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WHO: नियमित टीकाकरण क्षमता को मजबूत करें, डब्ल्यूएचओ की भारत सहित 11 देशों को सलाह
Tue, 13 Jun 2023 05:45 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 13 Jun 2023 05:45 AM IST
सार
दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा कि सदस्य देशों ने नियमित रूप से बच्चों के टीकाकरण पर कम ध्यान दिया है जिसकी वजह से 2019 से लेकर अब तक बिना टीका लेने वाले बच्चों की संख्या 20 से बढ़कर 46 लाख तक पहुंच गई है।
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टीकाकरण
- फोटो : Social Media
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दक्षिणपूर्व एशिया के 11 देशों को सलाह दी है कि वे नियमित टीकाकरण की क्षमता को मजबूत करें। साथ ही जिन बच्चों का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है उनकी तलाश करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। सोमवार को डब्ल्यूएचओ ने यह भी जानकारी साझा की है कि दक्षिण पूर्व एशिया में लगभग 46 लाख बच्चे अब तक टीकाकरण नहीं करा पाए हैं। इसी के चलते बच्चों को जीवन रक्षक टीके उपलब्ध कराने के लिए केंद्रित प्रयासों को लेकर सलाह दी है।
दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा कि सदस्य देशों ने नियमित रूप से बच्चों के टीकाकरण पर कम ध्यान दिया है जिसकी वजह से 2019 से लेकर अब तक बिना टीका लेने वाले बच्चों की संख्या 20 से बढ़कर 46 लाख तक पहुंच गई है। यह चिंताजनक स्थिति है और इसके लिए सदस्य देशों को तत्काल जमीनी स्तर पर अभियान चलाने चाहिए।
सोमवार को डॉ. पूनम खेत्रपाल डब्ल्यूएचओ के ही एक कार्यक्रम में सदस्य देशो को संबोधित कर रही थीं। चार दिवसीय यह कार्यशाला नियमित टीकाकरण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय निदेशक ने टीकाकरण कोलेकर भारत के प्रयासों की सराहना भी की है। उन्होंने भारत के कोरोना लेकर तीव्र टीकाकरण अभियान और मिशन इंद्रधनुष को लेकर काफी सराहना की।
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उन्होंने कहा, “हमें कोरोना महामारी से उत्पन्न अंतराल और चुनौतियों को तुरंत दूर करने की आवश्यकता है। कई देश अभी भी कोरोना की वजह से टीकाकरण में आई कमी को दूर नहीं कर पा रहे हैं। हमें शून्य-खुराक वाले बच्चों की पहचान करनी होगी और नियमित टीकाकरण की पहुंच के साथ टीकाकरण बढ़ाने में तेजी से सुधार करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि टीकाकरण की मांग में तेजी लाने के लिए समुदायों को शामिल करने के लिए केंद्रित हस्तक्षेपों और रणनीतियों का मार्गदर्शन करने के लिए टीकाकरण के व्यवहार और सामाजिक चालकों की पहचान की जानी चाहिए। इसके अलावा कैच-अप टीकाकरण गतिविधियों और देशों द्वारा शुरू किए जा रहे विशेष अभियानों की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जमीनी स्तर पर इसका लाभ हो भी रहा है या नहीं।
डॉ. पूनम खेत्रपाल का कहना है कि कुछ देशों में 2020 के दौरान टीकाकरण में कमी आई। इसके पीछे मुख्य कारण कोरोना महामारी और लॉकडाउन रहा लेकिन 2021 और 2022 में यहां टीकाकरण वापस पटरी पर लौटा है। वे अब पूर्व-महामारी के स्तर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, ऐसे भी देश हैं जहां कवरेज उप-इष्टतम बना हुआ है। सिंह ने कैच-अप अभियानों में न्यूमोकोकल वैक्सीन शुरू करने के लिए तिमोर-लेस्ते और 2022 में टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन पेश करने वाला विश्व स्तर पर चौथा देश बने नेपाल की सराहना की। क्षेत्रीय निदेशक ने जोखिम वाली आबादी की समय-समय पर मैपिंग और टीकाकरण में कमियों को दूर करने के लिए कार्यवाही योग्य योजनाएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
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दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा कि सदस्य देशों ने नियमित रूप से बच्चों के टीकाकरण पर कम ध्यान दिया है जिसकी वजह से 2019 से लेकर अब तक बिना टीका लेने वाले बच्चों की संख्या 20 से बढ़कर 46 लाख तक पहुंच गई है। यह चिंताजनक स्थिति है और इसके लिए सदस्य देशों को तत्काल जमीनी स्तर पर अभियान चलाने चाहिए।
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सोमवार को डॉ. पूनम खेत्रपाल डब्ल्यूएचओ के ही एक कार्यक्रम में सदस्य देशो को संबोधित कर रही थीं। चार दिवसीय यह कार्यशाला नियमित टीकाकरण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय निदेशक ने टीकाकरण कोलेकर भारत के प्रयासों की सराहना भी की है। उन्होंने भारत के कोरोना लेकर तीव्र टीकाकरण अभियान और मिशन इंद्रधनुष को लेकर काफी सराहना की।
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उन्होंने कहा, “हमें कोरोना महामारी से उत्पन्न अंतराल और चुनौतियों को तुरंत दूर करने की आवश्यकता है। कई देश अभी भी कोरोना की वजह से टीकाकरण में आई कमी को दूर नहीं कर पा रहे हैं। हमें शून्य-खुराक वाले बच्चों की पहचान करनी होगी और नियमित टीकाकरण की पहुंच के साथ टीकाकरण बढ़ाने में तेजी से सुधार करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि टीकाकरण की मांग में तेजी लाने के लिए समुदायों को शामिल करने के लिए केंद्रित हस्तक्षेपों और रणनीतियों का मार्गदर्शन करने के लिए टीकाकरण के व्यवहार और सामाजिक चालकों की पहचान की जानी चाहिए। इसके अलावा कैच-अप टीकाकरण गतिविधियों और देशों द्वारा शुरू किए जा रहे विशेष अभियानों की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जमीनी स्तर पर इसका लाभ हो भी रहा है या नहीं।
डॉ. पूनम खेत्रपाल का कहना है कि कुछ देशों में 2020 के दौरान टीकाकरण में कमी आई। इसके पीछे मुख्य कारण कोरोना महामारी और लॉकडाउन रहा लेकिन 2021 और 2022 में यहां टीकाकरण वापस पटरी पर लौटा है। वे अब पूर्व-महामारी के स्तर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, ऐसे भी देश हैं जहां कवरेज उप-इष्टतम बना हुआ है। सिंह ने कैच-अप अभियानों में न्यूमोकोकल वैक्सीन शुरू करने के लिए तिमोर-लेस्ते और 2022 में टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन पेश करने वाला विश्व स्तर पर चौथा देश बने नेपाल की सराहना की। क्षेत्रीय निदेशक ने जोखिम वाली आबादी की समय-समय पर मैपिंग और टीकाकरण में कमियों को दूर करने के लिए कार्यवाही योग्य योजनाएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।