बंगाल: दीदी के उम्मीदवारों की सूची देखी, खुद मंथन किया, जानें भाजपा कब खोलेगी अपने सियासी पत्ते!
- भाजपा ने गुरुवार रात उम्मीदवारों के नाम पर मंथन किया
- पार्टी ने अभी तक नामों का खुलासा नहीं किया
- पीएम मोदी की रविवार को होने वाली रैली पर जोर
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आने के साथ ही सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची जाने होने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति ने गुरुवार देर रात तक उम्मीदवारों पर मंथन किया, लेकिन अभी तक नामों का खुलासा नहीं किया है। जानें भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम का खुलासा क्यों नहीं किया...
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 200 पार का नारा दिया है। इस नारे को हकीकत में बदलने के लिए भाजपा को जी तोड़ मेहनत भी करनी पड़ रही है। हालांकि, भाजपा ने इसके लिए बहुत पहले से ही कमर कस ली थी। हर विधानसभा क्षेत्र में देशभर के नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज उतारने के साथ ही पार्टी राजनीतिक व सामाजिक ध्रुवीकरण की भी स्थिति भी बड़े ही बारीकी से देख रही है।
भाजपा का पीएम मोदी की रैली पर जोर
राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। भाजपा ने उम्मीदवारों के नाम देखने के बाद भी अपने सियासी पत्ते नहीं खोले हैं। पार्टी का सारा जोर रविवार को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली पर है, जो चुनावों की घोषणा के बाद विधिवत प्रचार अभियान का आगाज होगा। यह रैली राज्य में भाजपा की परिवर्तन यात्राओं के समापन पर होने जा रही है। इसके बाद भाजपा अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है।
सांसद या मंत्री को मैदान में उतारने पर फैसला नहीं
दिल्ली में गुरुवार को राज्य और केंद्र के नेताओं के बीच उम्मीदवारों को लेकर देर रात तक मंथन हुआ। भाजपा त्रिकोणीय मुकाबले के लिए रणनीति तैयार कर रही है। तृणमूल के साथ सीधे के बजाय त्रिकोणीय मुकाबले में वोटों के बंटवारे में भाजपा अपने लिए लाभ देख रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस-वामपंथी-आईएसएफ गठबंधन को भाजपा कमजोर नहीं मान रही है, बल्कि इसकी मजबूती को अपने लिए अच्छा मान रही है। पार्टी को उम्मीद है कि रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की रैली के बाद माहौल उसके हक में बनना शुरू होगा। चुनावों में कड़ी टक्कर देने के लिए कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी मैदान में उतरने को तैयार हैं। हालांकि, राज्य इकाई ने अभी तक किसी सांसद या मंत्री को चुनाव मैदान में उतारने की सिफारिश नहीं की है। केंद्रीय नेतृत्व चाहे तो रणनीति के मुताबिक किसी सांसदों को टिकट दे सकता है।
मोदी लहर पर दांव खेलेगी भाजपा
बंगाल मे भाजपा के पास फिलहाल कोई मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं है, ऐसे में पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर ही दांव खेलेगी। भाजपा भी नेतृत्व की तुलना में ममता बनर्जी सरकार के साथ केंद्र सरकार को रख रही है। इसके पीछे उसका तर्क है कि पार्टी राज्य में कभी सत्ता में नहीं रही है। ऐसे में वह केंद्र की उपलब्धियों और योजनाओं के साथ राज्य के लिए भविष्य की कार्ययोजना ही रख सकती है। साथ ही बता सकती है कि केंद्र के साथ राज्य में भी सरकार बनने पर किस तरह से डबल इंजन की सरकार काम करेगी।