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वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप क्या है और क्या है कानून में विसंगति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 19 Jul 2018 04:33 AM IST
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किसी महिला से उसकी इच्छा के बिना सेक्स करना रेप यानी बलात्कार माना जाता है। यह कानूनन अपराध है जिसके लिए भारतीय दंड संहिता में सजा का प्रवाधान है। लेकिन भारत में पति अपनी पत्नी की मर्जी के बिना उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे अपराध नहीं माना जाता। यानी भारत में वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप कानूनन अपराध के दायरे से बाहर है।
केंद्र सरकार ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने से इंकार किया है और कहा है कि ऐसा करना विवाह की संस्था के लिए खतरा साबित होगा।
दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर रही है। कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा कि वैवाहिक बलात्कार को दंडनीय अपराध नहीं बनाया जा सकता क्योंकि ऐसा करना विवाह की संस्था के लिए खतरनाक साबित होगा। यह एक ऐसा चलन बन सकता है, जो पतियों को प्रताड़ित करने का आसान जरिया बन सकता है।
केंद्र सरकार का मत है कि बहुत सारे पश्चिमी देशों में वैवाहिक बलात्कार अपराध की श्रेणी में है। लेकिन इससे यह जरूरी नहीं है भारत में भी इसका आंख मूंदकर अनुसरण किया जाए। केंद्र ने यह भी कहा कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने से पहले देश में शिक्षा, महिलाओं की आर्थिक हालत, गरीबी जैसी तमाम समस्याओं के बारे में भी सोचना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में अपने एक फैसले में कहा था, "वैवाहिक संबंध के भीतर हुए बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।"
उस समय एक स्वयंसेवी संस्था इंडिपेंडेंट थॉट ने मैरिटल रेप को कानून अपराध घोषित करने के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। तब भी केंद्र सरकार ने कहा था कि सरकार आईपीसी की धारा 375 के परंतुक (अपवाद) 2 के समर्थन में है। धारा 375 के अपवाद 2 में पति, नाबालिग पत्नी और उनके वैवाहिक संबंध की मर्यादा की रक्षा की बात कही गई है।
ऐसे में यह सवाल मौजूं हो जाता है कि 'बलात्कार' और 'वैवाहिक बलात्कार' में क्या फर्क है और विवाह की संस्था का इससे क्या संबंध है?
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केंद्र सरकार ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने से इंकार किया है और कहा है कि ऐसा करना विवाह की संस्था के लिए खतरा साबित होगा।
दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर रही है। कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा कि वैवाहिक बलात्कार को दंडनीय अपराध नहीं बनाया जा सकता क्योंकि ऐसा करना विवाह की संस्था के लिए खतरनाक साबित होगा। यह एक ऐसा चलन बन सकता है, जो पतियों को प्रताड़ित करने का आसान जरिया बन सकता है।
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केंद्र सरकार का मत है कि बहुत सारे पश्चिमी देशों में वैवाहिक बलात्कार अपराध की श्रेणी में है। लेकिन इससे यह जरूरी नहीं है भारत में भी इसका आंख मूंदकर अनुसरण किया जाए। केंद्र ने यह भी कहा कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने से पहले देश में शिक्षा, महिलाओं की आर्थिक हालत, गरीबी जैसी तमाम समस्याओं के बारे में भी सोचना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में अपने एक फैसले में कहा था, "वैवाहिक संबंध के भीतर हुए बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा।"
उस समय एक स्वयंसेवी संस्था इंडिपेंडेंट थॉट ने मैरिटल रेप को कानून अपराध घोषित करने के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। तब भी केंद्र सरकार ने कहा था कि सरकार आईपीसी की धारा 375 के परंतुक (अपवाद) 2 के समर्थन में है। धारा 375 के अपवाद 2 में पति, नाबालिग पत्नी और उनके वैवाहिक संबंध की मर्यादा की रक्षा की बात कही गई है।
ऐसे में यह सवाल मौजूं हो जाता है कि 'बलात्कार' और 'वैवाहिक बलात्कार' में क्या फर्क है और विवाह की संस्था का इससे क्या संबंध है?
क्या है बलात्कार
हिंदू मैरिज एक्ट में क्या कहा गया
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति और पत्नी की एक एक दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां तय हैं। इनमें दोनों को शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार भी शामिल है।
अदालत के ऐसे कई फैसले हैं जिसमें ये कहा गया है कि शारीरिक संबंध बनाने से मना करना क्रूरता है और इसे आधार बनाकर पत्नी और पत्नी तलाक ले सकते हैं।
क्या है बलात्कार
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अनुसार कोई पुरूष अगर किसी महिला के साथ अगर इन परिस्थितियों में सेक्स करता है तो माना जाएगा कि महिला का बलात्कार किया गया है।
1. महिला की इच्छा के विरुद्ध
2. महिला की मर्जी से, लेकिन यह सहमति उसकी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने या उसके किसी करीबी व्यक्ति के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो।
3. महिला की रजामंदी से, लेकिन महिला ने यह सहमति उस व्यक्ति की ब्याहता होने के भ्रम में दी हो।
4. महिला की समहति से, लेकिन यह सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की रजामंदी देने के परिणाम समझने की हालत में न हो।
5. महिला की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी इच्छा या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स।
लेकिन इस कानून में एक परंतुक (अपवाद) 2 भी मौजूद है। अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम है तो पति का उसके साथ सेक्स करना बलात्कार नहीं है।
क्या फांक है कानून में?
आईपीसी में बलात्कार की परिभाषा तय की गई है। लेकिन इसमें वैवाहिक बलात्कार के बारे कोई जिक्र नहीं है।
धारा 376 में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है। इस धारा में इस पत्नी से बलात्कार करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है बर्शते पत्नी 12 साल से कम की हो।
इसमें कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर बलात्कार करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की कैद या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
धारा 375 और धारा 376 के प्रावधानों से यह साफ है कि महिला के लिए सेक्स करने के लिए रजामंदी देने की उम्र 16 साल है लेकिन 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति का कोई मूल्य नहीं है।
स्वयंसेवी संस्था इंडिपेंडेंट थॉट ने 2013 में एक अदालत में अर्जी दायर कर धारा 375 के अपवाद 2 को चुनौती दी थी। अपवाद 2 में कहा गया है कि कोई पुरुष अपनी पत्नी से यौन-संबंध बनाए और पत्नी की उम्र 15 साल से कम न हो तो ऐसे यौन-संबंध को बलात्कार नहीं माना जाएगा।
इंडिपेंडेंट थॉट ने अदालत से प्रार्थना की थी कि धारा 375 के तहत सभी नाबालिगों को बलात्कार के खिलाफ सुरक्षा दी जाए, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति जो भी हो।
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति और पत्नी की एक एक दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां तय हैं। इनमें दोनों को शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार भी शामिल है।
अदालत के ऐसे कई फैसले हैं जिसमें ये कहा गया है कि शारीरिक संबंध बनाने से मना करना क्रूरता है और इसे आधार बनाकर पत्नी और पत्नी तलाक ले सकते हैं।
क्या है बलात्कार
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अनुसार कोई पुरूष अगर किसी महिला के साथ अगर इन परिस्थितियों में सेक्स करता है तो माना जाएगा कि महिला का बलात्कार किया गया है।
1. महिला की इच्छा के विरुद्ध
2. महिला की मर्जी से, लेकिन यह सहमति उसकी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने या उसके किसी करीबी व्यक्ति के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो।
3. महिला की रजामंदी से, लेकिन महिला ने यह सहमति उस व्यक्ति की ब्याहता होने के भ्रम में दी हो।
4. महिला की समहति से, लेकिन यह सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की रजामंदी देने के परिणाम समझने की हालत में न हो।
5. महिला की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी इच्छा या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स।
लेकिन इस कानून में एक परंतुक (अपवाद) 2 भी मौजूद है। अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम है तो पति का उसके साथ सेक्स करना बलात्कार नहीं है।
क्या फांक है कानून में?
आईपीसी में बलात्कार की परिभाषा तय की गई है। लेकिन इसमें वैवाहिक बलात्कार के बारे कोई जिक्र नहीं है।
धारा 376 में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है। इस धारा में इस पत्नी से बलात्कार करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है बर्शते पत्नी 12 साल से कम की हो।
इसमें कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर बलात्कार करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की कैद या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
धारा 375 और धारा 376 के प्रावधानों से यह साफ है कि महिला के लिए सेक्स करने के लिए रजामंदी देने की उम्र 16 साल है लेकिन 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति का कोई मूल्य नहीं है।
स्वयंसेवी संस्था इंडिपेंडेंट थॉट ने 2013 में एक अदालत में अर्जी दायर कर धारा 375 के अपवाद 2 को चुनौती दी थी। अपवाद 2 में कहा गया है कि कोई पुरुष अपनी पत्नी से यौन-संबंध बनाए और पत्नी की उम्र 15 साल से कम न हो तो ऐसे यौन-संबंध को बलात्कार नहीं माना जाएगा।
इंडिपेंडेंट थॉट ने अदालत से प्रार्थना की थी कि धारा 375 के तहत सभी नाबालिगों को बलात्कार के खिलाफ सुरक्षा दी जाए, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति जो भी हो।
निर्भया कांड के बाद मैरिटल रेप पर आया था यह सुझाव
प्रतीकात्मक चित्र
पिछले कुछ दशकों में बहुत से देशों ने वैवाहिक संबंध में पती द्वारा जबरदस्ती सेक्स को अपराध करार दिया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े घोषणापत्र में वैवाहिक बलात्कार को मानवाधिकार का उल्लंघन माना गया है।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन 104 देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित किया है, उनमें से 34 देशों ने इसे अलग अपराध माना है। जबकि बाकी देश इसे बलात्कार के दूसरे मामलों की तरह का ही अपराध मानते हैं।
भारत में मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता। हालांकि दिल्ली के 2012 में हुए निर्मम निर्भया बलात्कार कांड के बाद बनी जस्टिस वर्मा कमेटी ने आईपीसी की धारा 375 के तहत वैवाहिक बलात्कार को मिली छूट को खत्म करने की सिफारिश की थी।
2005 घरेलू हिंसा कानून
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 में भारत की संसद में पारित हुआ। इसका मकसद घर के अंदर घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना है। यह अधिनियम 26 अक्टूबर 2006 को लागू हुआ।
इस कानून के तहत घर के भीतर यौन शोषण को परिभाषित किया गया है। जिसके तहत घरेलू हिंसा के दायरे में अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं। इनमें लैंगिक शोषण जैसे बलात्कार और बलपूर्वक बनाए गए शारीरिक संबंध भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन 104 देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित किया है, उनमें से 34 देशों ने इसे अलग अपराध माना है। जबकि बाकी देश इसे बलात्कार के दूसरे मामलों की तरह का ही अपराध मानते हैं।
भारत में मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता। हालांकि दिल्ली के 2012 में हुए निर्मम निर्भया बलात्कार कांड के बाद बनी जस्टिस वर्मा कमेटी ने आईपीसी की धारा 375 के तहत वैवाहिक बलात्कार को मिली छूट को खत्म करने की सिफारिश की थी।
2005 घरेलू हिंसा कानून
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 में भारत की संसद में पारित हुआ। इसका मकसद घर के अंदर घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना है। यह अधिनियम 26 अक्टूबर 2006 को लागू हुआ।
इस कानून के तहत घर के भीतर यौन शोषण को परिभाषित किया गया है। जिसके तहत घरेलू हिंसा के दायरे में अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं। इनमें लैंगिक शोषण जैसे बलात्कार और बलपूर्वक बनाए गए शारीरिक संबंध भी शामिल हैं।