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ये डीके, डीके चिल्लाने वाले कौन हैं?: सीएम सिद्धारमैया ने कार्यकर्ताओं की हरकत देख खोया आपा, लगाई फटकार

Tue, 27 Jan 2026 07:53 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 27 Jan 2026 07:53 PM IST
सार

कर्नाटक मे नेतृत्व को लेकर जारी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है। मंगलवार को उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब सिद्धारमैया के सामने कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता डीके शिवकुमार के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। पढ़ें क्या है पूरा मामला

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Who are those shouting ‘DK, DK’," an angry Siddaramaiah asked the Congress leaders
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया मंगलवार को एक रैली में उस समय अपना आपा खो बैठे, जब युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाये। शुरू में नारों को नजरअंजाद कर सिद्धारमैया भाषण देते रहे, लेकिन जब मंच के नीचे से नारे और तेज हो गए तो मुख्यमंत्री गुस्से में मंच से ही कार्यकार्ताओं को भड़क गए।

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मुख्यमंत्री मंच से भड़के
सीएम सिद्धरमैया उपमुख्यमंत्री शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘वीबी- जी राम जी’ अधिनियम लाये जाने के विरुद्ध प्रदर्शन में भाग लेने पहुंचे थे।
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जैसे ही सभा को संबोधित करने के लिए कुर्सी से उठे कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता ‘डीके, डीके’ के नारे लगाने लगे। जैसे-जैसे वह भाषण देने के लिए आगे बढ़ा नारेबाजी और तेज होती गई। इस बात से नाराज होकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर चिल्लाते हुए उन्हें चुप रहने को कहा, लेकिन कार्यकर्ताओं ने उनकी अनसुनी कर दी। 
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गुस्से में सिद्धरमैया ने कांग्रेस नेताओं से पूछा, ये ‘डीके, डीके’ कौन चिल्ला रहा है? इसके बाद कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। स्थिति को बिगड़ता देख  संचालक ने युवा कांग्रेस के नेता चुप रहने की हिदायत दी। मुख्यमंत्री भाषण दे रहे हैं। हम जानते हैं कि आप कौन हैं। चुपचाप मुख्यमंत्री का भाषण सुनें।  सिद्धरमैया का भाषण शुरू होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने बाधा डालने की कोशिश की।

कई बार खुलकर सामने आ चुका है सत्ता का संघर्ष
बता दें कि काफी समय से कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस में सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर बयानबाजी सामने आ चुकी है। पार्टी के कई विधायकों और विधानपरिषद सदस्यों ने उपमुख्यमंत्री के पक्ष में पैरवी भी की थी। सिद्धरमैया और शिवकुमार दोनों ने कहा है कि वे पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे। सिद्धरमैया ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और आलाकमान उनके साथ है।

कांग्रेस ने मनरेगा को लेकर निकाला विरोध मार्च 
कर्नाटक में मनरेगा को वीबी-जी राम जी में बदलने को लेकर राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कांग्रेस के तमाम नेताओं ने मंगलवार को केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ राजभवन चलो मार्च निकाला लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मार्च में कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ पार्टी के कई विधायक और सांसद भी शामिल थे।

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को विकसित भारत-गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) से बदल दिया था। कांग्रेस इस फैसले का विरोध कर रही है। उसका आरोप कि केंद्र ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे को खत्म कर रही है और पंचायतों के अधिकारों को कम कर रही है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि वीबी-जी राम जी में उल्लिखित राम का अर्थ दशरथ राम या सीता राम नहीं है। इसका अर्थ है विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)।


सिद्धरमैया ने आरोप लगाते हुए कहा, मनरेगा जनता का अधिकार था, लेकिन अब नहीं। दिव्यांगजनों सहित लगभग पांच करोड़ लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा था। अब केंद्र सरकार यह तय करना चाहती है कि कौन सा काम किया जाना चाहिए जबकि पहले यह पंचायतें तय करती थीं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंचायतों की भूमिका बुरी तरह से सीमित कर दी गई है। पहले हर पंचायत को लगभग एक करोड़ रुपये मिलते थे और अब उन्हें इससे वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, हम तब तक लड़ेंगे जब तक वीबी-जी राम जी रद्द नहीं हो जाता और मनरेगा को फिर से लागू नहीं कर दिया जाता।

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