फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Zakir Hussain News When father infused rhythm Into Hussain Ear Know Interesting Story News in Hindi

Zakir Hussain: जब जाकिर हुसैन के कानों में पिता ने फूंके थे सुर और ताल, आठ साल पहले सुनाया था रोचक किस्सा

Mon, 16 Dec 2024 08:45 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Mon, 16 Dec 2024 08:45 AM IST
सार

उस्ताद जाकिर हुसैन का सोमवार सुबह अमेरिका में निधन हो गया। आठ साल पहले एक साक्षात्कार में उस्ताद जाकिर हुसैन ने बताया था कि जब जन्म के बाद उनको घर लाया गया तो पिता ने पहली बार प्रार्थना की जगह उनके कान में तबले की लय फूंककर उनका स्वागत किया था।

विज्ञापन
Zakir Hussain News When father infused rhythm Into Hussain Ear Know Interesting Story News in Hindi
उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उस्ताद जाकिर हुसैन को तबला बजाने का हुनर अपने पिता अल्ला रक्खा से विरासत में मिला था। उनके पिता ने जाकिर हुसैन के जन्म के बाद ही सबसे पहले उनके कान में तबले की सुर और ताल फूंक दी थी। आठ साल पहले एक साक्षात्कार में उस्ताद जाकिर हुसैन ने बताया था कि जब जन्म के बाद उनको घर लाया गया तो पिता ने पहली बार प्रार्थना की जगह उनके कान में तबले की लय फूंककर उनका स्वागत किया था। उस्ताद जाकिर हुसैन का सोमवार सुबह अमेरिका में निधन हो गया। 

विज्ञापन


उस्ताद जाकिर हुसैन ने बताया था कि जब मुझे जन्म के बाद पहली बार घर लाया गया और पिता की गोद में सौंपा गया। हमारे घर में परंपरा थी कि पिता को पहली बार बच्चे को गोद में लेने के बाद उसके कान में प्रार्थना पढ़नी होती है। बच्चे कान में इस दौरान अच्छे शब्द कहे जाते हैं। उन्होंने बताया था कि पिता ने मुझे गोद में लिया और मेरे कानों में तबले की लय सुनाई। तब मेरी मां ने गुस्सा किया कि यह क्या कर रहे हो? तो उन्होंने मां से कहा था कि संगीत ही मेरी साधना है और यही सुर और ताल मेरे बेटे के लिए मेरी दुआ है मैं देवी सरस्वती और भगवान गणेश का उपासक हूं। जाकिर हुसैन ने कहा था कि जो ज्ञान पिता को अपने शिक्षकों से मिला है और वह इसे अपने बेटे को देना चाहते थे।
विज्ञापन


पहले कॉन्सर्ट में मिले थे पांच रुपये
जाकिर हुसैन ने बताया था कि जब वह 12 साल के थे, तो वह अपने पिता के साथ एक कॉन्सर्ट में गए थे। इस समारोह में पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान, बिस्मिल्लाह खान, पंडित शांता प्रसाद और पंडित किशन महाराज जैसे संगीत दिग्गज भी थे। जाकिर हुसैन अपने पिता के साथ मंच पर गए। तब प्रदर्शन के लिए उन्हें पांच रुपये मिले। उन्होंने कहा था कि 'मैंने अपने जीवन में बहुत पैसा कमाया है, लेकिन वे पांच रुपये सबसे मूल्यवान थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

आरक्षित बोगी में यात्रा नहीं कर पाए थे जाकिर 
उस्ताद जाकिर हुसैन ने 11-12 साल की उम्र में तबला वादन का सफर शुरू कर दिया था। वह जगह-जगह अपने कॉन्सर्ट के लिए यात्रा करते थे। जाकिर ने बताया था कि जब वह यात्रा करते थे तो उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वह आरक्षित कोच में यात्रा कर सकें। इस वजह से वह ट्रेन की भीड़ वाली कोच में चढ़ जाते थे। वह ट्रेन में सीट न मिलने पर अखबार बिछाकर नीचे बैठ जाते थे। तबले पर किसी का पैर या जूता ना लगे, इसलिए वह उसे अपनी गोद में रख लेते थे। जब तक उनका सफर जारी रहता था, वह तबले को एक बच्चे की तरह गोद में उठाए रखते थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed