सियासी गलियारों में एक ही सवाल, मेनका और राज्यवर्धन को मिलेगी कौन सी जिम्मेदारी?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में फिर से सरकार बना ली और गुरुवार को उनके साथ 57 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 36 पुराने मंत्रियों को दोबारा मौका मिला है, जबकि 21 नए चेहरों को पहली बार जगह मिली। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में से कई मंत्रियों को दूसरी सरकार में मौका नहीं मिल सका, जिसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। इनमें सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, उमा भारती, सुरेश प्रभु, जेपी नड्डा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सत्यपाल सिंह, महेश शर्मा और जयंत सिन्हा जैसे नाम शामिल हैं।
नई जिम्मेदारियों को लेकर सियासी गलियारों में जिन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें जेपी नड्डा, मेनका गांधी और राज्यवर्द्धन सिंह राठौर का नाम प्रमुख है। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में नड्डा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री थे, जबकि मेनका के पास महिला एवं बाल विकास मंत्रालय था। वहीं राठौर के पास युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी थी।
अमित शाह के गृहमंत्री बनाए जाने के बाद से भाजपा के संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा का नाम चर्चा में है, जबकि राज्यवर्द्धन सिंह राठौर के नाम की चर्चा राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर हो रही है। वहीं मेनका गांधी के नाम की चर्चा लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर की जा रही है।
सचिन पायलट के समक्ष भाजपा को चाहिए युवा चेहरा
राज्यवर्धन सिंह राठौर को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। इसके पीछे की वजह राजस्थान की राजनीति बताई जा रही है। चर्चा है कि राजस्थान की जयपुर ग्रामीण सीट से सांसद राज्यवर्धन को भाजपा राजस्थान में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। इसके पीछे का उद्देश्य कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर युवा चेहरा सचिन पायलट के बरक्स भाजपा से भी युवा नेता को खड़ा करना हो सकता है।
जेपी नड्डा हो सकते हैं भाजपा अध्यक्ष
गृह मंत्री अमित शाह अब सरकार का हिस्सा हैं। एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत पर काम कर रही भाजपा में पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी खाली हो रही है।अब भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर भी सियासी चर्चा जोरों पर है। सियासी गलियारों में जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, वह है केंद्रीय मंत्री रहे जेपी नड्डा का। भाजपा की शानदार जीत के बाद पार्टी मुख्यालय में जीत के जश्न के दौरान पीएम मोदी और शाह के साथ राजनाथ सिंह तो थे ही, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी मंच साझा करते दिखे थे। उनका नाम पिछली बार भी अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में था।
17वीं लोकसभा अध्यक्ष बन सकती हैं मेनका
2014 में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सांसद बनीं मेनका गांधी पिछली सरकार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं। इस बार यह मंत्रालय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अमेठी सीट छीनने वाली स्मृति ईरानी के जिम्मे है और मेनका मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हैं। मेनका 17वीं लोकसभा की सबसे वरिष्ठ सांसद हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वह लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का स्थान ले सकती हैं। एक चर्चा उन्हें प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने की भी हो रही है।
राज्य मंत्री पद के प्रस्ताव पर बिगड़ीं अनुप्रिया
उत्तर प्रदेश में अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल मोदी के पहले कार्यकाल में राज्यमंत्री रह चुकी हैं। इस बार भी उन्हें राज्य मंत्री बनाया जा रहा, लेकिन उन्होंने इस पद को लेने से मना कर दिया। कहा जा रहा है कि वह कैबिनेट में जगह चाहती थीं या फिर किसी मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार। मामला नहीं बैठा, तो उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में अपना दल, राज्य की भाजपा सरकार में सहयोगी है और इस बार अपना दल से दो सांसद निर्वाचित हुए हैं।
कोई हार तो कोई खराब प्रदर्शन पर हुआ दरकिनार
बताया जा रहा है कि 2014 में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल रहे चार मंत्रियों को खराब स्वास्थ्य और छह को चुनाव हारने की वजह से मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सका। वहीं खबर यह भी आ रही है कि 15 से ज्यादा मंत्रियों को अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के कारण दरकिनार कर दिया गया। चर्चा है कि पिछली सरकार में मंत्री रहे चार नेताओं को आगे मंत्रिमंडल विस्तार में जगह दी जा सकती है, वहीं सात नेताओं को पार्टी में संभावित नई जिम्मेदारी दिए जाने के कारण मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।
अरुण जेटली, उमा भारती और सुषमा स्वराज का नाम उनमें शामिल हैं, जो स्वास्थ्य कारणों से मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बन सके। उमा ने तो काफी पहले ही चुनाव न लड़ने की इच्छा जता दी थी। मनोज सिन्हा, केजे अल्फोंस, हंसराज अहीर, पी राधाकृष्णन और अनंत गीते (शिवसेना), ये वो नाम हैं जो पहली मोदी सरकार में मंत्री रहे, लेकिन इस बार चुनाव हार गए और मंत्री नहीं बनाए जा सके।
स्वास्थ्य कारणों से जेटली और सुषमा नहीं बने मंत्री
शपथ ग्रहण से एक दिन पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खुद को कोई भी जिम्मेदारी न देने का अनुरोध किया था। उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। उन्होंने चिट्ठी लिखकर उन्हें कोई भी जिम्मेदारी न देने के लिए कहा था। इसके बाद मोदी रात को 8:50 पर जेटली के आवास पर उनसे मिलने के लिए पहुंचे थे और उनका हालचाल जाना था। मोदी लगभग आधे घंटे तक जेटली के पास रहे थे। उनकी बात का सम्मान करते हुए उन्हें नई कैबिनेट में कोई स्थान नहीं दिया गया।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपनी कार्यक्षमता से देश दुनिया का दिल जीता, इसलिए खुद पीएम मोदी चाहते थे कि स्वराज इस बार भी इस जिम्मेदारी को निभाएं। हालांकि खराब स्वास्थ्य के कारण सुषमा इसके लिए तैयार नहीं हुईं। खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुषमा ने पहले ही लोकसभा चुनाव से दूरी बना ली थी। हालांकि पीएम मोदी की ओर से सुषमा को मनाने की लगातार कोशिश हुई, मगर खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्होंने अपनी असमर्थता जता दीं। जिसके बाद पूर्व विदेश सचिव जयशंकर का नाम तय किया गया।