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जानिए देश के पहले सुपरकॉप के बारे में चार अनकही बातें

Fri, 26 May 2017 08:22 PM IST
amarujala.com- Presented by: sharad mishra
amarujala.com- Presented by: sharad mishra Updated Fri, 26 May 2017 08:22 PM IST
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When gill snubbed by court on rupen deol bajaj sexual harassment case
केपीएस ‌गिल - फोटो : Dna
पंजाब में आतंकवाद को समाप्त करने के बाद देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले केपीएस गिल कई विवादों में भी शामिल रहे। जिनमें रूपन देयोल बजाज प्रकरण और हॉकी फेडरेशन के भ्रष्टाचार का मामला मुख्य रहा। पंजाब में आतंकवाद को समाप्त करने के एवज में मानवाधिकार का उल्लंघन करने में भी गिल का नाम सामने आया।   
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रूपन देयोल बजाज प्रकरण
रूपन देयोल बजाज प्रकरण से कंवर पाल सिंह‌ गिल का एक दूसरा रूप सामने आया था। दरअसल गिल ने एक पार्टी के दौरान रूपन देयोल बजाज के पिछले निचले हिस्से में चिकोटी काट दी थी। पंजाब के वित्तीय आयुक्त एसएल कपूर के चंडीगढ़ स्थित आवास में 18 जुलाई 1988 को यह पार्टी हुई थी। उस दौरान रूपन देयोल बजाज पंजाब की पांचवीं रैंक की आईएएस अधिकारी थीं। गिल इस घटना के दौरान पंजाब के पुलिस महानिदेशक थे। पार्टी में रूपन को गिल ने काफी परेशान किया था।
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बजाज ने जब अपने सीनियर को इस बारे में शिकायत की तो उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद बजाज ने मामले को कोर्ट में पहुंचा दिया। इस प्रकरण में पूरा देश बंटा नजर आया लेकिन आखिरकार 17 साल बाद गिल को तीन साल प्रोबेशन की सजा सुनाई। जेल हालांकि उन्हें नहीं भेजा गया। लेकिन कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। 20 अगस्त 1998 को गिल को पंजाब-हरियाण हाईकोर्ट ने सेक्‍शन 345 और सेक्‍शन 509 के तहत दोषी पाया था। 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने गिल को दो लाख रुपए का मुआवजा देने को कहा जिसे बजाज के इनकार करने पर महिला संगठनों को दान में दिया गया।
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पंजाब में मानवाधिकार का उल्लंघन मामला 

When gill snubbed by court on rupen deol bajaj sexual harassment case
पंजाब में आतंकवाद की समाप्ति के नाम पर उन पर मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप भी लगा। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की गिरफ्तारी पर खासा विवाद पैदा हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया। पुलिस ने गिरफ्तारी से इनकार किया। 

हॉकी फेडरेशन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप 
गिल जब हॉकी इंडिया फेडरेशन के अध्यक्ष रहे तब उन पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा। 2008 में आरोप लगने के बाद इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने हॉकी फेडरेशन को अनिश्चितकालीन के लिए निलंबित कर दिया। 

गुजरात दंगों बाद हुई नियुक्ति भी चर्चा में रही 
गुजरात में 2002 के दंगों के बाद केपीएस गिल को गुजरात का सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि गिल जैसे अनुभवी पुलिस अधिकारी को, जिन्होंने गुजरात में आतंकवाद को समाप्त करने में सक्रिय योगदान दिया गुजरात में सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करना बेहतर कदम है। गिल ने पंजाब से दंगा निरोधी 1000 अतिरिक्त सुरक्षा बल भी गुजरात मंगाए। गिल ने बाद में गुजरात दंगों के लिए एक छोटे से समूह को जिम्मेदार माना था। 
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