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क्या है सरोगेसी, किसे है अनुमति और कैसे हो रहा इसका दुरुपयोग

Mon, 02 Mar 2020 02:59 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 02 Mar 2020 02:59 PM IST
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What is Surrogacy Indian Surrogacy Bill 2019 latest News
प्रतीकात्मक चित्र - फोटो : Social media

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्यसभा की चयन समिति की सिफारिशों को शामिल करने के बाद सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को मंजूरी दी। प्रस्तावित बिल के मुताबिक, कोई भी महिला अपनी इच्छा से सरोगेट मां बन सकेगी। निसंतान जोड़ों के अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को भी इसका फायदा मिलेगा। 


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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्यसभा की चयन समिति की सिफारिशों को शामिल करने के बाद सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को मंजूरी दी। प्रस्तावित बिल के मुताबिक, कोई भी महिला अपनी इच्छा से सरोगेट मां बन सकेगी। निसंतान जोड़ों के अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को भी इसका फायदा मिलेगा। 

कमेटी ने सरोगेसी बिल के पुराने ड्राफ्ट का अध्ययन करके किराए की कोख के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। इसके साथ ही नए बिल में इसे नैतिक रूप देने की बात कही गई थी।

क्या है नए विधेयक में खास
नए विधेयक में केंद्र में नेशनल सरोगेसी बोर्ड और राज्यों में स्टेट सरोगेसी बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया है। ये बोर्ड ही सरोगेसी की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इसके अलावा सरोगेट मदर की बीमा की सीमा को 16 महीने से बढ़ाकर 36 महीने तक कर दिया गया है। व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध होगा और इसके प्रचार-प्रसार पर भी रोक लगाई जाएगी।

क्या है सरोगेसी
कुछ महिलाओं के गर्भाशय में प्राकृतिक-तकनीकी कमी के कारण भ्रूण का पूरा विकास नहीं हो पाता है। भ्रूण के परिपक्व होने के पहले ही महिला का गर्भपात हो जाता है। ऐसी स्थिति में ऐसी महिलाएं मातृत्व सुख से वंचित रह जाती हैं। लेकिन अब आईवीएफ तकनीकी की सहायता से ऐसी महिलाओं को भी मातृत्व का सुख दिया जाना संभव होने लगा है। 

दरअसल, ऐसी स्थिति में महिला के गर्भाशय में अंडे के निषेचित होने के बाद एक निश्चित अवधि पर उसे महिला के गर्भ से निकालकर एक अन्य स्वस्थ महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है जहां इसका पूर्ण विकास होता है। समय पूरा होने पर इससे एक स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है। 

इसमें पति-पत्नी और एक तीसरी महिला(किराए की कोख-सरोगेट मदर) शामिल होती है। इसे सामान्य भाषा में सरोगेसी कहा जाता है। जो महिला दूसरे के भ्रूण को अपने गर्भाशय में पालती है, उसे सरोगेट मदर के नाम से जाना जाता है।

किसे है सरोगेसी की अनुमति

किराए की कोख के उन भारतीय नागरिक दंपतियों को इसकी अनुमति रहेगी, जो चिकित्सीय रूप से गर्भ धारण के योग्य नहीं हैं। ताकि नि:संतान दंपति आधुनिक तकनीक और चिकित्सीय विज्ञान के सहारे संतान का सुख पा सकें। 

इस तरह हो रहा था दुरुपयोग
दरअसल, जिस महिला के गर्भ में भ्रूण को परिपक्व होने के लिए रखा जाता है, उसकी देखभाल और गर्भावस्था के दौरान खानपान के लिए नि:संतान दंपत्ति के द्वारा कुछ आर्थिक भुगतान किया जाता है। लेकिन यह लेनदेन अब अवैध कारोबार में बदल गया था। 

पहले आईवीएफ के जरिए इस कारोबार में चांदी काट रहे संस्थानों ने इसके लिए गरीब तबके की महिलाओं को उपलब्ध कराने से लेकर पूरा सौदा करने लगे थे। यह महिलाएं अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर बार-बार सरोगेट मदर बनने के लिए तैयार हो जाती थी। नया कानून इस पर विराम लगाएगा।

इन सेलेब्रिटीज ने उठाया फायदा

सामान्य लोगों के अलावा कई सेलेब्रिटीज ने भी इस तकनीकी का लाभ उठाया है। बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान का बेटा अबराम, आमिर खान और किरण राव का बेटा आजाद राव खान सरोगेसी के द्वारा ही दुनिया में आए हैं। इसके अलावा तुषार कपूर ने भी सरोगेसी के जरिए पिता बनने का सुख प्राप्त किया है। इसके अलावा एकता कपूर और करण जौहर ने भी इसी तकनीक के जरिए संतान सुख को प्राप्त किया है।

इतना है खर्च
एक अनुमान के मुताबिक सामान्य तौर पर एक सरोगेट मदर के द्वारा बच्चा जनने का खर्च कम से कम 10-15 लाख रुपये आता है। इसमें आईवीएफ संस्थान की फीस, सरोगेट मदर की फीस, सरोगेट मदर का रहन-सहन, खान-पान आदि का खर्च शामिल होता है।
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