समझौता ब्लास्ट: धमाके से फैसले तक, कौन-कौन थे आरोपी
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में पंचकुला की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने असीमानंद समेत चारों अभियुक्तों को बरी कर दिया है। असीमानंद के अलावा इस मामले में लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी अभियुक्त थे। इस मामले में कुल 8 अभियुक्त थे, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है, जबकि तीन को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
12 साल पहले उस रात यह ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान स्थित लाहौर जा रही थी जब पानीपत के पास इसमें बम धमाका हुआ था और इसमें 68 लोग मारे गये। इस हादसे में मारे जानेवालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे। शुरुआत में इस मामले की जांच हरियाणा पुलिस ने की लेकिन, देश के कई दूसरे शहरों में इसी तर्ज पर हुए धमाकों के बाद जांच को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दिया गया।
इस ब्लास्ट के सभी आरोपियों के खिलाफ पंचकूला की स्पेशल एनआईए कोर्ट में केस चला और इस दौरान 224 गवाहों के बयान दर्ज हुए। मामले में चार मुख्य अभियुक्त स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी हैं।
कब-कब क्या क्या हुआ?
18 फरवरी 2007: भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिनों चलनेवाली समझौता एक्सप्रेस में बम धमाका हुआ जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई। 12 लोग घायल हुए। ट्रेन उस रविवार दिल्ली से लाहौर जा रही थी। मारे जाने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे।
धमाके के दो दिनों बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद अहमद कसूरी भारत आने वाले थे। घटना की दोनों मुल्कों में कड़ी निंदा हुई। लेकिन इस कारण कसूरी का भारत दौरा रद्द नहीं हुआ। दिल्ली से सात पाकिस्तानी घायलों को ले जाने के लिए पाकिस्तानी वायु सेना के विमान को आने की आज्ञा भी दी।
19 फरवरी, 2007: जीआरपी/एसआईटी हरियाणा पुलिस ने मामले को दर्ज किया। एफआईआर के मुताबिक देश की अखंडता, एकता, संप्रभुता को बिगाड़ने के इरादे से इस ट्रेन में यात्रियों को मारने के इरादे से चरमपंथियों ने ट्रेन संख्या 4001 अप अटारी (समझौता) एक्सप्रेस में पानीपत, हरियाणा के पास दो आईईडी ब्लास्ट किये थे।
एफआईआर के मुताबिक 23:53 बजे दिल्ली से करीब 80 किलोमीटर दूर पानीपत के दिवाना रेलेव स्टेशन के पास ट्रेन में धमाका हुआ। इसकी वजह से ट्रेन के दो जनरल कोच में आग लग गई। यात्रियों को दो धमाकों की आवाजें सुनाई दी जिसके बाद ट्रेन के डिब्बों में आग लग गई।
मृतकों में 16 बच्चे और चार रेलवे कर्मचारी भी शामिल थे। पुलिस को घटनास्थल से दो ऐसे सूटकेस बम भी मिले जो फट नहीं पाये थे। भारत और पाकिस्तान ने कड़े शब्दों में इस घटना की निंदा की। भारत के केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि इस हमले के बारे में ठोस सुराग़ मिले हैं लेकिन अभी उनके बारे में अधिक जानकारी देना ठीक नहीं होगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अजीज ने कहा कि मारे गए लोगों में 60 पाकिस्तानी नागरिक हैं, हालांकि पक्के तौर पर मारे गए लोगों की नागरिकता की पुष्टि नहीं हो सकी। पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया है और उन्होंने मृतकों की पहचान करने की कोशिश की।
20 फरवरी, 2007: प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्धों के 'स्केच' जारी किए। ऐसा कहा गया कि ये दोनों ट्रेन में दिल्ली से सवार हुए थे और रास्ते में कहीं उतर गये जिसके बाद धमाका हुआ। पुलिस ने संदिग्धों के बारे में जानकारी देने वालों को एक लाख रुपये का नकद इनाम देने की भी घोषणा की थी।
हरियाणा ने इस केस के लिए एक विशेष जांच दल या एसआईटी का गठन किया। हरियाणा पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से केरोसिन तेल की 14 बोतलें, एक पाइप, एक डिजिटल टाइमर, सूटकेस का कवर और कुछ अन्य सामान बरामद किये गए हैं।
समझौता एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों को लेकर वाघा सीमा पार करके लाहौर पहुंचीं। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद भी स्टेशन पर मौजूद थे। वहां उन्होंने घोषणा की कि मरने वालों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
22 फरवरी, 2007: 37 शवों की पहचान हुई, जिसमें 30 पाकिस्तानी नागरिक थे।
15 मार्च, 2007: हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। यह इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदी गई थीं।
बाद में इसी तर्ज पर हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में भी धमाके हुए और इन सभी मामलों के तार आपस में जु़ड़े हुए बताए गए। समझौता मामले की जांच में हरियाणा पुलिस और महाराष्ट्र के एटीएस को एक हिंदू कट्टरपंथी संगठन 'अभिनव भारत' के शामिल होने के संकेत मिले थे।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की गई थी
29 दिसंबर, 2007: मुख्य अभियुक्त सुनील जोशी की मध्य प्रदेश में हत्या।
29 जुलाई, 2010: करीब ढाई साल के बाद इस घटना की जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा गया।
19 नवंबर, 2010: सीबीआई ने हरिद्वार से स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया।
30 दिसंबर, 2010: एनआईए ने इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड स्वामी असीमानंद को बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ पक्के सबूत मिले हैं।
11 जनवरी, 2011: एनआईए ने संदीप दांगे और रामचंद्र कलसांगरा पर 10-10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की।
26 जून, 2011: एनआईए ने पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। पहली चार्जशीट में नब कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी उर्फ मनोज उर्फ गुरुजी, रामचंद्र कलसांगरा उर्फ रामजी उर्फ विष्णु पटेल, संदीप दांगे उर्फ टीचर, लोकेश शर्मा उर्फ अजय उर्फ कालू, कमल चौहान, रमेश वेंकट महालकर उर्फ अमित हकला उर्फ प्रिंस का नाम था।
एनआईए कहना था कि जिन लोगों ने हमला किया वो देश के विभिन्न मंदिरों पर हुए चरमपंथी हमलों से भड़के हुए थे। इनमें गुजरात के अक्षरमधाम मंदिर (24-09-2002) और जम्मू के रघुनाथ मंदिर में हुए दोहरे धमाके (30 मार्च और 24 नवंबर 2002) और वाराणसी के संकटमोचन मंदिर (07 मार्च 2006) शामिल हैं।
15 दिसंबर 2012: मामले में राजिंदर चौधरी को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया। राजिंदर चौधरी पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन में बम रखा था। एनआईए चौधरी के पीछे 2010 से लगी हुई थी। गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश कोर्ट में पेश कर एनआईए ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया। राजिंदर चौधरी के साथ ही कमल चौहान और लोकेश शर्मा का नाम भी 2006 में हुए मालेगांव ब्लास्ट में सामने आया। यह भी सामने आया कि राजिंदर चौधरी ने इन सभी अभियुक्तों के साथ जनवरी 2006 में मध्य प्रदेश के देवास में बम विस्फोट और पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग ली थी।
अगस्त 2014: समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में अभियुक्त स्वामी असीमानंद को जमानत मिल गई। कोर्ट में जांच एजेंसी एनआईए असीमानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई। उन्हें सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया था। उन पर वर्ष 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप था।
असीमानंद के खिलाफ मुकदमा उनके इकबालिया बयान के आधार पर बना था लेकिन बाद में वो ये कहते हुए अपने बयान से मुकर गए कि उन्होंने वो बयान टॉर्चर की वजह से दिया था।
16 अप्रैल 2018: नबकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद को एनआईए की विशेष अदालत ने 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में दोषमुक्त करार दिया। उन्हें पहले ही 2007 के अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में दोषमुक्त करार दिया जा चुका है। अब असीमानंद केवल 2007 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
06 मार्च 2019: एनआईए कोर्ट में बहस पूरी। सभी पक्षों की अंतिम दलील के बाद 11 मार्च के लिए फैसला सुरक्षित किया।
शिमला समझौते की देन है समझौता एक्सप्रेस
भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत शिमला समझौते के बाद 22 जुलाई 1976 को हुई थी। तब यह ट्रेन अमृतसर और लाहौर के बीच 52 किलोमीटर का सफर रोजाना किया करती थी।
पंजाब में 1980 के दशक में फैली अशांति को लेकर सुरक्षा की वजहों से भारतीय रेल ने इस सेवा को अटारी स्टेशन तक सीमित कर दिया, जहां कस्टम और इमिग्रेशन की मंजूरी ली जाती है। जब यह सेवा शुरू हुई थी तब दोनों देशों के बीच ट्रेनें रोजना चला करती थीं जिसे 1994 में हफ्ते में दो बार में तब्दील कर दिया गया।
कई बार बाधित हुई समझौता एक्सप्रेस ट्रेन सेवा
- पहली बार इस ट्रेन का परिचालन 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए चरमपंथी हमले के बाद रोका गया।
- 1 जनवरी 2002 से लेकर 14 जनवरी 2004 तक दोनों देशों के बीच यह ट्रेन नहीं चली।
- इसके बाद 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद एक बार फिर इस ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया।
- 8 अक्तूबर 2012 को पुलिस दिल्ली आ रही इस ट्रेन से वाघा बॉर्डर पर 100 किलो प्रतिबंधित हेरोइन और 500 राउंड कारतूस बरामद किये।
- 28 फरवरी 2019 को एक बार फिर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए इसे रोक दिया गया था।