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शोध: बढ़ते ओजोन स्तर से युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा, मौसम में बदलाव से दुनियाभर में बढ़ेगा प्रदूषण

Fri, 14 Mar 2025 05:06 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 14 Mar 2025 05:06 AM IST
सार

जियोहेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आबादी की उम्र बढ़ने के कारण भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों में और वृद्धि हो सकती है।

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weather changes increase pollution across world by creating environment conducive to ozone formation
हार्ट अटैक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मौसम में हो रहा बदलाव ओजोन निर्माण के अनुकूल वातावरण बनाकर दुनियाभर में प्रदूषण बढ़ाएगा। ओजोन के बढ़ते स्तर से हृदय रोगों की संभावना बढ़ती है। इससे युवाओं में हृदयाघात (हार्ट अटैक) का खतरा बढ़ रहा है। जियोहेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आबादी की उम्र बढ़ने के कारण भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों में और वृद्धि हो सकती है।

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शोध के अनुसार ओजोन एक गैस है, जो फोटोकैमिकल स्मॉग का मुख्य घटक है। यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करने वाली ओजोन परत से अलग है। ओजोन प्रदूषण तब उत्पन्न होता है, जब अन्य प्रदूषक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आकर रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं। ये प्रदूषक मुख्य रूप से वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और नाइट्रोजन ऑक्साइड होते हैं, जो वाहनों, बिजली संयंत्रों, औद्योगिक बॉयलरों, रिफाइनरियों, रासायनिक संयंत्रों और जीवाश्म ईंधन जलाने से उत्सर्जित होते हैं। हालांकि, हृदयाघात के खतरे पर वायु प्रदूषण के प्रभाव विभिन्न कारकों जैसे जनसंख्या संरचना, प्रदूषण के प्रकार और हार्ट अटैक की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
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जिन मरीजों पर अध्ययन  उनमें 70 फीसदी महिलाएं
अमेरिका में किए गए इस अध्ययन में 18 से 55 वर्ष की आयु के 2,322 मरीजों के हार्ट अटैक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें लगभग 70 फीसदी महिलाएं थीं, जिन्हें पिछले शोधों में विशेष महत्व नहीं दिया गया था। शोधकर्ताओं ने मरीजों के निवास स्थान के आसपास के ओजोन और  पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे सूक्ष्म कण) के स्तर की तुलना हार्ट अटैक की घटनाओं से की। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के हार्ट अटैक का विश्लेषण किया गया।
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भारी ओजोन स्तर दिल के लिए खतरनाक
शोध में पाया गया कि ओजोन का उच्च स्तर चार से पांच दिन बाद हार्ट अटैक की घटनाओं में वृद्धि से जुड़ा हुआ था, हालांकि पीएम 2.5 का इससे कोई संबंध नहीं मिला। हालांकि कम रक्तचाप जैसी स्थितियों के चलते ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने और बिना सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (एसटीईएमआई) मामलों में ओजोन का प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखा गया। एसटीईएमआई हार्ट अटैक के साथ ओजोन का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया गया। एसटीईएमआई यानी विडोमेकर हार्ट अटैक दिल का गंभीर दौरा होता है, जो पूरी तरह से अवरुद्ध कोरोनरी धमनी के कारण होता है और हृदय के निचले कक्षों में विद्युत प्रवाह को प्रभावित करता है।


अश्वेत रोगियों में प्रभाव अधिक पाया गया
शोधकर्ताओं के अनुसार, गैर-हिस्पैनिक अश्वेत रोगियों में ओजोन के उच्च स्तर और हार्ट अटैक के बीच अधिक मजबूत संबंध पाया गया। जबकि हिस्पैनिक-गैर-अश्वेत गोरों में यह प्रभाव अपेक्षाकृत कम था। आश्चर्यजनक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से तय सीमा से कम ओजोन स्तर के बावजूद, हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों से इसका संबंध स्पष्ट रूप से देखा गया। गर्म महीनों की तुलना में ठंडे महीनों में ओजोन के स्तर और हार्ट अटैक के बीच संबंध अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया।

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