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West Bengal: सरकार ने कहा- बढ़ती सांस की बीमारी से निपटने के लिए सुविधा मौजूद, सात बच्चों की हो चुकी मौत
Mon, 06 Mar 2023 08:32 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, कोलकाता
एएनआई, कोलकाता
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 06 Mar 2023 08:32 PM IST
सार
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, यह सामान्य वायरल संक्रमण का समय है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा, पैरा इन्फ्लुएंजा और मेटा नोवा जैसे वायरस पाए जाते हैं। चूंकि इन सभी के लक्षण समान हैं,
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि हाल के वर्षों में तीव्र श्वसन संक्रमण (एआरआई) और एडेनोवायरस के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए राज्य में पर्याप्त बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। 2500 से अधिक सिक नेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) बेड, 654 बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाइयां (एसएनसीयू) तैयार की गई हैं। राज्य में 120 नियो-नेटल केयर यूनिट (एनआईसीयू) बेड तैयार हैं। बीसी रॉय अस्पताल में अतिरिक्त 75 पीआईसीयू बेड भी चालू किए गए हैं। स्थिति के प्रबंधन के लिए बीसी रॉय अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों को तैनात किया गया है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों से मास्क पहनने की अपील की है।
26 बच्चों का चल रहा इलाज
अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों में तीव्र श्वसन बीमारी (एआरआई) से पीड़ित बच्चों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज (एनबीएमसीएच) में विभिन्न जिलों के एआरआई से पीड़ित 26 बच्चों का इलाज चल रहा है, और कुछ को क्रिटिकल केयर यूनिट में भी भर्ती कराया गया है।
सामान्य वायरल संक्रमण का समय
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, यह सामान्य वायरल संक्रमण का समय है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा, पैरा इन्फ्लुएंजा और मेटा नोवा जैसे वायरस पाए जाते हैं। चूंकि इन सभी के लक्षण समान हैं, इसलिए विशेष वायरस को निर्दिष्ट करना कठिन है। एनबीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. संजय मल्लिक ने कहा, वर्तमान में कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या उतनी नहीं है। लेकिन हम कड़ी निगरानी रख रहे हैं। बच्चों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन एडेनोवायरस मामलों की जांच करने की सुविधा नहीं है। क्योंकि यह नियमित पाठ की तरह नहीं है।
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बढ़ती बीमारी से परिजन चिंतित
भर्ती बच्चे के पिता समीर उरांव ने कहा, खांसी, सर्दी और सांस लेने में तकलीफ होने के कारण पिछले आठ दिनों से इलाज करा रहे है। कोलकाता में कई बच्चों की मौत से हम बहुत चिंतित हैं। नेपाल निवासी मोहम्मद नासिर हुसैन ने कहा कि वह अपनी दो महीने की बेटी को संक्रमण से पीड़ित एनबीएमसीएच लेकर आए थे।
H3N2 सांस की बीमारी का प्रमुख कारण
बढ़ते मामलों के बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इन्फ्लुएंजा ए उपप्रकार H3N2 को भारत में बढ़ती सांस की बीमारी का प्रमुख कारण बताया है। आईसीएमआर द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 30 वीआरडीएल में आईसीएमआर/डीएचआर द्वारा पैन रेस्पिरेटरी वायरस सर्विलांस स्थापित किया गया है।
क्या है एडेनोवायरस?
बच्चों में एडेनोवायरस आमतौर पर श्वसन और आंत्र नलिका में संक्रमण का कारण बनता है। चिकित्सकों का कहना है कि दो साल तक के उम्र के बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। दो से पांच साल की उम्र वाले बच्चों को भी संक्रमण का अधिक खतरा होता है। पांच से 10 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें कम उम्र के बच्चों की तुलना में इसका खतरा कम होता है। चिकित्सकों ने कहा कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के इस वायरस से संक्रमित होने का कम खतरा होता है। फिर भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों का घर पर ही इलाज संभव है।
सात बच्चों की हो चुकी है मौत
पश्चिम बंगाल में सांस के संक्रमण से सात बच्चों की मौत हो चुकी है। कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में पांच और बांकुरा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों की मौत हुई थी।
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26 बच्चों का चल रहा इलाज
अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों में तीव्र श्वसन बीमारी (एआरआई) से पीड़ित बच्चों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज (एनबीएमसीएच) में विभिन्न जिलों के एआरआई से पीड़ित 26 बच्चों का इलाज चल रहा है, और कुछ को क्रिटिकल केयर यूनिट में भी भर्ती कराया गया है।
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सामान्य वायरल संक्रमण का समय
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, यह सामान्य वायरल संक्रमण का समय है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा, पैरा इन्फ्लुएंजा और मेटा नोवा जैसे वायरस पाए जाते हैं। चूंकि इन सभी के लक्षण समान हैं, इसलिए विशेष वायरस को निर्दिष्ट करना कठिन है। एनबीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. संजय मल्लिक ने कहा, वर्तमान में कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या उतनी नहीं है। लेकिन हम कड़ी निगरानी रख रहे हैं। बच्चों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन एडेनोवायरस मामलों की जांच करने की सुविधा नहीं है। क्योंकि यह नियमित पाठ की तरह नहीं है।
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बढ़ती बीमारी से परिजन चिंतित
भर्ती बच्चे के पिता समीर उरांव ने कहा, खांसी, सर्दी और सांस लेने में तकलीफ होने के कारण पिछले आठ दिनों से इलाज करा रहे है। कोलकाता में कई बच्चों की मौत से हम बहुत चिंतित हैं। नेपाल निवासी मोहम्मद नासिर हुसैन ने कहा कि वह अपनी दो महीने की बेटी को संक्रमण से पीड़ित एनबीएमसीएच लेकर आए थे।
H3N2 सांस की बीमारी का प्रमुख कारण
बढ़ते मामलों के बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इन्फ्लुएंजा ए उपप्रकार H3N2 को भारत में बढ़ती सांस की बीमारी का प्रमुख कारण बताया है। आईसीएमआर द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 30 वीआरडीएल में आईसीएमआर/डीएचआर द्वारा पैन रेस्पिरेटरी वायरस सर्विलांस स्थापित किया गया है।
क्या है एडेनोवायरस?
बच्चों में एडेनोवायरस आमतौर पर श्वसन और आंत्र नलिका में संक्रमण का कारण बनता है। चिकित्सकों का कहना है कि दो साल तक के उम्र के बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। दो से पांच साल की उम्र वाले बच्चों को भी संक्रमण का अधिक खतरा होता है। पांच से 10 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें कम उम्र के बच्चों की तुलना में इसका खतरा कम होता है। चिकित्सकों ने कहा कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के इस वायरस से संक्रमित होने का कम खतरा होता है। फिर भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों का घर पर ही इलाज संभव है।
सात बच्चों की हो चुकी है मौत
पश्चिम बंगाल में सांस के संक्रमण से सात बच्चों की मौत हो चुकी है। कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में पांच और बांकुरा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों की मौत हुई थी।