Old Pension: सेना और अर्धसैनिक बलों का खतरा एक जैसा तो पैरामिलिट्री जवानों की क्यों बंद की पेंशन?
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, क्या कभी किसी केंद्रीय मंत्री द्वारा सीएपीएफ की पेंशन बहाली का मुद्दा उठाया गया। क्या एमएसपी की तर्ज पर पैरामिलिट्री सर्विस पे देने का एलान किया गया। क्या उसे इंप्लीमेंट किया गया?
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भारतीय सेना के लिए अच्छी खबर है कि अब उन्हें केंद्रीय सुरक्षा बलों की तर्ज पर रिस्क व हार्डशिप अलाउंस, रिवाइज दरों पर मिलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना कमांडर कांफ्रेंस के दौरान यह घोषणा की है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, ये अच्छी बात है, स्वागत योग्य कदम है। इससे सेना एवं अर्धसैनिक बलों के बीच रिस्क एवं हार्डशिप अलाउंस के तहत मिलने वाले भत्तों की खाई को दूर किया जा सकेगा। जवानों की कार्य क्षमता में वृद्धि होगी, साथ ही उनकी वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी। रणबीर सिंह ने कहा, सेना और अर्धसैनिक बलों का खतरा जब एक जैसा है तो पैरामिलिट्री जवानों की पेंशन बंद क्यों की गई। सीएपीएफ जवानों को मिलने वाले राशन मनी भत्ते पर भी टैक्स लगा दिया गया, जबकि सेना में ऐसा नहीं है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, क्या कभी किसी केंद्रीय मंत्री द्वारा सीएपीएफ की पेंशन बहाली का मुद्दा उठाया गया। क्या एमएसपी की तर्ज पर पैरामिलिट्री सर्विस पे देने का एलान किया गया। क्या उसे इंप्लीमेंट किया गया। क्या अर्धसैनिक बलों के 'सेकंड इन कमांड' को सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल के बराबर वेतन देने का जो एलान हुआ, वो पूरा किया गया है। सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल, सीएपीएफ के सेकंड कमांड से 20 फीसदी ज्यादा वेतन भत्ते पाते हैं। यही हाल यूनिट की कमान संभालने वाले पैरामिलिट्री कमांडेंट का है।
हिमवीरों को क्यों नहीं मिलता हाई एल्टीट्यूड अलाउंस
राजनाथ सिंह जब केंद्रीय गृह मंत्री थे, तो उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली को सीपीसी कैंटीन पर 50 फीसदी जीएसटी की छूट के लिए चिट्ठी लिखी थी। आज वह चिट्ठी रद्दी की टोकरी में चली गई है। इतना ही नहीं, सीपीसी कैंटीन पर वोकल पे लोकल कर दिया गया। क्या कैंटीन पर जीएसटी टैक्स में छूट मिली, जिसके कारण 20 लाख पैरामिलिट्री परिवारों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। आईटीबीपी के हिमवीरों को सियाचिन अलाउंस की तर्ज पर 42,500 रुपये भत्ता क्यों नहीं मिलना चाहिए। ये जवान समस्त बर्फीले हिमालय की चीन से सटी सीमा लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम व अरूणाचल प्रदेश तक चाक चौबंद चौकीदारी कर रहे हैं। पैरा मिलिट्री जवानों को मिलने वाले राशन मनी भत्तों पर टैक्स देना पड़ता है।
बलो महानिदेशक पदों पर हों कैडर अफसर
तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह से एसोसिएशन के सदस्यों ने पांच बार मुलाकात कर उनसे उक्त मुद्दों का समाधान करने की गुहार लगाई थी। जवानों की भलाई से संबंधित मुद्दों पर ज्ञापन सौंपे गए। केंद्रीय गृह सचिव से आग्रह किया गया। गृह मंत्री अमित शाह से संसद भवन में मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया गया। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से पांच बार मुलाकात कर गुहार लगाई गई। राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें मुद्दों के बारे में बताया गया। राज्यों में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड के गठन व सेना झंडा दिवस कोष की तर्ज पर अर्धसेना झंडा दिवस कोष की स्थापना की गुहार लगाई गई। कोई मांग पूरी नहीं की गई। केंद्रीय सुरक्षा बलों के महानिदेशक पदों पर कैडर अफसरों को लगाया जाए। वह अपने जवानों के दुख-दर्द, ऑपरेशन में साथ-साथ रहता है। वे जवानों की कठिनाई को बेहतर समझते हैं। आईपीएस अधिकारी साल दो साल के लिए डीजी बनकर आता है और चला जाता है।
सिविलियन फोर्सेस जैसे बचकाना खिताब से नवाजा
जब खतरा एक जैसा है, तो मिलने वाली सुविधाओं में फासले क्यों कर दिए गए हैं। अब तो वर्दी का रंग भी एक जैसा कॉम्बैट कर दिया गया। वास्तविक सरहदी चौकीदारों को उनके हकों से वंचित किया जा रहा है। पैरामिलिट्री फोर्सेस में पिछले सालों में कम छुट्टियों के चलते और घर परिवारों से हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले जवानों में आत्महत्याओं व आपसी शूटआउट के मामलों में वृद्धि हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्री का 100 दिन की छुट्टी वाला फॉर्मूला फेल हो गया है। 100 दिन छुट्टी की फाइल जब डीजी सीआरपीएफ द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई, तो सीएपीएफ को सिविलियन फोर्सेस जैसे बचकाना खिताब से नवाज दिया गया। इससे जवानों के मनोबल पर असर पड़ता है।