बुरा फंसा ऑस्ट्रेलिया: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच चीन ने जेट फ्यूल निर्यात रोका, हवाई यात्रा पर मंडराया संकट
चीन ने ऑस्ट्रेलिया को सप्लाई होने वाला जेट फ्यूल रोक दिया है। दूसरी ओर पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति भी अस्थिर है। चीन के इस कदम से ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वो खुद जेट फ्यूल नहीं बनाता और चीन से बड़े पैमाने पर ईंधन आयात करता है।
विस्तार
ऑस्ट्रेलिया में तरल ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है। इसकी वजह चीन की तरफ से तेल रिफाइनरी को सभी ईंधन निर्यात रोकने का आदेश देना है। साथ ही, ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति भी अनिश्चित बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी रिफाइनरी को सभी ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने के लिए कहा है। इससे ऑस्ट्रेलिया के लिए आने वाले कम से कम दो जहाजों पर असर पड़ सकता है।
साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो परिवहन जहाज भी नष्ट हो गए हैं। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग में आने वाले जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। बता दें कि एशियाई देश जैसे चीन से ऑस्ट्रेलिया अपने तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऑस्ट्रेलिया खुद जेट फ्यूल बनाने की क्षमता नहीं रखता।
ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से जेट फ्यूल पर निर्भर
सिडनी एयरपोर्ट के सीईओ स्कॉट चार्लटन के अनुसार ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से जेट फ्यूल आयात पर निर्भर है। 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने जेट फ्यूल का लगभग 32% चीन से आयात किया। अगर चीन निर्यात बंद रखता है, तो ऑस्ट्रेलिया को दूसरे देशों जैसे दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर, मलेशिया और भारत से ईंधन मंगवाना पड़ेगा। लेकिन इन देशों को भी पश्चिम एशिया के संघर्ष से असर हो रहा है। इसके चलते इन देशों के पास भी आपूर्ति पर संकट देखने को मिल रहा है।
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अब समझिए स्टॉकपाइल की स्थिति?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया के पास जेट फ्यूल का स्टॉक कम है। मार्च 2026 तक देश में लगभग 29-32 दिनों का जेट फ्यूल स्टॉक मौजूद है, यानी लगभग 802 मिलियन लीटर। ये ईंधन या तो ऑनशोर स्टोरेज में है या ऑस्ट्रेलिया के समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आईईए के 90 दिन के स्टॉकपाइल नियम का पालन नहीं करता, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मदद देने में असमर्थ है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने सबसे बड़े आपातकालीन तेल स्टॉक को जारी किया है, जो कि 400 मिलियन बैरल बताया गया। यह 2022 में यूक्रेन संकट के समय जारी 182 मिलियन बैरल से दोगुना है।
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ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों पर असर
गौरतलब है कि इस प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर ऑस्ट्रेलिया के विमानों पर देखने को मिल सकता है। कारण है कि ऑस्ट्रेलियाई हवाई अड्डे जेट फ्यूल लगातार आने पर काम करते हैं। उनके पास केवल कुछ सप्ताहों का ईंधन स्टॉक होता है। ऐसे में अगर जेट फ्यूल की आपूर्ति बंद हो गई, तो-
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हवाई अड्डे अपने स्टॉक का सहारा लेंगे।
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जल्दी ही ईंधन खत्म हो जाएगा।
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आपातकालीन और सैन्य उड़ानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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व्यावसायिक उड़ानों में कटौती और रेशनिंग हो सकती है।
हालांकि क्वांटस ने पहले ही कहा है कि उन्हें फ्लाइट की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, लेकिन अभी उड़ानें रद्द नहीं हुई हैं। वहीं एयर न्यूजीलैंड ने ईंधन की कीमत और आपूर्ति की वजह से 1,100 उड़ानों को काट दिया है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि आने वाले हफ्तों में उड़ानों में कटौती, रद्द या रेशनिंग की संभावना बढ़ सकती है।
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