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Supreme Court: दिल्ली जल संकट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हिमाचल को 137 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ने का आदेश
Thu, 06 Jun 2024 11:53 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 06 Jun 2024 11:53 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में पेयजल की गंभीर कमी फिलहाल सबसे बड़ा संकट है। इस पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश को 7 जून को दिल्ली के लिए 137 क्यूसेक अतिरिक्त जल छोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही, हरियाणा से कहा कि वह दिल्ली तक पानी का सुगम प्रवाह सुनिश्चित करे। इसमें कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। बता दें कि एक क्यूसेक प्रति सेकंड 28.317 लीटर जल प्रवाह के बराबर होता है।
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जस्टिस प्रशांतकुमार मिश्रा व जस्टिस केवी विश्वनाथन की अवकाश पीठ ने कहा, चूंकि हिमाचल को उपलब्ध अतिरिक्त पानी छोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है, हम निर्देश देते हैं कि वह 137 क्यूसेक पानी ऊपर से छोड़े, ताकि पानी हथिनीकुंड बैराज पहुंचे और वजीराबाद के रास्ते दिल्ली को मिले। पीठ ने तत्काल आवश्यकता का ध्यान रखते हुए हिमाचल प्रदेश को निर्देश दिया कि वह हरियाणा को पूर्व सूचना के साथ सात जून से ही पानी छोड़े। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवाईआरबी) हथिनीकुंड में आने वाले अतिरिक्त पानी को मापेगा, ताकि इसे दिल्लीवासियों को पीने के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
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दिल्ली सरकार सुनिश्चित करे, पानी की बर्बादी न हो
पीठ ने दिल्ली सरकार को पानी की बर्बादी न होने देने का निर्देश दिया। पीठ ने दिल्ली सरकार, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश सहित प्रतिवादी को सोमवार तक अनुपालन हलफनामा व स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। अगली सुनवाई 10 जून को होगी। पीठ ने इससे पहले 5 जून को बोर्ड को सभी हितधारक राज्यों के साथ बैठक का निर्देश दिया था।
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कल हमारे पास कोई शिकायत न आए
पीठ ने कहा, हमें नहीं पता कि राजनीति कौन कर रहा है, पर कल यह शिकायत नहीं होनी चाहिए कि हिमाचल पानी दे रहा है, लेकिन हरियाणा नहीं छोड़ रहा है। कोर्ट ने हरियाणा को नहरों के माध्यम से पानी के प्रवाह को रास्ता देने का निर्देश दिया।
हिमाचल के पास उपलब्ध जल का कोई रिकॉर्ड नहीं
हरियाणा सरकार के वकील ने दलील दी, हिमाचल में अधिशेष जल की उपलब्धता का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हथिनीकुंड बैराज से अतिरिक्त जल की आपूर्ति को मापने के लिए कोई तंत्र नहीं है। इस पर दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, पानी की आवश्यकता आपातकालीन और एक बार के उपाय के रूप में है। हिमाचल प्रदेश विनम्रता और शालीनता दिखा रहा है।
हिमाचल सरकार को कोई आपत्ति नहीं
हिमाचल प्रदेश सरकार दिल्ली को नियमित तौर पर पानी उपलब्ध करा रही है। पानी देने को लेकर सरकार को आपत्ति नहीं है। जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 में हिमाचल सरकार का दिल्ली के साथ एमओयू हुआ था। इसके तहत पानी दिया जा रहा है।
पश्चिमी यमुना नहर से दिल्ली पहुंचेगा पानी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिमाचल का अतिरिक्त पानी हथिनीकुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा के रास्ते दिल्ली पहुंचेगा। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सतबीर कादियान ने बताया कि पानी के प्रवाह में कोई रुकावट नहीं आएगी। हालांकि इसकी तकनीकी निगरानी ऊपरी यमुना नदी बोर्ड करेगा। यह पानी जून महीने तक दिल्ली के लिए उपलब्ध रहेगा।