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तिरुपति मंदिर में चढ़ाए गए 16वीं सदी के आभूषण कहां गए? 16वीं सदी के शासक ने किए थे दान

Sun, 02 Sep 2018 06:43 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Sep 2018 06:43 PM IST
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Where are the 16th century jewelery offered at Tirupati temple asks cic

केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) ने आंध्र प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) से पूछा है कि विजयवाड़ा के छठीं सदी के शासक कृष्णदेव राय द्वारा तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में चढ़ाए गए गहने कहां गए? इसके साथ ही मंदिर की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय क्या कदम उठा रहा है, सीआईसी ने इसकी भी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है।

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सीआईसी, बीकेएसआर आयंगर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से जानना चाहा था कि टीटीडी तिरुमला मंदिर को ऐतिहासिक और राष्ट्रीय विरासत के स्मारक घोषित करने के उनके आग्रह पर क्या कदम उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान उन्होंने टीटीडी पर आरोप लगाया कि वह तिरुपति में स्थित इस 1500 साल पुराने मंदिर की सुरक्षा नहीं कर रही है।
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हैदराबाद के पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक की 2011 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आचार्युलु ने कहा कि तिरुमला के भगवान वेंकटेश्वर मंदिर की दीवारों पर विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय की गहने दान देने का उल्लेख है। हालांकि रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि ऐसा कोई गहना वहां नहीं मिला। उन्होंने कहा कि टीटीडी ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीपी वाधवा और न्यायमूर्ति जगन्धा राव के तहत एक स्व-मूल्यांकन समिति नियुक्त की थी। इस समिति ने पाया कि 1952 से दर्ज रजिस्टरों में भी कृष्णदेव राय से मिले गहनों का जिक्र नहीं है। हालांकि इस बात का जिक्र है कि 1939 में एक पुजारी ने गहनों को सौंपा था। 
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वहीं सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने एक सख्त आदेश में प्रधानमंत्री कार्यालय को यह भी सार्वजनिक करने को कहा कि केंद्र सरकार ने तिरुमला मंदिरों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा विश्व धरोहर संरचनाओं एवं आभूषणों की सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों को लागू करने के लिए किन कदमों पर विचार किया है।

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