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20 साल से था लापता, व्हाट्सएप ने मिलाया, सीखी 8 भाषाएं

Mon, 07 Jan 2019 10:03 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 07 Jan 2019 10:03 AM IST
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Whatsapp reunites Rajasthan man after 20 years in Bangalore
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कर्नाटक में एक व्हाट्सएप मैसेज ने 48 वर्षीय व्यक्ति को उसके परिवार से 20 साल बाद मिलाया है। मामला रविवार का है। व्यक्ति का नाम महावीर सिंह चौहान है। वह मूल रूप से राजस्थान के जालौर जिले के झाब गांव का रहने वाला है। उन्होंने इतने सालों बाद अपने 24 वर्षीय बेटे प्रद्युमन से नीमहंस अस्पताल में मुलाकात की। प्रद्युमन उस वक्त महज चार साल के थे जब उन्होंने अपने पिता को आखिरी बार देखा था। वहीं प्रद्युमन के छोटे भाई रघुपाल की उम्र उस वक्त महज एक साल थी। 


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इसलिए भागे थे घर से

महावीर मुंबई में बिजनेस करते थे। जब उन्हें बिजनेस में बड़ा घाटा हुआ तो उन्होंने अपने परिवार से संबंध खत्म कर लिए। उन्होंने शर्म की वजह से दिसंबर, 1998 को अपना घर छोड़ दिया। महावीर के पिता गनपत सिंह चौहान और परिवार के अन्य लोगों ने उनकी तलाश के लिए पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन पांच सालों तक जब महावीर का कुछ पता नहीं चला, तो उन्होंने भी हार मान ली। महावीर बंगलूरू आ गए थे और बीते 20 साल से यहीं रह रहे थे। 

वह शनिवार को रोस फार्म में बेहोश पड़े मिले थे। वह वहां सुपरवाइजर का काम करते हैं। इसके बाद महावीर के दोस्त उन्हें स्थानीय अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने वहां से महावीर को नीमहंस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। 

महावीर के एक दोस्त बंगलूरू में फोटोग्राफी का काम करते हैं और राजस्थान से हैं। उनका कहना है कि उन्हें महावीर से इतने सालों में बस यही जानने को मिला कि उनकी शादी हो चुकी है और घर पर दो बच्चे, पत्नी और पिता हैं। 

जब महावीर की हालत खराब होने लगी तो उनके दोस्तों को लगा कि ऐसी स्थिति में उनके परिवार का उनके साथ होना जरूरी है। उन्होंने महावीर की फोटो और उनका ड्राइविंग लाइसेंस व्हाट्सएप पर पोस्ट किया जिसे कई राजस्थानी ग्रुपों में शेयर किया गया। 

इसके बाद महावीर के दोस्तों को एक के बाद एक फोन और मैसेज आने लगे। उन्हें फिर महावीर के बेटे प्रद्युमन का फोन भी आया। प्रद्युमन ने कहा कि वह बंगलूरू के लिए फ्लाइट लेकर जल्द पहुंच रहे हैं। प्रद्युमन ने अस्पताल आने के बाद अपने पिता के पैर छुए। महावीर ने अपने बेटे से कहा, "आज मैं अपने सभी अपराधों से मुक्त हो गया हूं, मुझे उसी जगह ले चलो जहां से मैं संबंध रखता हूं।"

प्रद्युमन का कहना है कि नियती रहस्यमय तरीके से काम करती है। उन्होंने कहा कि उनकी मां को हमेशा से लगता था कि उनके पिता वापस आएंगे और ऐसा हुआ भी। बाकी सबको लगता था कि हम इन्हें खो चुके हैं। अब इन्हें जल्द ही राजस्थान ले जाया जाएगा।

20 सालों में परिवार तो खोया पर क्या सीखा

महावीर 20 सालों तक अपने परिवार से दूर रहे। इन 20 सालों में उन्होंने 8 भाषाएं सीखी हैं। वह मराठी और कन्नड़ भाषा काफी अच्छे से बोल लेते हैं। महावीर के दोस्त ने ये बात बताई। उन्होंने कहा कि महावीर ने फार्म में ड्राइवर, फोटोग्राफर, माली, सेल्समैन और सुपरवाइजर के तौर पर काम किया है। 

महावीर के दोस्त ने कहा कि हालांकि महावीर ने फैसला लिया था कि वह अपने परिवार के पास कभी नहीं लौटेंगे लेकिन बीते तीन साल से उनमें अपने परिवार के प्रति स्नेह जाग रहा था। उन्होंने एक अन्य नाम से सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाया था और अपने बेटों को फॉलो करते थे। वह कई बार परिवार से मिलने की इच्छा भी जताते रहे हैं।

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