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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: बांग्ला भाषी लोगों के सहारे कोलकाता फतह की तैयारी में भाजपा 

Sun, 28 Jun 2020 02:42 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: आसिम खान Updated Sun, 28 Jun 2020 02:42 PM IST
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West Bengal Assembly Elections: BJP want to win Kolkata with the help of Bengali speaking leaders
सांकेतिक तस्वीर

पिछले साल संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस को करारा आघात दिया था। हालांकि राज्य के दूसरे हिस्सों में शानदार प्रदर्शन के बावजूद राजधानी कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। यहां उत्तर से लेकर दक्षिण तक सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में ही मतदान हुए थे। अब एक साल बाद विधानसभा चुनाव है और भाजपा राज्य की सत्ता पर आरूढ़ होने की रणनीति के साथ कमर कस चुकी है। लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में कोलकाता में खराब प्रदर्शन ना हो इसलिए पार्टी ने विशेष रणनीति अपनाई है।

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 अब तक ऐसा होता रहा है कोलकाता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सांगठनिक फिर बाहर की जिम्मेदारी हिंदी भाषी नेताओं के हाथों सौंपी जाती रही थी लेकिन अब बांग्ला भाषी लोगों को पार्टी का चेहरा बनाया जा रहा है। जिस तरह बिहार में राजनीति के आधार पर लामबंदी होती रही है। उसी तरह से पश्चिम बंगाल में भी भाषा ही भावनात्मक जुड़ाव हमेशा से रहा है। इसलिए पार्टी ने कोलकाता के प्रमुख सांगठनिक जिलों में चेहरा बदला है। 
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दो जिलों के अध्यक्षों को बदल दिया गया है, नॉर्थ कोलकाता की जिम्मेदारी हिंदी भाषी दिनेश पांडे के हाथ में थी। लेकिन अब उन्हें हटाकर शिवाजी सिंह राय को नॉर्थ कोलकाता का अध्यक्ष बनाया गया है। करीब एक साल पहले शिवाजी सिंह रॉय ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। लेकिन पांच महीने पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का भी साथ छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। उनको उत्तर कोलकाता भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। 
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माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में रहने वाले बांग्ला भाषी लोगों के बीच पार्टी की पैठ बनेगी। इसी तरह से दक्षिण कोलकाता में भी बदलाव किया गया है। यहां मोहनराव को हटाकर सोमनाथ बनर्जी को दक्षिण कोलकाता जिला अध्यक्ष बनाया गया है। सोमनाथ बनर्जी पहले से ही साउथ सबर्बन के अध्यक्ष हैं। अब उन्हें साउथ कोलकाता की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। दरअसल, मोहनराव बांग्ला भाषी नहीं है और सेवानिवृत्त सैनिक हैं। 

हाल ही में जब सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक सब्यसाची दत्त ने भाजपा की सदस्यता ली थी तब से लेकर दत्त के साथ राव के संपर्क अच्छे नहीं रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें हटाए जाने के पीछे यह भी एक वजह है। अब जबकि सोमनाथ बनर्जी को दक्षिण कोलकाता की जिम्मेदारी दी गई है तो माना जा रहा है कि क्षेत्र में भी रहने वाले बांग्ला भाषी लोगों तक पहुंचने में भाजपा को सुविधा होगी।

तृणमूल छोड़ आए नेताओं को प्राथमिकता
हालांकि, अंदर खाने इस तरह की भी चर्चा है कि इस बदलाव से हिंदी भाषी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। वह भी तब जब केवल उन लोगों को जिम्मेदारी दी जा रही है जो दूसरी पार्टियों को छोड़कर भाजपा में आए थे। पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर बांग्ला भाषी लोगों को ही जिम्मेवारी दी जानी थी तो कई सारे भाजपा के पुराने और दिग्गज नेता थे। 


जिन्हें अध्यक्ष बनाया जा सकता था। लेकिन जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस और अन्य पार्टियों से आए हुए लोगों को जिम्मेदारी दी जा रही है। उससे ऐसा लगता है कि जैसे पार्टी की बागडोर से तृणमूल के संगिदों के हाथों में ही जा रही है।

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