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Heat Wave: क्या है हीट वेव जो ले रही लोगों की जान, इसे घोषित कब किया जाता है, लू से प्रभावित राज्य कौन से हैं?

Mon, 19 Jun 2023 02:31 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 19 Jun 2023 02:31 PM IST
सार

हीट वेव अत्यधिक गर्म मौसम की अवधि है जो आमतौर पर दो या उससे अधिक दिनों तक रहती है। जब तापमान किसी दिए गए क्षेत्र के सामान्य औसत से अधिक हो जाता है तो उसे हीट वेव कहते हैं। ये घटनाएं मौसम में दिन-प्रतिदिन बदलाव का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं।

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What is the heat wave that is killing people, when is it declared and states affected
हीट वेव - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

इन दिनों देश के कई हिस्से हीट वेव (लू) की चपेट में हैं। इस लू के चलते देश के तीन राज्यों में कई लोगों की मौत का दावा किया गया है। जिन राज्यों में ज्यादा मौतें हुई हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा शामिल हैं। इस बीच, हीट वेव के प्रभाव को देखते हुए कई राज्यों ने ग्रीष्मकालीन अवकाश की तारीखों में बदलाव किया है। 
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जानलेवा बन चुकी लू सामान्य जन जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि हीट वेव क्या है? यह कब घोषित किया जाता है? भारत में हीट वेव की अवधि क्या है? देश में हीट वेव से प्रभावित राज्य कौन से हैं? हीट वेव का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? अभी क्यों चर्चा में है हीट वेव? इसका असर क्या पड़ रहा है? क्या पहले भी ऐसे हालात पैदा हुए हैं? आइये जानते हैं...
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What is the heat wave that is killing people, when is it declared and states affected
हीट वेव - फोटो : Pixabay
हीट वेब क्या है?
हीट वेव अत्यधिक गर्म मौसम की अवधि है जो आमतौर पर दो या उससे अधिक दिनों तक रहती है। जब तापमान किसी दिए गए क्षेत्र के सामान्य औसत से अधिक हो जाता है तो उसे हीट वेव कहते हैं। लू की घटनाएं मौसम में दिन-प्रतिदिन बदलाव का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। जैसे-जैसे पृथ्वी की जलवायु गर्म होती जा रही है, वैसे-वैसे दिन और रात सामान्य से अधिक गर्म होते जा रहे हैं और हीट वेव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे मौतों और बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।

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लू - फोटो : Pixabay
लू कब घोषित किया जाता है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की परिभाषा के अनुसार, जब मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो लू चलने लगती है। यदि तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो यह खतरनाक लू की श्रेणी में कही जाती है। तटीय क्षेत्रों में जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस हो जाता है तो लू चलने लगती है।

भारत में हीट वेव की अवधि क्या है?
यह मुख्य रूप से मार्च से जून के दौरान और कुछ दुर्लभ मामलों में जुलाई में भी होती है। भारत में इन गर्म हवाओं का चरम महीना मई है।

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लू - फोटो : Pixabay
देश में लू से प्रभावित राज्य कौन से हैं?
हीट वेव आमतौर पर मार्च से जून के दौरान उत्तर पश्चिमी भारत, मध्य, पूर्व और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के मैदानी इलाकों में होती है। इसमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्से, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। कभी-कभी यह तमिलनाडु और केरल में भी होता है। गर्म हवाएं मानव और पशु जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। हालांकि, मई के महीने में मुख्य रूप से राजस्थान और विदर्भ क्षेत्र में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक देखा गया।

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अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
हीट वेव का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, हीट वेव के स्वास्थ्य प्रभावों में आमतौर पर पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), ऐंठन, उष्माघात आदि शामिल होते हैं। 39 डिग्री सेल्सियस से कम बुखार, सूजन और बेहोशी आमतौर पर ऐंठन के लक्षण होते हैं। थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियां ऐंठन और पसीना लू लगने के संकेत देते हैं। उष्माघात के लक्षणों में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक, दौरे या कोमा शामिल हैं। यह एक घातक स्थिति मानी जाती है। 

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छिंदवाड़ा जिला अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया
अभी क्यों चर्चा में है हीट वेव?
कई रिपोर्ट्स में लू के चलते देश के तीन राज्यों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया गया है। जिन राज्यों में ये मौतें हुई हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा शामिल हैं। बिहार में लू के चलते 45 और ओडिशा में 20 लोगों की मौत की खबर है लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बलिया के सरकारी अस्पताल में ही बीते तीन दिनों में 54 लोगों की मौत के दावे पर बलिया के सरकारी अस्पताल के सीएमओ डॉ. एसके यादव ने बताया कि 15 जून को अस्पताल में 154 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 23 की मौत हो गई थी। 16 जून को 137 लोग भर्ती हुए, जिनमें से 20 मरीजों की मौत हो गई थी। वहीं, 17 जून को 11 मरीजों की मौत हुई थी। हालांकि मौत का कारण लू ही है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की मौत हुई है, वह पहले से बीमार थे और गर्मी और लू के चलते उनकी बीमारी गंभीर हो गई, जो उनकी मौत का कारण बनी। 

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स्कूल में परीक्षा देते बच्चे। - फोटो : संवाद
हीट वेव का असर क्या पड़ रहा है?
गर्मी को देखते हुए बिहार के कई जिलों में 12वीं तक के स्कूलों को 24 जून तक बंद कर दिया गया है। बिहार में हीटवेव ने पिछले 11 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले 2012 में 19 दिनों तक लगातार हीटवेव का दौर रहा था। इस बार हीटवेव को चलते हुए 20 दिन हो गए हैं। गोवा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी भीषण गर्मी को देखते हुए गर्मी की छुट्टियों को बढ़ा दिया गया है।

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गर्मी का कहर - फोटो : पीटीआई
क्या पहले भी ऐसे हालात पैदा हुए हैं?
विभिन्न महीनों के दौरान भारत में पारा के बढ़ने से पिछले कुछ वर्षों में कई रिकॉर्ड टूट गए हैं। 2016, 2009, 2017, 2010, और 2022 भारत में रिकॉर्ड किए गए सभी पांच सबसे गर्म वर्ष पिछले पंद्रह वर्षों में थे। आईएमडी ने कहा कि 15 सबसे गर्म वर्षों में से 11 वर्ष 2008 से 2022 के बीच ही दर्ज किए गए। 2010 से अनुमानित 6,500 लोग गर्मी से संबंधित बीमारियों से मर चुके हैं। IMD के अनुसार, 2023 में 29.5 डिग्री सेल्सियस के अधिकतम तापमान के साथ 1901 के बाद से सबसे गर्म फरवरी देखी गई।

2021 में प्रकाशित एक शोध में कहा गया था कि 1971-2019 तक देश में हीट वेव की 706 घटनाएं हुईं। इसके अनुसार, हीटवेव ने भारत में 50 वर्षों में 17,000 से अधिक लोगों की जान ले ली।
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