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Wayanad Landslide: 'मैंने अपनी बहन के घर को उनके साथ बहते देखा', वायनाड में जिंदा बचे लोगों ने खौफनाक आपबीती
Thu, 01 Aug 2024 08:24 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वायनाड (केरल)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वायनाड (केरल)
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 01 Aug 2024 08:24 PM IST
सार
Wayanad Landslide: केरल वायनाड में भूस्खलन की घटनाओं में 25 बच्चों और 70 महिलाओं सहित 177 लोगों की मौत हो चुकी हैं। मलबे में दबे हुए लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं। वहीं, भूस्खलन की घटनाओं में बचे हुए लोगों के अपने खौफनाक अनुभवों को साझा किया है।
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वायनाड में भूस्खलन
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल के वायनाड जिले में दो दिन पहले हुई भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 177 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि करीब 200 घायल हुए हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान अब भी जारी है। इसलिए यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। जिला प्रशासन ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
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भूस्खलन की घटना में मारे गए 177 लोगों में 25 बच्चे और 70 महिलाएं शामिल हैं। बचे हुए लोगों के अपने खौफनाक अनुभवों को साझा किया है। मेप्पडी के राहत शिविर में मीडिया से बात करते हुए एक बुजुर्ग महिला सुजाता ने बताया कि कैसे उन्होंने और उनके पोते ने एक जंगली हाथी के बगल में रात बिताई और जानवर से सुरक्षित रहे। उन्होंने बताया कि उनके पास जो कुछ था, वह सब भूस्खलन में नष्ट हो गया।
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चाय के बागान में काम करने वाली सुजाता बताती हैं, "हम मुश्किल से अपने घर से निकलकर बच पाए। हम जंगल के किनारे एक पहाड़ी पर भागे तो हमें अहसास हुआ कि हम एक जंगली हाथी के बगल में खड़े हैं।" उन्होंने बताया कि उन्होंने जंगली हाथी से वैसे ही बात की जैसे वह एक इंसान से करती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने उससे (हाथी) कहा कि हमने सब कुछ खो दिया है और वह हम पर हमला न करे। हमने पूरी रात उसके बगल में बिताई।"
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भूस्खलन में बचे अन्य लोगों में सिराजुद्दीन और उनका परिवार भी है। जो अपनी आजीविका चलाने के लिए एक ऑटोरिक्शा चलाते थे। लेकिन भूस्खलन के दिन बड़े आकार के पत्थरों ने उनके घर को ढहा दिया और उनके ऑटोरिक्शा को दबा दिया।
सिराजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने मंगलवार सुबह तेज आवाज और पानी की आवाज सुनी। उन्होंने अपने घर में मलबे के साथ पानी घुसते देखा, तो वे किसी तरह अपने घर के पीछे ऊंची जमीन पर चले गए। उन्होंने बताया, "हमने विशाल पत्थरों और पेड़ों को हमारे पास मौजूद हर चीज को कुचलते देखा। हमारा ऑटोरिक्शा पूरी तरह नष्ट हो गया है।" सिराजुद्दीन ने बताया कि भूस्खलन से पहले उन्होंने अपने घर को हिलते हुए महसूस किया और हवा से उखड़ी हुई वनस्पतियो की मिट्टी की गंध महसूस की।
चूरावाला से ताल्लुक रखने वाले और सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले गणेश सोमवार देर रात घर आए थे। उन्होंने कहा, जैसे ही मैं घर पहुंचा, मैंने गंदा पानी देखा और सो रही अपनी पत्नी को जगाया। मैंने एक सेकंड भी बर्बाद नहीं किया और घर छोड़ा और पास की पहाड़ी की चोटी पर चले गए।
लेकिन, उन्होंने अपनी बहन, उनके पति, उनकी बहन के बेटे और बहू के साथ-साथ उनकी बहन के पोते को खो दिया। खौफनाक घटना के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, जैसे ही पानी बढ़ता गया, हम पहाड़ी चोटी की ओर भागे। हमने अपनी बहन का घर पहले भूस्खलन से ढहते हुए देखा। दूसरे भूस्खलन ने मेरा घर छीन लिया। संयोग से उनके बच्चे मनंथवाडी में एक रिश्तेदार के घर पर थे।
कुछ बचे हुए लोक अपने लापता प्रियजनों की तलाश में हैं। एक पिता को अपनी 14 साल की बेटी को पहचानने के लिए मदद के लिए रोते हुए देखा गया। रोते हुए उन्होंने कहा, मेरी सबसे छोटी बेटी गायब है। जब तक मैं उसे पहचान नहीं लेता, मुझे भरोसा नहीं होगा कि वह चली गई। मैं समझूंगा कि वह आगे की पढ़ाई के लिए कहीं दूर गई है। उनकी बेटी अनामिका नौवीं कक्षा में पढ़ती हैं। भूस्खलन के दिन वह अपनी दादी के साथ रह रहीं थीं। जो पास में ही रहती थीं। भूस्खलन की आवाज सुनकर पिता घर से बाहर आए, लेकिन उनकी मां और बेटी के साथ घर बह चुका था।
मैसूर के रहने वाले दो भाई माधवन और नंजुंदन अपनी बहन और बहनोई को ढूंढने के लिए मेप्पडी आए हैं, जो वहां एक चाय के बागान में काम कर रहे थे। नंजुदन ने मीडिया को बताया, हमने उन्हें बारिश खत्म होने तक एक हफ्ते के लिए हमारे साथ रहने के लिए कहा था। लेकिन वे नहीं आए। भूस्खलन से दो दिन पहले मेरे बड़े भाई माधवन उन्हें एक सप्ताह के लिए मैसूर ले जाने के लिए यहां आए थे।