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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पेशा कुछ भी हो, मूल अधिकार सबको दिया गया है
Tue, 14 Dec 2021 11:10 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 14 Dec 2021 11:10 PM IST
सार
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र को यौनकर्मियों को राशन, वोटर आईडी, आधार कार्ड मुहैया करने का निर्देश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, देश के प्रत्येक नागरिक को मूल अधिकार मिले हुए हैं, चाहे उसका पेशा कुछ भी हो। इसलिए केंद्र और सभी राज्यों को यौन कर्मियों को मतदाता पहचान पत्र, आधार और राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने साथ ही उन्हें राशन देना जारी रखने का भी निर्देश दिया।
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जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने एनजीओ ‘दरबार महिला समन्वय समिति’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। याचिका में कोरोना महामारी के चलते यौन कर्मियों को पेश आ रही समस्याओं को उठाया गया है। कोर्ट उनके कल्याण के लिए आदेश जारी करता रहा है और पिछले साल 29 सितंबर को केंद्र तथा अन्य को उनसे (यौन कमियों से) पहचान सबूत मांगे बगैर उन्हें राशन मुहैया करने का निर्देश दिया था। पीठ ने इस बात पर नाखुशी जताई कि यौन कर्मियों को राशन मुहैया करने का निर्देश 2011 में जारी किया गया था, लेकिन उसे लागू किया जाना बाकी है। पीठ ने कहा, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब एक दशक पहले राशन कार्ड एवं पहचान पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था और इसका कोई कारण नहीं है कि अब तक वे निर्देश क्यों नहीं लागू किए गए।
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पीठ ने कहा, सरकार देश के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए कर्तव्यबद्ध है। केंद्र, राज्य सरकारों और अन्य अथॉरिटी को राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने चाहिए। पीठ ने निर्देश दिया कि अथॉरिटी के द्वारा नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (नैको) और राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से सहायता ली जा सकती है जो समुदाय आधारित संगठनों द्वारा मुहैया की गई सूचना का सत्यापन कर यौन कर्मियों की सूची तैयार कर सकते हैं।
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चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
पीठ ने यौन कर्मियों को राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड जारी करने के बारे में स्थिति रिपोर्ट चार हफ्ते के भीतर मांगी है। इस बीच राज्य सरकारें और केद्र शासित प्रदेशों को पूर्व के आदेश के अनुरूप राशन कार्ड या अन्य पहचान पत्र मांगे बगैर यौन कर्मियों को राशन वितरण जारी रखने का निर्देश भी दिया। पीठ ने कहा, आदेश की प्रति राज्य और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकारों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए। पीठ ने साथ ही सरकार को विभिन्न आईडी कार्ड बनाते समय यौन कर्मियों के नाम व उनकी पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया है।