White Paper: 69 पेज के श्वेत पत्र में यूपीए सरकार पर हमला, भाजपा के घोषणा पत्र में बनेगा मजबूत आधार
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विस्तार
केंद्र सरकार ने यूपीए के दस साल के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर आज संसद में एक श्वेत पत्र जारी कर दिया। 69 पेज के इस श्वेत पत्र में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और महत्त्वपूर्ण रेटिंग एजेंसियों के आंकड़ों के सहारे यह साबित करने की कोशिश की गई है कि यूपीए के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था बहुत खराब स्थिति में थी, 15 बड़े घोटालों से देश की अर्थव्यवस्था बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई थी, जबकि मोदी सरकार के पिछले दस साल के शासनकाल में इसमें बहुत सुधार हुआ है। भाजपा इन आंकड़ों की तुलना करते हुए लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणा पत्र में महत्त्वपूर्ण दावे कर सकती है।
हालांकि, यूपीए के शासनकाल पर श्वेत पत्र आने की चर्चा के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार के दस साल के शासनकाल में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर ब्लैक पेपर लाकर अपनी चिंताओं को साझा किया है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार गलत दावे कर अर्थव्यवस्था की असली स्थिति छिपा रही है।
श्वेत पत्र का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी यानी एनडीए की सरकार के समय भी देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बताया गया है। जबकि दावा है कि कुप्रबंधन के कारण यूपीए के शासनकाल में अर्थव्यवस्था की हालत खराब हुई। दावा यह भी है कि जिस समय दुनिया तेज निवेश से बेहतर विकास कर रही थी, यूपीए के शासनकाल में भारत ने इस अवसर को गंवा दिया।
श्वेत पत्र में मनमोहन सिंह सरकार के कामकाज के समय कई घोटालों के होने का आरोप भी लगाया गया है। दावा है कि ऐसे कुप्रबंधन से खराब अर्थव्यवस्था के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सत्ता संभाली और अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे बेहतर करने में सफलता पाई। कुप्रबंधन के कारण परियोजनाओं की लागत में वृद्धि हुई, जबकि 50 करोड़ बैंक खाते खोलकर मोदी सरकार ने बिना किसी भ्रष्टाचार के सहायता राशि शत प्रतिशत लाभार्थियों के खातों में पहुंचाई।
उद्देश्य
श्वेत पत्र के पांचवें पेज पर ही इसे लाने का उद्देश्य भी बता दिया गया है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि इसका उद्देश्य केंद्र द्वारा लाई गई नीतियों का जनता पर पड़ने वाले असर को लोगों तक पहुंचाना है। यानी केंद्र सरकार इसके जरिए अपना दस साल का रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने रखना चाहती है। नीतियों को लाने के पीछे जनहित का उद्देश्य बताया गया है।
श्वेत पत्र के मुख्य बिंदु-
- यूपीए सरकार के (2010-2014 के बीच) समय महंगाई दर दो अंकों में थी। 2004-2014 के बीच औसत मुद्रास्फीति 8.2 फीसदी थी। 2010 के वित्त वर्ष में यह सर्वोच्च 12.3 फीसदी पर थी।
- विदेशी मुद्रा भंडार 2011 में 294 बिलियन डॉलर था, जो 2013 में घटकर 256 बिलियन डॉलर रह गया। जबकि मोदी सरकार में 2021 में यह 642.45 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया था। इस समय यह 616.7 बिलियन डॉलर के करीब हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार की यह सीमा सुरक्षित मानी जाती है जिससे देश किसी भी आर्थिक संकट से निपट सकता है।
- बेलगाम राजकोषीय घाटे ने अर्थव्यवस्था को राजकोषीय संकट की ओर धकेल दिया था।
- अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के पांच साल में 24 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ था, जबकि यूपीए सरकार में केवल 16 हजार किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण किया गया।
- सामाजिक कल्याण की कई योजनाओं के लिए पर्याप्त धन खर्च नहीं किया जा सका।
- देश के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण रक्षा क्षेत्र पर पर्याप्त निवेश नहीं हुआ।
- लाखों करोड़ रुपये के घोटाले हुए, जिससे भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई।
- यूपीए के दौरान सबसे बड़ी बिजली कटौती हुई, जिससे 62 करोड़ लोग अंधकार में डूब गए थे।
- रक्षा सौदों में देरी के कारण बाद में 125 फीसदी अधिक कीमत देकर रक्षा उत्पादों की खरीद हुई।
- इसी प्रकार मूलभूत ढांचे की योजनाओं के निर्माण में देरी से उनकी लागत एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई।
- यूपीए काल में निवेश का माहौल प्रतिकूल किए जाने के कारण निवेशक विदेश चले गए।
- 2012-13 के आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था खराब होने और महंगाई होने के लिए विदेशी कारकों को जिम्मेदार बताया गया।
- 2013 में आईएमएफ ने भारत में मूलभूत ढांचे में निवेश की कमी को रेखांकित किया है।
- 2013 में मॉर्गन स्टेनले एजेंसी ने भारत को दुनिया की पांच खराब अर्थव्यवस्था वाला देश बताया।
- श्वेत पत्र के पृष्ठ 30 पर भ्रष्टाचार कॉलम में कोयला घोटाले, टू जी घोटाले, आदर्श हाउसिंग घोटाला, अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला, शारदा चिटफंड घोटाले से लोगों को लाखों करोड़ का नुकसान होने, देश की छवि और अर्थव्यवस्था के खराब हालत में होने की बात कही गई।
मोदी सरकार की उपलब्धियां
श्वेत पत्र के पेज 33 प्वाइंट 47 से वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां बताई गई हैं कि किस प्रकार नीतियों में बदलाव करके, सकारात्मक बदलाव करके देश की अर्थव्यवस्था बेहतर करने में मदद मिली। कुछ प्रमुख उपलब्धियां जिन्हें श्वेत पत्र में बताया गया है, इस प्रकार हैं-
- प्रक्रिया और नीतिगत बदलाव करके माहौल सकारात्मक बनाया।
- डिजिटल क्रांति करके भ्रष्टाचार रोका।
- टैक्स के पैसे का सही उपयोग करने के लिए व्यय सुधार आयोग का गठन किया गया।
- काले धन के बारे में पता लगाने के लिए और कालेधन के निर्माण को रोकने के लिए प्रयास जारी हैं।
- आईएमएफ ने 2015 में ही निकट अवधि में भारत के विकास के दृष्टिकोण को सही करार दिया।
- 2010 में दुनिया की 10वीं बड़ी अर्थव्यवस्था 2023 में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई।
- 2027 तक भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है।
- 2015 में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति 12 किलोमीटर प्रतिदिन थी, जो अब 28 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है।
- निवेश के लिए बेहतर माहौल बना। दुनिया के निवेशक भारत की ओर लौटे।
- कल्याणकारी योजनाओं में खर्च राशि कई गुना बढ़ा दी गई।
- विदेशी निवेश में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। 2022 में यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
- जीएसटी संग्रह में लगातार वृद्धि।
- किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाने में सफलता मिली। 2.46 किसान ऊर्जा उत्पादक बनकर कमाई कर रहे हैं।
आर्थिक मामलों के जानकार ने कहा
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने विकास का मूल मंत्र मूलभूत ढांचे में निवेश को बनाया, जिसका परिणाम सामने दिखाई पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने चार करोड़ आवास, राष्ट्रीय राजमार्गों-रेल मार्गों, बड़े भवनों और हवाई अड्डों के विकास में भारी धन खर्च किया, जिससे सभी उद्योगों को गति मिली। इसी का परिणाम है कि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में आ गई है।
उन्होंने कहा कि यदि देश को 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनना है, तो लगभग दस फीसदी के आसपास वृद्धि हासिल करनी होगी। यह अपने आप में एक कठिन लक्ष्य है, जिसे पाना स्वयं मोदी सरकार के लिए एक कठिन कार्य होगा। लेकिन माना जा सकता है कि सरकार ने स्वयं अपने लिए एक नई चुनौती दी है, जिस पर उसे खरा उतरना है।