सियासत: टीएमसी के गढ़ में क्या करेगी भाजपा? समझें तीसरे चरण की 31 सीटों का समीकरण
- बंगाल में तीसरे चरण के तहत तीन जिलों की 31 सीटों पर होगा मतदान
- हुगली, हावड़ा और साउथ 24 परगना की इन सीटों पर टीएमसी का वर्चस्व
विस्तार
पश्चिम बंगाल में तीसरे चरण के विधानसभा चुनाव के तहत आज (6 अप्रैल) 31 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो हुगली, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों में आती हैं। अहम बात यह है कि 2011 से अब तक चाहे कोई भी चुनाव हों, इन जिलों की अधिकतर सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा सिर्फ माकपा की सीटें जीत पाई थी, जबकि टीएमसी के वोट बैंक पर उसका कुछ भी असर नहीं पड़ा था। इस रिपोर्ट में जानते और समझते हैं कि आखिर टीएमसी के इस गढ़ में भाजपा क्या करेगी? और इन 31 सीटों पर सियासी समीकरण कैसा है?
2016 में ऐसे थे सियासी हालात
जानकारी के मुताबिक, 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इन 31 सीटों पर महज 7 फीसदी वोट शेयर हासिल कर सकी, जबकि माकपा का वोट शेयर 37 फीसदी था। जब 2019 में लोकसभा चुनाव हुए तो इन सीटों पर भाजपा का वोट शेयर 37 फीसदी हो गया, जबकि वामपंथी दलों का वोट शेयर महज 8.33 फीसदी ही रह गया। इसके बावजूद भाजपा 31 में से सिर्फ 2 सीटों पर ही बढ़त बना सकी। ये दोनों हुगली जिले की पुरसुराह और गोघाट सीटें थीं। उधर, तृणमूल कांग्रेस ने 2016 के दौरान इन 31 सीटों में से 29 पर जीत हासिल की थी। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने इन 29 सीटों पर अपना वर्चस्व कायम रखा था।
इतने उम्मीदवार आजमा रहे किस्मत
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में कुल 205 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के 31-31 उम्मीदवार हैं। वहीं, माकपा के 13 और कांग्रेस के 7 प्रत्याशी भी किस्मत आजमा रहे हैं। बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में इन 31 सीटों में से 29 टीएमसी ने जीती थीं, जबकि दो सीटें माकपा के खाते में गई थीं। उस दौरान टीएमसी का वोट शेयर 50 फीसदी, माकपा का वोट शेयर 37 फीसदी और भाजपा का वोट शेयर 7 फीसदी था।
इस वजह से तारकेश्वर बनी हाई-प्रोफाइल सीट
बता दें कि हुगली जिले की तारकेश्वर विधानसभा सीट पर हर किसी की नजरें बनी हुई हैं। यह सीट आरामबाग लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसे 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान टीएमसी ने जीता था। भाजपा ने तारकेश्वर सीट पर पत्रकार से नेता बने स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारा, जिसके बाद यह हाई-प्रोफाइल सीट बन गई। स्वपन दासगुप्ता का मुकाबला टीएमसी के रामेंदु सिंह रॉय और माकपा प्रत्याशी सुजीत घोष से है। बता दें कि स्वपन दास गुप्ता राज्यसभा सांसद हैं। गौरतलब है कि टीएमसी के रचपाल सिंह तारकेश्वर सीट पर 2011 से विधायक हैं। 2011 में इस सीट पर टीएमसी का वोट शेयर 55.1 फीसदी था, जो 2016 में घटकर 50.75 फीसदी रह गया। वहीं, भाजपा का वोट शेयर 2011 में 1.7 फीसदी था, जो 2016 में 9.36 फीसदी हो गया। 2019 लोकसभा चुनाव की बात करें तो टीएमसी का वोट शेयर 51.05 फीसदी रहा, जबकि भाजपा का वोट शेयर 37.45 फीसदी रहा था।
धनेखली में भी कांटे की टक्कर
हुगली जिले में अंतर्गत आने वाली इस विधानसभा पर भाजपा की लॉकेट चटर्जी सांसद हैं। हालांकि, धनेखली विधानसभा सीट पर टीएमसी की असिमा पात्रा विधायक हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी हैं। उनका सीधा मुकाबला भाजपा के तुषार मजूमदार और कांग्रेस के अनिर्बान साहा से है। 2016 के विधानसभा चुनाव में असिमा पात्रा ने फारवर्ड ब्लॉक के प्रदीप मजूमदार को 58,644 वोटों के अंतर से हराया था। उस दौरान टीएमसी को 1,25,298 वोट (57.54 फीसदी) मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी को 66,654 वोट (30.61 फीसदी) हासिल हुए थे।
सितारों की चमक से श्यामपुर जीतने की कोशिश
भाजपा ने इस सीट पर मशहूर अभिनेत्री तनुश्री चक्रवर्ती को मैदान में उतारा है, जिनका मुकाबला टीएमसी के वर्तमान विधायक कालीपदा मंडल से है। कांग्रेस ने यहां अमिताभ चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि 2016 के विधानसभा चुनाव में मंडल को 1.08 लाख वोट मिले थे और उन्होंने कांग्रेस के चक्रवर्ती 26 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। वहीं, भाजपा की मौसमी विश्वास तीसरे नंबर पर रही थीं और उन्हें सिर्फ 8 हजार वोट मिले थे। मंडल श्यामपुर सीट पर 2001 से चुनाव लड़ रहे हैं।
इन सीटों पर भी हर किसी की नजर
दक्षिण 24 परगना के अंतर्गत आने वाली रैदिघी विधानसभा सीट पर 2016 में टीएमसी की देवश्री रॉय ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांटे के मुकाबले में माकपा उम्मीदवार कांति गांगुली को 1,129 वोट से हराया था। रॉय को 1,01,161 वोट मिले थे, जबकि गांगुली की झोली में 99,932 वोट गए थे। भाजपा की संघमित्रा चौधरी 7,703 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रही थीं। इस बार टीएमसी ने इस सीट पर आलोक जलदाता को माकपा उम्मीदवार कांति गांगुली और भाजपा प्रत्याशी शांतनु बापुली के खिलाफ उतारा है। बता दें कि कांति गांगुली माकपा सरकार में कई बार मंत्री रह चुके हैं। उधर, जयनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बसंती विधानसभा सीट भी दक्षिण 24 परगना में आती है। 2016 में इस सीट पर टीएमसी के गोविंद नास्कर ने कब्जा जमाया था। उन्होंने सात बार इस सीट पर चुनाव जीतने वाले आरएसपी के सुभाष नास्कर को 16,607 वोटों से मात दी थी। इस बार टीएमसी ने सुभाष नास्कर और भाजपा के रमेश माजी के खिलाफ पूर्व मंत्री श्याम मंडल को उतारा है।
तीसरे चरण में हर चौथे उम्मीदवार के नाम आपराधिक मामला दर्ज है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्याशियों के घोषणा पत्र के आधार पर तीसरे चरण के 26 फीसदी उम्मीदवार दागी हैं। एडीआर ने 205 उम्मीदवारों के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट जारी की, जिनमें 53 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 43 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें भाजपा के 16, माकपा के 5 और टीएमसी के 10 उम्मीदवार शामिल हैं। वहीं, 205 में से कुल 33 उम्मीदवारों ने करोड़पति होने की जानकारी दी है। इनमें टीएमसी के 17, भाजपा के 8 उम्मीदवार शामिल हैं।