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Sharad Pawar: इस्तीफा नामंजूर होने के बाद क्या करेंगे शरद पवार? जानें एनसीपी की नई सियासत
Fri, 05 May 2023 04:15 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 05 May 2023 04:15 PM IST
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शरद पवार
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
शरद पवार का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष पद से दिया गया इस्तीफा नामंजूर हो गया है। मुंबई में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद इसका एलान हुआ। इस बैठक में पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले, भतीजे अजित पवार समेत कई दिग्गज NCP नेता शामिल हुए।बताया जा रहा है कि NCP की कोर कमेटी ने शरद पवार से पार्टी का नेतृत्व जारी रखने का अनुरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने यह प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद समिति के सदस्यों ने शरद पवार से मुंबई में उनके आवास पर मुलाकात की। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर अब शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? क्या वह फिर से एनसीपी की कमान संभाल लेंगे या अपने पुराने फैसले पर अड़े रहेंगे? आइए जानते हैं...
NCP कोर समिति की बैठक में क्या हुआ?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में हुए फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने दो मई को अचानक अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। उनके फैसले से सभी हैरान थे। उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए और नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए पार्टी नेताओं की एक समिति नियुक्त की। आज हमने समिति की बैठक की। इसमें हमने पवार साहेब से यह अनुरोध किया है कि वह अपना कार्यकाल पूरा करें।
उन्होंने कहा कि मैं और कई नेताओं ने पवार साहब से मुलाकात की और हमने उनसे लगातार अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, क्योंकि इस समय देश और पार्टी को उनकी जरूरत है। न केवल NCP नेताओं, बल्कि अन्य पार्टी के नेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी उनसे पार्टी प्रमुख बने रहने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि पवार साहेब ने हमें बिना बताए फैसला ले लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की सभी मांगों पर विचार करते हुए हमने आज बैठक की और समिति ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। समिति सर्वसम्मति से इस इस्तीफे को खारिज करती है और हम उनसे पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने रहने का अनुरोध करते हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में हुए फैसलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शरद पवार ने दो मई को अचानक अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। उनके फैसले से सभी हैरान थे। उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए और नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए पार्टी नेताओं की एक समिति नियुक्त की। आज हमने समिति की बैठक की। इसमें हमने पवार साहेब से यह अनुरोध किया है कि वह अपना कार्यकाल पूरा करें।
उन्होंने कहा कि मैं और कई नेताओं ने पवार साहब से मुलाकात की और हमने उनसे लगातार अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, क्योंकि इस समय देश और पार्टी को उनकी जरूरत है। न केवल NCP नेताओं, बल्कि अन्य पार्टी के नेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी उनसे पार्टी प्रमुख बने रहने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि पवार साहेब ने हमें बिना बताए फैसला ले लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की सभी मांगों पर विचार करते हुए हमने आज बैठक की और समिति ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। समिति सर्वसम्मति से इस इस्तीफे को खारिज करती है और हम उनसे पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने रहने का अनुरोध करते हैं।
तो अब आगे क्या करेंगे शरद पवार?
इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। उन्होंने कहा, 'राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। ज्यादातर पार्टियों में इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है। कांग्रेस में लंबे समय तक हमने ये देखा। कई बार सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक ने इस्तीफा दिया और फिर पार्टी की कमान संभाल ली। ऐसे में सियासत में कुछ भी पक्का नहीं होता।' आगे आनंद ने शरद पवार के तीन संभावित फैसलों के बारे में बताया।
इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। उन्होंने कहा, 'राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। ज्यादातर पार्टियों में इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है। कांग्रेस में लंबे समय तक हमने ये देखा। कई बार सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक ने इस्तीफा दिया और फिर पार्टी की कमान संभाल ली। ऐसे में सियासत में कुछ भी पक्का नहीं होता।' आगे आनंद ने शरद पवार के तीन संभावित फैसलों के बारे में बताया।
1. पहले की तरह फिर से कमान संभाल लें पवार : सबसे ज्यादा इसी के कयास लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि पवार पार्टी में अपनी शक्ति देखना चाहते हैं। अब बड़ी कोर समिति ने भी उनसे इस्तीफा वापस लेने की मांग कर दी है। ऐसे में संभव है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले लें और पहले की तरह काम शुरू कर दें। इसके जरिए वह पार्टी में अपनी ताकत का एहसास करा ही चुके हैं। अब संभव है कि उनके फैसलों पर उनका ज्यादा विरोध न हो।
2. इस्तीफे पर अड़े रहें : कहा ये भी जा रहा है कि पवार अपने इस्तीफे पर अड़े रह सकते हैं। ऐसा करके वह ये संदेश देना चाहेंगे कि एक बार जो उन्होंने फैसला ले लिया वह ले लिया। इसके अलावा वो ये भी बताने की कोशिश करेंगे कि उन्होंने इस्तीफा किसी पर दबाव बनाने या खुद को साबित करने के लिए नहीं दिया था, बल्कि पार्टी हित में दिया था।
3. पार्टी में दो कार्यकारी अध्यक्ष बना दें : खुद अध्यक्ष पद की कमान संभालते हुए संभव है कि पवार दो कार्यकारी अध्यक्ष बना दें। जिसमें उनकी बेटी सुप्रिया सुले और भतीजे अजित पवार के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है। इसके जरिए वह पार्टी पर पकड़ भी बनाए रख सकेंगे और विवाद भी खत्म हो जाएगा।
27 साल की उम्र में विधायक चुन लिए गए थे पवार
82 साल के शरद पवार का जन्म 12 दिसंबर 1940 को पुणे के बारामती में हुआ था। उनके पिता एक कोऑपरेटिव सोसायटी में वरिष्ठ पद पर थे। मां स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने वाली वह इकलौती महिला थीं। पूर्व क्रिकेटर सदाशिव शिंदे की बेटी प्रतिभा शरद पवार की पत्नी हैं।
एक इंटरव्यू में प्रतिभा ने बताया था कि शादी से पहले शरद पवार ने एक ही संतान पैदा करने की शर्त रखी थी। 1967 से 90 तक शरद बारामती सीट पर काबिज रहे, उसके बाद से यह सीट उनके भतीजे अजित पवार के पास है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले साल 2009 से बारामती की सांसद हैं।
शरद पवार ने बेहद कम उम्र में ही राजनीति में अच्छी पकड़ बना ली थी। जब वह 27 साल के थे, तब पहली बार विधायक चुन लिए गए थे। साल 1967 में वह पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद शरद पवार सियासत की बुलंदियों तक पहुंचे। सियासत में उनके शुरुआती संरक्षक तत्कालीन दिग्गज नेता यशवंत राव चव्हाण थे। कांग्रेस में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने एनसीपी का गठन किया था।
82 साल के शरद पवार का जन्म 12 दिसंबर 1940 को पुणे के बारामती में हुआ था। उनके पिता एक कोऑपरेटिव सोसायटी में वरिष्ठ पद पर थे। मां स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने वाली वह इकलौती महिला थीं। पूर्व क्रिकेटर सदाशिव शिंदे की बेटी प्रतिभा शरद पवार की पत्नी हैं।
एक इंटरव्यू में प्रतिभा ने बताया था कि शादी से पहले शरद पवार ने एक ही संतान पैदा करने की शर्त रखी थी। 1967 से 90 तक शरद बारामती सीट पर काबिज रहे, उसके बाद से यह सीट उनके भतीजे अजित पवार के पास है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले साल 2009 से बारामती की सांसद हैं।
शरद पवार ने बेहद कम उम्र में ही राजनीति में अच्छी पकड़ बना ली थी। जब वह 27 साल के थे, तब पहली बार विधायक चुन लिए गए थे। साल 1967 में वह पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद शरद पवार सियासत की बुलंदियों तक पहुंचे। सियासत में उनके शुरुआती संरक्षक तत्कालीन दिग्गज नेता यशवंत राव चव्हाण थे। कांग्रेस में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने एनसीपी का गठन किया था।