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बंगाल की ओबीसी लिस्ट पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जातियों से जुड़ा डाटा, जानें पूरा मामला

Mon, 05 Aug 2024 01:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 05 Aug 2024 01:28 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल में जातियों को सूची में शामिल करने से पहले पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कराए गए सर्वेक्षण, विचार-विमर्श से जुड़ा डेटा मांगा। साथ ही ओबीसी सूची में शामिल जातियों के सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन और नौकरियों में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में मात्रात्मक डेटा मांगा गया है। 

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West Bengal OBC List Issue Supreme Court demands Data Mamata Banerjee Govt. notice to parties Calcutta High Co
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को लेकर नोटिस जारी किए हैं, जिसके तहत उच्च न्यायालय राज्य में कई जातियों का ओबीसी दर्जा खत्म कर दिया था। दरअसल, इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले को बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल में जातियों को सूची में शामिल करने से पहले पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कराए गए सर्वेक्षण, विचार-विमर्श से जुड़ा डेटा मांगा। साथ ही ओबीसी सूची में शामिल जातियों के सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन और नौकरियों में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में मात्रात्मक डेटा मांगा गया है। 
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क्या है मामला?
दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य के आरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने बीते दिन आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने दावा किया कि 2010 के बाद पश्चिम बंगाल में ओबीसी के तहत सूचीबद्ध व्यक्तियों की संख्या पांच लाख से अधिक होने का अनुमान है। मई 2011 तक पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में था और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। 
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हाईकोर्ट के फैसले में खास क्या था?
अब अदालत ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) कानून, 2012 के तहत ओबीसी के तौर पर आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले 37 वर्गों को संबंधित सूची से हटा दिया। अदालत ने इस तरह के वर्गीकरण की सिफारिश करने वाली रिपोर्ट की अवैधता के चलते 77 वर्गों को ओबीसी की सूची से हटाया, अन्य 37 वर्गों को पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग का परामर्श न लेने के कारण हटाया गया। पीठ ने 11 मई 2012 के एक कार्यकारी आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें कई उप-वर्ग बनाए गए थे।
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