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पश्चिम बंगाल उपचुनाव: भाजपा के प्रचार में एनसीपीआई करेगी समर्थन, सत्तारुढ़ एनडीए ने गठबंधन से इनकार किया

Tue, 22 Sep 2026 11:21 PM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 22 Sep 2026 11:21 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में NCPI ने भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने का फैसला किया है। हालांकि, भाजपा की राज्य इकाई ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन किसी चुनावी गठबंधन या भविष्य में सीट-साझाकरण का संकेत नहीं है। NCPI के 20 सांसदों पर दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की याचिकाएं लंबित हैं, जिससे यह फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

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West Bengal bypolls NCPI offers to campaign for BJP alliance possibility State politics TMC and others news
बंगाल में विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव होंगे। राष्ट्रवादी सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने का निर्णय लिया है। NCPI ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन किसी चुनावी गठबंधन का संकेत नहीं है। भविष्य में सीट-साझाकरण की व्यवस्था भी नहीं होगी। भाजपा ने NCPI के प्रचार समर्थन को स्वीकार किया है। पर राज्य में उसके साथ किसी चुनावी समझ में प्रवेश से इन्कार किया है।

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NCPI बंगाल की राजनीति में एक नए खिलाड़ी के रूप में उभरी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार हुई थी। इसके बाद 20 तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी। इन सांसदों ने NCPI में शामिल होकर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दिया था। NCPI ने दोनों उपचुनाव सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। NCPI के अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चट्टोपाध्याय ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी ने NDA के साथ अपने तालमेल के तहत भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार करने का फैसला किया है। यह निर्णय NCPI के लिए एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मोड़ पर आया है।

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क्या यह समर्थन चुनावी गठबंधन का संकेत है?

भाजपा के राज्य प्रवक्ता सायंतन बसु ने NCPI के भाजपा के लिए प्रचार करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि NCPI ने भाजपा के लिए प्रचार करने का निर्णय लिया है, यह अच्छी बात है। परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि भाजपा और NCPI के बीच बंगाल में कोई चुनावी गठबंधन होगा। भविष्य में किसी भी प्रकार की सीट-साझाकरण की व्यवस्था भी नहीं होगी। भाजपा इन दोनों सीटों पर अपनी ताकत पर चुनाव लड़ने को लेकर आश्वस्त है। NCPI का भाजपा तक पहुंचना एक अनुत्तरित प्रश्न के बीच आया है। यह प्रश्न है कि क्या केंद्र की NDA व्यवस्था बंगाल में चुनावी साझेदारी में बदलेगी। भाजपा की बंगाल इकाई का संदेश स्पष्ट है। NCPI का समर्थन अभियान के दौरान स्वागत योग्य हो सकता है। लेकिन पार्टी बदले में कोई राजनीतिक या चुनावी जगह नहीं दे रही है।

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नगर निकाय चुनावों पर क्या है भाजपा का रुख?

यह मुद्दा आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले भी उठा था। NCPI के नेताओं ने संकेत दिया था कि पार्टी भाजपा के साथ मिलकर नगर निकाय चुनाव लड़ सकती है। इनमें कुछ पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद भी शामिल थे। हालांकि, राज्य भाजपा ने लगातार संकेत दिया है कि वह अकेले चुनाव लड़ेगी। ये नगर निकाय चुनाव इस साल दिसंबर में होने की संभावना है। राज्य भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी नगर निकाय चुनाव अपनी ताकत पर लड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कोई व्यवस्था स्वचालित रूप से बंगाल में चुनावी तालमेल में नहीं बदल जाती। नवीनतम उपचुनाव की यह समझ राज्य में एक औपचारिक राजनीतिक साझेदारी के बजाय एक संकीर्ण सामरिक व्यवस्था प्रतीत होती है। भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है। वह इस समर्थन को केवल एक अभियान तक सीमित रखना चाहती है।

NCPI सांसदों की अयोग्यता का मामला क्या है?

NCPI के लिए यह समय राजनीतिक रूप से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 20 सांसदों ने जून में तृणमूल कांग्रेस की विधानसभा चुनावों में हार के बाद पार्टी छोड़ दी थी। वे NCPI में शामिल हो गए थे। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दिया था। इस कदम ने लोकसभा में उनकी स्थिति को लेकर एक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई छेड़ दी थी। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दलबदल कानून के तहत उनकी अयोग्यता की मांग की थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों को 26 अगस्त को प्रारंभिक नोटिस जारी किए थे। उन्होंने उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था। यह मामला NCPI के राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। सांसदों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से और समय क्यों मांगा?

सांसदों ने तब तीन सप्ताह का समय मांगा था। 3 सितंबर को बिरला ने उन्हें 22 सितंबर तक का समय दिया था। उन्होंने विस्तार की मांग की थी। उस समय सीमा के मंगलवार को समाप्त होने के साथ, NCPI के सांसदों ने अब जवाब देने के लिए और चार सप्ताह का समय मांगा है। यह जानकारी पार्टी सूत्रों के अनुसार है। सांसदों को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता ने NDA के भीतर उनके भविष्य के बारे में भी अटकलों को हवा दी है। इस महीने की शुरुआत में, बागी तृणमूल कांग्रेस सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था। उन्होंने कहा था कि 20 NCPI सांसदों में से 17 दुर्गा पूजा के आसपास भाजपा में शामिल हो जाएंगे। इस दावे को साथी बागी सांसदों और बंगाल भाजपा ने खारिज कर दिया था। नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने का NCPI का निर्णय, भाजपा की बंगाल इकाई के साथ औपचारिक चुनावी व्यवस्था किए बिना NDA के साथ अपने तालमेल को प्रदर्शित करने का अवसर देता है। यह घटनाक्रम 6 अक्तूबर के दोनों उपचुनावों से जुड़ी जटिल राजनीति को भी रेखांकित करता है।

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