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What Next In Karnataka: बगावत रोकने से लेकर नेता चुनने तक, जीत के बाद कांग्रेस के सामने क्या हैं चुनौतियां?

Sat, 13 May 2023 03:10 PM IST
विभास साने न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: विभास साने Updated Sat, 13 May 2023 03:10 PM IST
सार

Karnataka Election Result Equations: कर्नाटक के चुनाव नतीजों की तस्वीर अब साफ हो चुकी है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने दोगुनी सीटों पर जीत दर्ज की है। जीत साफ है, लेकिन कांग्रेस के सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी। जानिए कैसे...

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What Next In Karnataka all four Equations Why is Congress worried even after winning the assembly polls 2023
siddaramaiah, DK Shivkumar - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कर्नाटक की जनता ने इस बार रोटी पलट दी। बजरंग दल और बजरंगबली के मुद्दे के सहारे चुनाव जीतने की भाजपा की कोशिश काम नहीं आई। कांग्रेस के लिए अच्छी खबर यह है कि हिमाचल के बाद कर्नाटक भी उसकी झोली में आ गया है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वह पहले से सत्ता में है। बिहार, झारखंड और तमिलनाडु में उसकी गठबंधन सरकार है। बहरहाल, कर्नाटक की जीत के बावजूद कांग्रेस के सामने कुछ चुनौतियां हैं। आइए इन चुनौतियों के बारे में जानते हैं...

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पहली चुनौती : कौन बनेगा सीएम?
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रहेगी कि मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए? कांग्रेस के पास कर्नाटक में दो चेहरे हैं- पूर्व सीएम सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार। कांग्रेस के लिए यह स्थिति 2018 जैसी है, जब मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसके पास दो-दो चेहरे थे। 

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  • मध्यप्रदेश में क्या हुआ: यहां कांग्रेस ने कमलनाथ को कमान सौंपी, लेकिन 15 महीने बाद ही सीएम पद के दूसरे दावेदार रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी से अलग हो गए। कांग्रेस को सत्ता भी गंवानी पड़ी। 
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  • राजस्थान में क्या हुआ: यहां भी चुनावी जीत के 20 महीने बाद ही ऐसे हालात बनते दिखे, जब मुख्यमंत्री बनाए गए अशोक गहलोत के खिलाफ सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने बगावत कर दी। गहलोत ने हालांकि सत्ता बचा रखी है, लेकिन पायलट ने अब तक बागी तेवर अपना रखे हैं। 
     
  • छत्तीसगढ़ में क्या हुआ: यहां भी कांग्रेस के पास टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल के रूप में सीएम पद के दो दावेदार थे। यहां कांग्रेस ने बघेल को सीएम बनाया। हालांकि, बाद के वर्षों में यहां मध्यप्रदेश-राजस्थान जैसी कोई बगावत नहीं हुई।


सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार
कर्नाटक में पूर्व सीएम सिद्धारमैया कुरबा समुदाय से आते हैं। वहीं, शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं और प्रदेश अध्यक्ष हैं। दोनों नेताओं के अलग-अलग धड़ों को एक रखने में कांग्रेस आलाकमान अब तक कामयाब रहा है, लेकिन नतीजों के बाद जिस धड़े को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिलेगी, उसे कैसे संतुष्ट किया जाएगा, यह कांग्रेस को देखना होगा। सिद्धारमैया पहले ही कह चुके हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव है, ऐसे में वे मुख्यमंत्री पद पर एक आखिरी मौका भी आजमाना चाहेंगे। उनके पास पूरे पांच साल सरकार चलाने का अनुभव भी है। वहीं, डीके शिवकुमार चुनाव जीतने के बाद ही बोल चुके हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम पद का ऑफर ठुकराकर जेल जाना मंजूर था। इस तरह वे आलाकमान के सामने अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। 

दूसरी चुनौती : विधायकों को एकजुट रखना
यह चुनौती कितनी बड़ी है, इसे इन बातों से समझिए: 

  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में कई कमरे बुक कर चुकी है। उसने जीते हुए नेताओं को रात को ही होटल पहुंचने को कहा है। यहीं पर रविवार को कांग्रेस के नवनिर्वाचित नेताओं की बैठक होगी। 
  • कुछ खबरों में तो यह भी दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कुछ हेलीकॉप्टर भी बुक कर चुकी है ताकि नेताओं को शिफ्ट करने की नौबत आने पर उनका इस्तेमाल हो सके। हैदराबाद में भी रिजॉर्ट बुक होने की खबरें आईं, लेकिन शिवकुमार ने वहां नेताओं को ले जाने की संभावनाओं से इनकार कर दिया। 


तीसरी चुनौती : बहुमत के आंकड़े को बनाए रखना
कांग्रेस ने 135 सीटें अपने नाम कीं। ऐसे में वह बहुमत से 22 सीटें ऊपर है। यह उसके लिए राहत की खबर है, लेकिन उसके सामने क्या चुनौती रहेगी, इसे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान से समझिए। रुझानों में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद कमलनाथ ने कहा, ''भाजपा अन्य दलों से मिलकर खरीद-फरोख्त करने की कोशिश करेगी। भाजपा ने हमेशा ऐसा ही किया है। मध्यप्रदेश में भी उसने यही किया था। भाजपा ने सौदेबाजी की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश से शुरू की थी, वह अभी खत्म नहीं हुई है।''
 

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