फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   who approved indian made corona vaccine covaxin

कोवाक्सिन को डब्ल्यूएचओ से मंजूरी: वैक्सीन सर्टिफिकेट से लेकर प्रतिबंध तक, जानें भारतीयों को कितना होगा फायदा?

Wed, 03 Nov 2021 07:18 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Wed, 03 Nov 2021 07:18 PM IST
सार

भारत में अभी ज्यादातर कोवाक्सिन और कोविशील्ड के डोज लगाए जा रहे हैं। शुरूआत में ही सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई कोविशील्ड को डब्ल्यूएचओ ने मान्यता दे दी थी, अब कोवाक्सिन को भी मिल गई है। 

विज्ञापन
who approved indian made corona vaccine covaxin
कोरोना टीका (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवाक्सिन' को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दे दी है। दुनिया में अब तक आठ वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिल चुकी है।
विज्ञापन


इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के रीजनल डायरेक्टर डॉ. रजनीकांत बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर कोवाक्सिन को मंजूरी मिलने के कई फायदे होंगे। डब्ल्यूएचओ का अप्रूवल मिलना देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। स्वदेशी वैक्सीन को अब पूरी दुनिया में पहचान मिल गई है। कोवाक्सिन लगवा चुके भारतीयों को दुनिया के किसी भी हिस्से में ट्रैवेल करने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी। जिन देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, वो सब अब हट जाएंगे। 
विज्ञापन


भारत में यूज होने वाली दोनों वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ की मंजूरी
भारत में अभी तक ज्यादातर कोवाक्सिन और कोविशील्ड के डोज लगाए जा रहे हैं। शुरूआत में ही सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई कोविशील्ड को डब्ल्यूएचओ ने मान्यता दे दी थी, अब कोवाक्सिन को भी मिल गई है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या फायदे होंगे?

1. विदेश यात्रा में दिक्कत नहीं होगी : डब्ल्यूएचओ से मान्यता न होने के चलते अभी तक कई देशों में भारतीय लोगों की यात्रा पर कई तरह के प्रतिबंध लगे थे। जो लोग कोवाक्सिन लगवाकर जाते थे, उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह ही कोरोना टेस्ट कराना पड़ता था। कई देशों में वैक्सीन लगवाने के बाद भी क्वारैंटाइन होना पड़ता था। इसके अलावा उन्हें डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्त वैक्सीन लगवानी पड़ती थी। अब ऐसा नहीं होगा। कोवाक्सिन लगवा चुके लोग अब वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट दिखाकर आसानी से दुनिया के किसी भी देश की यात्रा कर पाएंगे। 

2. दुनियाभर में होगी सप्लाई : कोवाक्सिन को भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने मिलकर तैयार किया है। ये देश की पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है। डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिलने के बाद अब बड़े पैमाने पर कोवाक्सिन की सप्लाई दुनियाभर में हो सकेगी। आर्थिक तौर पर भारत को फायदा मिलेगा। 

3. विदेशों में भी ट्रायल संभव : कोवाक्सिन को और ज्यादा इफेक्टिव बनाने के लिए अब भारत बायोटेक और आईसीएमआर दुनिया के अन्य देशों में भी ट्रायल कर सकेंगे। डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिलने के बाद कोई भी देश आसानी से ट्रायल की मंजूरी दे सकेगा। 
 
4. विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर कर सकेंगे उत्पादन : डब्ल्यूएचओ की मान्यता के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय दुनिया के बड़े वैक्सीन निर्माताओं को कोवाक्सिन के उत्पादन की मंजूरी दे सकती है। इससे कोवाक्सिन का ज्यादा उत्पादन होगा और दुनिया के बाकी देशों में आसानी से सप्लाई बढ़ जाएगी। 


5. विदेश नीति मजबूत होगी : कोविशील्ड की तरह अब कोवाक्सिन को भी भारत सरकार अपने मित्र देशों को दे सकेगी।  इससे भारत की विदेश नीति में मजबूती आएगी। अन्य देशों से भारत के रिश्ते भी अच्छे होंगे। डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्त वैक्सीन की डिमांड दुनिया में काफी ज्यादा है। 

इन आठ वैक्सीन को मिली है डब्ल्यूएचओ की मंजूरी
1. मॉर्डना 
2. फाइजर-बायोएनटेक
3. जॉनसन एंड जॉनसन 
4. ऑक्सफोर्ड एस्ट्रेजेनिका
5. कोविशील्ड
6. साइनोफार्म 
7. साइनोवैक 
8. कोवाक्सिन 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed