{"_id":"62f7c2c3e4b6c3464f68b1e1","slug":"what-is-nitish-kumar-political-agenda-ahead-how-much-will-the-maths-of-2024-change-with-mahagathbandhan","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar Politics: बिहार से आगे नीतीश कुमार का राजनीतिक एजेंडा क्या है और महागठबंधन से कितना बदलेगा 2024 का गणित?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bihar Politics: बिहार से आगे नीतीश कुमार का राजनीतिक एजेंडा क्या है और महागठबंधन से कितना बदलेगा 2024 का गणित?
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है और इसके ठीक पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ मिलकर सत्तारूढ़ दल का उत्साह फीका कर दिया है। दिल्ली के लुटियन जोन में इसकी चर्चा तेज है कि भाजपा के कुछ रणनीतिकार सही मौके की तलाश कर रहे हैं। भाजपा के कुछ नेताओं के चेहरे पर उत्साह के भाव भी हैं। इन सभी बदलावों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश के बिहार से आगे के राजनीतिक एजेंडे पर भी खूब चर्चा हो रही है। दिल्ली अभी दूर है, लेकिन जद (यू) में नंबर 2 के नेता माने जाने वाले राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) भी 2024 की चर्चा ज्यादा कर रहे हैं।
राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि 2024 में जद (यू), राजद, कांग्रेस और अन्य दलों का महागठबंधन भाजपा को तगड़ा झटका देने वाला है। 40 सीटों पर सीधे भाजपा को नुकसान पहुंचाएंगे। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि 2024 में 2019 और 2014 वाली स्थिति नहीं रहने वाली है। उन्होंने कहा कि उनके पास बहुत फोन आ रहे हैं। 2024 आने दीजिए, तब देखिए क्या करते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता जद (यू) की इस चुनौती पर कुछ नहीं बोलना चाहते। एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि 2024 आने दीजिए। खुद पता चल जाएगा।
सूत्र का कहना है कि राजद के साथ जाकर नीतीश कुमार खुद फंस गए हैं। उनके पास 2017 में राजद का साथ छोड़ने की कोई सफाई नहीं हैं। इसलिए जनता को जवाब देने वाले मुद्दों से बचना चाह रहे हैं। हालांकि राजद के नेता शिवानंद तिवारी की उम्मीद बहुत मजबूत हुई है। उनका कहना है कि अब एक बार फिर बिहार में जनता दल परिवार एकजुट हो जाएगा। इसका एक बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री नीतीश की कोशिश और तेजस्वी का दिल्ली में होमवर्क
नई सरकार में उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद तेजस्वी ने दिल्ली का दौरा किया। वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले। वामदलों के नेता सीताराम येचुरी और डी राजा से भी मिले। उन्होंने बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने की सभी से बधाई स्वीकार की और होमवर्क पूरा किया। तेजस्वी की दिल्ली यात्रा का दो बड़ा उद्देश्य है। पहला तो यह कि वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मिलने आए हैं। रक्षा बंधन के त्यौहार पर बहनों से राखी बंधवाना भी इसमें शामिल है। दूसरा उन्हें कई दलों के नेताओं से मिलना है।
इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी हैं। उन्हें अपने पिता से बिहार के मंत्रिमंडल विस्तार की टिप्स लेनी है। वाम दलों के नेताओं और कांग्रेस के नेताओं से मंत्रिमंडल विस्तार का मसला साझा करना है। साथ में सरकार बनने पर धन्यवाद देने वाले वरिष्ठ नेताओं का आभार जताने की भी औपचारिकता पूरी करना है।
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली के कुछ नेताओं से फोन पर बात हुई है। वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी वार्ता कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष के कोरोना से दोबारा संक्रमित होने के कारण मुख्यमंत्री को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। नीतीश कुमार चाहते हैं कि कांग्रेस और वामदल भी बिहार में सरकार में शामिल हों। सभी नेताओं की सहमति से कामकाज और समन्वय की रुपरेखा बने। सरकार अपने कामकाज का उदाहरण पेश करे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह जरूरी भी है लेकिन सभी बातें फोन पर नहीं हो सकती।
16 अगस्त के बाद मंत्रिमंडल विस्तार कभी भी
बिहार के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री का ध्यान अभी राज्य के मंत्रिमंडल विस्तार पर है। इसके लिए नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव हर रोज प्रयास कर रहे हैं। राजद के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बिहार की नई सरकार में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करके पूरे बिहार का विकास आगे बढ़ाने की योजना है। सूत्र का अनुमान है कि मंत्रिमंडल का विस्तार 16 अगस्त के बाद कभी भी हो सकता है। वह कहते हैं कि महागठबंधन के साथ बिहार के लगभग सभी राजनीतिक दल जुड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ बड़ा देखने को मिल सकता है।
क्या महागठबंधन के कारण बदलेगा 2024 का गणित?
भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज कहती थी कि राजनीति में बहुत लंबे समय तक की सोचकर चलना हमेशा सही नहीं होता। यह कुछ मामले में ठीक है। भाजपा के नेता सुधीर अग्रवाल इसी लाइन को दोहराते हुए कहते हैं कि 2024 का लोकसभा चुनाव तो कोई 20-21 महीने बाद होगा। तब तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले की प्राचीर से दो बार तिरंगा झंडा पहरा चुके होंगे। संसद की नई ईमारत में संसद सत्र चल चुके होंगे। गुजरात, कर्नाटक समेत कई राज्यों में चुनाव हो चुका होगा।
सुधीर का कहना है कि इसलिए अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि पता नहीं तबतक पटना में नीतीश और तेजस्वी की जोड़ी न जाने सरकार का कितना इकबाल रख पाएगी। लेकिन कांग्रेस के नेता संजीव सिंह को इससे काफी बड़े बदलाव की उम्मीद है। संजीव सिंह कहते हैं कि राजनीति में संदेश बड़ी चीज होती है। बिहार में सत्ता के बदलाव ने बड़ा संदेश दिया है। वह कहते हैं कि इस संदेश को भाजपा के नेता समझ रहे हैं।