तीन जगह धमाके करने जा रहे थे आतंकी, बंगलूरू के 'ट्रैफिक' ने नाकाम किए थे मंसूबे
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ट्रैफिक यानी यातायात की समस्या पूरे देश में दिक्कत का सबब बनी हुई है। खासकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में तो ट्रैफिक के हालात ऐसे हैं कि कभी-कभार तो घंटों लोग सड़क पर अपनी गाड़ी में ही फंसे रहते हैं। लेकिन, हर ओर दिक्कत का सबब बने ट्रैफिक की वजह से ही एक बार बंगलूरू में एक नहीं बल्कि तीन आतंकी हमले होते-होते नाकाम हो गए थे।
28 दिसंबर 2005 को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (आईआईएस) पर हमला किया था। पुलिस ने दावा किया था कि इससे पहले इन आतंकियों की योजना शहर के तीन और स्थानों पर हमला करने की थी।
तीन सेमिनारों में थी धमाकों की साजिश
आतंकियों की योजना सबसे पहले ले मेरीडियन होटल पर हमला करने की थी, जहां नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नासकॉम) ने सेमिनार आयोजित की थी। लेकिन आतंकियों की यह योजना धरी की धरी रह गई क्योंकि, उन्हें होटल के अंदर जाने के लिए कोई सही जगह नहीं मिली और ट्रैफिक की वजह से वह किसी और रास्ते से होटल नहीं जा सकते थे।
ट्रैफिक ने रोकी आतंकियों की रफ्तार
इसके बाद उन्होंने पीईएस इंस्टीट्यूट पर हमला करने की साजिश रची। यहां भी एक सेमिनार का आयोजन होना था। यहां भी आतंकी हमला नहीं कर सके क्योंकि भारी ट्रैफिक के चलते उनके भाग निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
दो जगहों पर हमला करने में नाकाम रहे आतंकियों ने आईआईएमबी को निशाना बनाने की योजना बनाई, यहां भी एक सेमिनार हो रही थी। लेकिन, ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण आतंकी आईआईएमबी तक पहुंच ही नहीं पाए और सेमिनार पूरी हो गई।
साल 2005 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने ही बंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट पर हमला किया था। यह आंतकियों के लिए एक आसान निशाना था, क्योंकि इंस्टीट्यूट के भागने के लिए रास्ते आसान थे और यह उस जगह से नजदीक था जहां, आतंकी रुके हुए थे।