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गुजरात : 47 लाख मौतों की डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट निराधार, स्वास्थ्य मंत्रियों ने लगाया देश की छवि खराब करने का आरोप
Sat, 07 May 2022 02:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, केवडिया
पीटीआई, केवडिया
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 07 May 2022 02:05 PM IST
सार
स्वास्थ्य मंत्रियों ने कहा कि भारत में मौतें दर्ज करने का सशक्त, प्रभावी व व्यापक तंत्र है। देश में कोविड से हुई मौतों को भी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता के साथ दर्ज किया गया है।
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कोरोना से मौत
- फोटो : social media
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विस्तार
भारत में कोविड-19 से 47 लाख से ज्यादा मौतें होने के डब्ल्यूएचओ के दावे को देश के विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह देश की छवि खराब करने का प्रयास है।
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गुजरात के केवडिया में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 14वें सम्मेलन में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्रियों ने यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत में मौतें दर्ज करने का सशक्त, प्रभावी व व्यापक तंत्र है। देश में कोविड से हुई मौतों को भी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता के साथ दर्ज किया गया है।
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मॉडलिंग प्रणाली त्रुटिपूर्ण
सम्मेलन में शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित कर भारत में 47 लाख से ज्यादा मौतों के विश्व स्वास्थ्य संगठन के दावे पर कड़ी आपत्ति प्रकट की गई। प्रस्ताव में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ का अनुमान भारत का अस्वीकार्य है। डब्ल्यूएचओ द्वारा इन आंकड़ों को तैयार करने के लिए अपनाई गई मॉडलिंग प्रणाली त्रुटिपूर्ण है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की इस शीर्ष सलाहकार इकाई की तीन दिनी बैठक गुरुवार को शुरू हुई थी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने की। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने मौत का अनुमान लगाने के लिए डब्ल्यूएचओ की मॉडलिंग पद्धति पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भारत की प्रतिष्ठा को कलंकित करने का प्रयास है। सम्मेलन में सभी स्वास्थ्य मंत्रियों ने रिपोर्ट की निंदा की है और इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। हमने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से डब्ल्यूएचओ को भारत की निराशा से अवगत कराने और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का आग्रह किया है।
डब्ल्यूएचओ ने सही तरीके से गणना नहीं की
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला ने आरोप लगाया कि डब्ल्यूएचओ की मौत का अनुमान मनगढ़ंत है। इसने 47.4 लाख कोविड मौतों के आंकड़े तक पहुंचने के लिए सही तरीके से गणना नहीं की। भारत में एक मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली है और इसकी प्रामाणिकता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उपयोग की गई मॉडलिंग पद्धति वैज्ञानिक नहीं थी।