फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   West Bengal assembly election How Mamata Banerjee emerged in 2011 and demolished 34 year uninterrupted rule of the Left Front

2011 में ममता बनर्जी ने कैसे ढहाया था बंगाल में वामपंथियों का 34 साल पुराना किला?

Sun, 28 Feb 2021 08:27 PM IST
अंशुल तलमले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अंशुल तलमले Updated Sun, 28 Feb 2021 08:27 PM IST
सार

किसी वक्त जयप्रकाश नारायण की कार के बोनट पर कूदकर सुर्खियों में आईं युवा ममता ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि वह एक दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनेंगी। स्कूली दिनों से ही राजनीति में दिलचस्पी रखने वाली दीदी को 70 के दशक में पहली बार राज्य महिला कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। तब वे कॉलेज में ही पढ़ रहीं थीं।

विज्ञापन
West Bengal assembly election How Mamata Banerjee emerged in 2011 and demolished 34 year uninterrupted rule of the Left Front
ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

2011 के चुनावों में वामपंथियों का 34 साल पुराना किला ढहा। तब 294 में से 185 सीटों के साथ पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांगेस की सरकार आई। ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। राज्यपाल एमके नारायणन ने जब शपथ दिलाई तो ममता राज्य की सातवीं और पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।

विज्ञापन


1977 से वामपंथी संगठनों का गढ़ बन चुके पश्चिम बंगाल से कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकना ममता के लिए इतना आसान भी नहीं था, लेकिन जमीन पर मेहनत ने दीदी को सड़क से सत्ता तक पहुंचा दिया। सफेद साड़ी और हवाई चप्पल पहनने वाली इस तेजतर्रार महिला नेत्री ने सरकार के खिलाफ रोष को बखूबी भुनाया। हालांकि समय के साथ खुद को न बदलना भी वाम मोर्चों के खिलाफ गया, क्योंकि जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ पूरी तरह ढीली पड़ चुकी थी।

विज्ञापन

तब नंदीग्राम आंदोलन बना सरकार उखाड़ने का हथियार

किसी वक्त जयप्रकाश नारायण की कार के बोनट पर कूदकर सुर्खियों में आईं युवा ममता ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि वह एक दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनेंगी। स्कूली दिनों से ही राजनीति में दिलचस्पी रखने वाली दीदी को 70 के दशक में पहली बार राज्य महिला कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। तब वे कॉलेज में ही पढ़ रहीं थीं।

गरीबी से संघर्ष करना उन्होंने बचपन में ही सीख लिया था। लगातार कई चुनाव जीतने और केंद्र में कई मंत्रालय संभालने के बाद मतभेद के चलते 1997 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाई। 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार ने पूर्वी मिदनापुर जिले के गांव नंदीग्राम में किसानों की जमीन का अधिगृहण किया था। 'स्पेशल इकनॉमिक जोन' नीति के तहत यहां एक केमिकल हब की स्थापना होनी थी।

विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और जमीन पर उतरकर विरोध दर्ज करवाया। फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ, जिसका ममता बनर्जी ने सामने से नेतृत्व किया। आंदोलन में कई ग्रामीणों की जान गईं। सैकड़ों लोग घायल हुए। चुनाव में यह सरकार के खिलाफ गया और नंदीग्राम आंदोलन के दम पर ही ममता बनर्जी ने लेफ्ट को उखाड़ फेंकने में सफलता पाई।

मां, माटी मानुष का दिया नारा

सिर्फ पोशाक और रहन-सहन को देखकर ही ममता बनर्जी को जमीन से जुड़ा नेता नहीं कहा जाता। आंदोलन उनकी राजनीति का सबसे बड़ा आभूषण है। नंदीग्राम के साथ-साथ सिंगूर आंदोलन ने भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका अदा की थी। तब यहां की 400 एकड़ जमीन पर टाटा कंपनी का नैनो कार प्लांट बनना था।

ममता ने यहां भी भूमि अधिग्रहण का पुरजोर विरोध किया। वह गरीब किसानों के साथ अंत तक लड़तीं रहीं। चुनाव में भारी बहुमत से चुने जाने के बाद ममता बनर्जी ने जब 2011 में सूबे की सत्ता संभाली तो उनकी सरकार का पहला फैसला सिंगूर के किसानों की जमीन लौटाना था। शहरी आबादी भले ही ममता से छिटकी हो, लेकिन बंगाल के गांवों में टीएमसी का बड़ा वोट बैंक निवास करता है।

इन दो आंदोलनों ने ममता बनर्जी की छवि किसान हितैषी नेता की बना दी, जिसे मौजूदा हालात में भी दीदी भुनाने में लगी हुई है। दिल्ली की सीमाओं पर कई माह से आंदोलन पर बैठे किसानों को समर्थन देने के बहाने दीदी केंद्र की बीजेपी सरकार पर बरसना नहीं भूलतीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed