर्षों से हिंदू मानस को व्यथित करते रहे हैं।

आलोक कुमार ने कहा, रामभक्तों ने इन झूठे मुकदमों का 28 वर्ष धैर्य और साहस से सामना किया। इसमें 49 एफआईआर थी, अभियोजन ने 351 गवाह पेश किए और 600 दस्तावेज दिए गए। हम उन 17 लोगों का स्मरण करते हैं, जो मुकदमे के चलते बैकुंठ सिधार गए। इनमें अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, महंत रामचंद्रदास परमहंस, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, आचार्य गिरिराज किशोर, बाल ठाकरे, विष्णुहरि डालमिया जैसे महानुभाव हैं। आलोक कुमार ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के आदेश से यह सदा के लिए घोषित हो गया कि अयोध्या की वह भूमि रामलला विराजमान की ही है। अब विशेष कोर्ट के आदेश ने षड़यंत्र के आरोपों को खत्म कर दिया अब हमें राजनीति से ऊपर उठकर संगठित और प्रगत भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ना होगा।

ऐतिहासिक फैसला, उम्मीद है विवाद खत्म होगा: जोशी
वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने विवादित ढांचा विध्वंस मामले में विशेष के फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए उम्मीद जताई कि इसके साथ ही विवाद खत्म हो जाएगा। फैसले के बाद मीडिया से चर्चा में जोशी ने कहा, कोर्ट ने एतिहासिक फैसला दिया है। मैं अपनी ओर से पेश हुए वकीलों का धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने सही पक्ष और तथ्य न्यायालय के सामने रखे। उनका परिश्रम था जिससे इस जटिल मामले में सीबीआई अपना पक्ष नहीं रख पाई और जज ने सच को सबके सामने रख दिया। जोशी ने कहा, इस निर्णय से सिद्ध हो गया कि हमारे कार्यक्रम किसी षड्यंत्र के तहत नहीं थे। अब यह विवाद खत्म होना चाहिए। पूरे देश को भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए तत्पर होना चाहिए। मैं एक ही बात कहूंगा कि जय-जय श्री राम और सबको सन्मति दे भगवान।

देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है : राजनाथ
विशेष अदालत द्वारा ढांचा विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का स्वागत करता हूं। यह साबित हुआ कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई।

आरोप के कलंक से बरी हो गए : साध्वी ऋतंभरा
धर्म के काम में बड़ी बाधाएं आती हैं लेकिन ईश्वर सत्य के साथ होता है। न्याय हुआ है, हमें खुशी है कि अदालत ने धर्म कार्य को सही माना। हम आरोप के कलंक से मुक्त हो गए। आज सब कुछ दूध का दूध पानी का पानी हो गया।

येदियुरप्पा ने इस फैसले को सत्य की जीत बताया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस फैसले को सत्य की जीत बताया है तो विपक्षी दल इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। उमा भारती, लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी आदि नेताओं को बरी करने के फैसले को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ बताया है। विस्तार से जानिए कि इस फैसले को लेकर किसने क्या प्रतिक्रिया दी।   

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है निर्णय : अहमद पटेल

कांग्रेस ने विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रतिकूल करार दिया। पार्टी ने कहा कि संविधान, सामाजिक सौहार्द्र व भाईचारे में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति उम्मीद करता है कि इस तर्कविहीन निर्णय के खिलाफ राज्य और केंद्र सरकार उच्च अदालत में अपील दायर करेगी ।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि सीबीआई अदालत के इस फैसले को स्वाभाविक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'ढांचा विध्वंस मामले में यह फैसला हैरान करने वाला है। यह स्वाभाविक न्याय के सिद्धांतों और उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के विरुद्ध है।'

संविधान की परिपाटी से परे है यह फैसला : सुरजेवाला

वहीं, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ढांचा विध्वंस मामले में सभी आरोपियों को बरी करने का विशेष अदालत का फैसला उच्चतम न्यायालय के निर्णय व संविधान की परिपाटी से परे है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नौ नवंबर, 2019 के निर्णय के मुताबिक ढांचा गिराना गैरकानूनी अपराध था।

अहमद पटेल ने कहा, 'पूरा देश जानता है कि भाजपा-आरएसएस और उनके नेताओं ने राजनीतिक फायदे के लिए देश और समाज के सांप्रदायिक सौहार्द्र को तोड़ने का एक घिनौना षड्यंत्र किया था। उस समय की उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार भी सांप्रदायिक सौहार्द्र भंग करने की इस साजिश में शामिल थी।' 

जब मस्जिद तोड़ी गई तो सभी निर्दोष कैसे: जमीयत
देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष अदालत के फैसले पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने दावा किया, यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा, सवाल यह है कि जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई तो सीबीआई की नजर में सब निर्दोष कैसे हो गए? क्या यह न्याय है या न्याय फेल हो गया है? मदनी ने दावा किया कि यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है।
 

अदालत का फैसला सत्य की जीत : येदियुरप्पा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने फैसले का स्वागत किया और इसे 'सत्य की जीत' करार दिया। येदियुरप्पा ने कहा, 'अदालत का यह कहना कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, सत्य की विजय है ।'उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें बहुत खुशी है क्योंकि वह भी राम जन्मभूमि आंदोलन का हिस्सा थे ।

उन्होंने राम मंदिर निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार करने का श्रेय आडवाणी, जोशी और उमा भारती को दिया। येदियुरप्पा ने कहा, 'सभी भारतीयों के आनंद के क्षण में, मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं ।' बाबरी विध्वंस के दिन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आडवाणी के उस ऐतिहासिक भाषण को कोई नहीं भूल सकता है।

जनता से माफी मांगें षड्यंत्र के जिम्मेदार : योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'सत्यमेव जयते' के अनुरूप सत्य की जीत हुई है। मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस ‘षड्यंत्र’ के लिए जिम्मेदार लोग देश की जनता से माफी मांगें।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'यह फैसला स्पष्ट करता है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर वोट बैंक की राजनीति के लिए देश के पूज्य संतों, भाजपा नेताओं, विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारियों और समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम किया।'

क्या जादू से गिर गई थी मस्जिद : ओवैसी

ढांचा विध्वंस के सभी आरोपियों को बरी कर देने के विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अप्रिय करार दिया। ओवैसी ने कहा कि सीबीआई को फैसले के खिलाफ अपील करनी चाहिए ताकि उसकी स्वतंत्रता बची रहे।

उन्होंने सवाल किया, 'क्या छह दिसंबर को किसी जादू से मस्जिद ढह गई थी? वहां लोगों को इकट्ठा होने के लिए किसने बुलाया? किसने सुनिश्चित किया कि वे वहां घुसें?' उन्होंने कहा कि वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से इस फैसले के खिलाफ अपील करने का आग्रह करते हैं।

ढांचा विध्वंस मामले को भुलाने की जरूरत : शिवसेना

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राम जन्मभूमि मालिकाना हक वाद में 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले ने अपनी प्रासंगिकता खो दी थी। राउत ने ढांचा विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपियों को विशेष अदालत द्वारा बरी करने के फैसले का स्वागत किया। 

राउत ने कहा कि ढांचा विध्वंस मामले को अब भुला देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, यह फैसला अपेक्षित था। मैं शिवसेना और पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की ओर से अदालत के इस फैसले का स्वागत करता हूं।' उन्होंने कहा कि यदि ढांचा विध्वंस नहीं होता तो अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन संभव नहीं होता।

निष्पक्ष काम करने में विफल हुई सीबीआई : स्तालिन

डीएमके के अध्यक्ष एमके स्तालिन ने कहा कि ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई निष्पक्ष रूप से काम करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी पिंजरे में बंद तोते की तरह हो गई है। स्तालिन ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थान को नष्ट करना गलत और अवैध है। 

अपील दायर करने पर विचार करेगी सीबीआई

सीबीआई कौंसिल ने कहा है कि एजेंसी विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ एक अपील दायर करने पर विचार करेगी। सीबीआई कौंसिल ललित सिंह ने कहा कि आज के फैसले की प्रति मिलने के बाद यह सीबीआई मुख्यालय भेजी जाएगी, जहां विधि विभाग इसका अध्ययन करेगा। उसके सुझावों के आधार पर अपील करने या न करने का फैसला किया जाएगा।

अब न खड़ा हो कोई नया विवाद : इकबाल अंसारी
अयोध्या भूमि विवाद मामले में वादियों में से एक रहे इकबाल अंसारी ने देश से गुहार लगाई है कि इस फैसले को लेकर अब कोई और नया विवाद न खड़ा किया जाए। उन्होंने कहा, 'कई लोगों ने इस संबंध में मामले दायर किए थे। लेकिन हम चाहते हैं कि विवाद समाप्त हो। हम संविधान और अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। अब देश में कोई नया विवाद नहीं होना चाहिए।'

अदालत के फैसले से आश्चर्य नहीं : एनसीपी
एनसीपी ने कहा कि विशेष अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने से वह चकित नहीं है। महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने एक वीडियो संदेश में कहा, 'मामले में अदालत ने आज फैसला दे दिया है। यह अपेक्षित था और इसलिए हमें आश्चर्य नहीं हुआ।' मंत्री ने कहा कि साक्ष्यों के अभाव में आरोपी भले ही बरी हो गए लेकिन जांच एजेंसियों ने साक्ष्यों के आधार पर मामला दायर किया था।
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