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Bengal OBC Quota Stay Revived: हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष, अदालत के फैसले से NEET छात्रों पर क्या असर

Fri, 14 Aug 2026 12:02 AM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, कोलकाता/ नई दिल्ली।
पीटीआई, कोलकाता/ नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 14 Aug 2026 12:02 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में 114 OBC वर्गों पर मिलने वाले आरक्षण पर रोक बहाल कर दी गई है। इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया। अदालत के ताजा फैसले के बाद अब 114 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिले प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। क्या है पूरा मामला?

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West Bengal OBC Quota Stay Revived battle from calcutta High Court to Supreme Court know impact NEET students
कलकत्ता हाईकोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में 114 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणियों पर आरक्षण पर अपनी पिछली रोक को बहाल कर दिया है। यह फैसला पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार की पहल के बाद आया है। दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने का फैसला लिया। ये मामला पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़ा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। अब उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति के OBC-A प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित करते हुए नया आदेश पारित किया है।

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नीट परीक्षा के अभ्यर्थियों पर क्या असर?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में केंद्रीय सूची के तहत OBC होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता और अन्य व्यक्तियों को सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार माना जाना चाहिए। अदालत ने राज्य या संबंधित सक्षम प्राधिकरण को सलाह दी कि वे 2010 से पहले के OBC वर्गों के तहत आने वाले पश्चिम बंगाल के छात्रों के हित में उचित कदम उठाएं। ये छात्र राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि इसे राज्य के लिए कोई विशिष्ट निर्देश नहीं माना जाना चाहिए।
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ओबीसी-ए प्रमाण पत्र अमान्य क्यों?
न्यायमूर्ति राजशेखर मन्था की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 13 अप्रैल, 2026 को OBC-A प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। यह प्रमाण पत्र मई और जून 2025 की अधिसूचनाओं के तहत प्राप्त किया गया था, जो अमान्य हैं। अदालत ने बुधवार को पारित एक आदेश में कहा कि 13 अप्रैल, 2026 का याचिकाकर्ता का प्रमाण पत्र एक शून्य कार्यकारी आदेश के तहत प्राप्त होने के कारण अमान्य है। खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अनुज सिंह भी शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि 8 मई, 2025 से 12 जून, 2025 के बीच राज्य द्वारा जारी सभी OBC प्रमाण पत्र भी अमान्य होंगे। इसके अलावा, 10 जून, 2025 से 18 मई, 2026 के बीच जारी किए गए प्रमाण पत्र भी अमान्य माने जाएंगे।
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आरक्षण और पुराने प्रमाण पत्रों पर कितना असर?
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने मई 2025 और जून 2025 में 77 और 37 वर्गों (कुल 114) को OBC के रूप में मान्यता दी, जो कानूनन सही नहीं था। अब मौजूदा भाजपा सरकार ने 17 जून, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसी अधिसूचनाओं पर रोक लगाने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने संबंधी याचिका वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के 17 जून, 2025 के आदेश पर रोक लगाई थी। मौजूदा राज्य सरकार ने 22 मई, 2024 के मूल निर्णय और आदेश तथा 17 जून, 2025 को नई अधिसूचनाओं पर रोक को चुनौती देने वाली सभी विशेष अनुमति याचिकाएं वापस ले लीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका वापस लेने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट का 20 जुलाई, 2025 को पारित आदेश निष्प्रभावी हो गया। परिणामस्वरूप, उच्च न्यायालय में 17 जून, 2025 को पारित आदेश बहाल हो गया।

उच्च न्यायालय के पिछले फैसले में क्या है
उच्च न्यायालय ने 17 जून, 2025 को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 13 जून की अधिसूचना के माध्यम से OBC-A और OBC-B श्रेणियों के तहत किए गए आरक्षण से संबंधित सभी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी थी। मई 2024 में, उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में 2010 से दिए गए कई वर्गों के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) दर्जे को रद्द कर दिया था। अदालत ने पाया था कि राज्य में सेवाओं और पदों में रिक्तियों के लिए ऐसे आरक्षण अवैध थे। अदालत ने अप्रैल 2010 से सितंबर 2010 के बीच दिए गए आरक्षण के 77 वर्गों को रद्द किया। इसके अलावा, राज्य के 2012 के आरक्षण अधिनियम के आधार पर बनाए गए 37 वर्गों को भी रद्द कर दिया गया। मई 2024 के फैसले में, न्यायमूर्ति तपाब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति राजशेखर मन्था की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था। 2010 से पहले OBC के 66 वर्गों को वर्गीकृत करने वाले राज्य सरकार के कार्यकारी आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया गया था, क्योंकि उन्हें याचिकाओं में चुनौती नहीं दी गई थी।


क्या छात्रों को नया आवेदन करना पड़ेगा?
अदालत ने कहा कि 2010 से पहले मौजूद वर्गों के तहत OBC श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों को OBC प्रमाण पत्र के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा। यह उन 66 वर्गों के लिए लागू होगा जिन्हें उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने मई 2024 में अनुमति दी थी। राज्य सरकार को वर्तमान वर्ष में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी को भी असुविधा से बचाने के लिए विवेक का उपयोग करने की छूट दी गई है। यह सुनिश्चित करना राज्य के विवेक पर निर्भर है कि छात्रों को कोई परेशानी न हो। अदालत ने इस मामले में राज्य को कोई विशेष निर्देश नहीं दिया है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल में आरक्षण नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। छात्रों और संबंधित अधिकारियों को इन परिवर्तनों पर ध्यान देना होगा।

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