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Water Crisis: बारिश के बावजूद नहीं भर रहे जलाशय, 166 बड़े बांधों में क्षमता का सिर्फ 26 फीसदी पानी
Sun, 05 Jul 2026 04:23 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 05 Jul 2026 04:23 AM IST
सार
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय होने और कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के बावजूद बड़े जलाशयों में पर्याप्त जल संचय नहीं हो सका है। केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 166 प्रमुख बांधों में कुल क्षमता का केवल 26 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। वर्षा का असमान वितरण इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है। कई राज्यों में जल भंडारण पिछले दशक के औसत से कम दर्ज किया गया है।
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क्यों बढ़ी चिंता?
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
देश में मानसून लगभग पूरे भारत में सक्रिय है और कई राज्यों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, लेकिन इसके उलट देश के बड़े जलाशयों की तस्वीर गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बारिश का भौगोलिक वितरण बेहद असमान रहने के कारण जलाशय अपेक्षित गति से नहीं भर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप देश के 166 प्रमुख बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 26 प्रतिशत पानी मौजूद है, जबकि लगभग दो-तिहाई जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
मानसून को लेकर क्या बोले विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ सप्ताह में जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ खेती, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर कई राज्यों में पड़ सकता है।
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दक्षिण और पूर्वी भारत सबसे अधिक प्रभावित
जलाशयों के स्तर का राज्यवार विश्लेषण भी चिंता बढ़ाने वाला है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 13 राज्यों में जल भंडारण पिछले दस वर्षों के औसत से कम है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। सबसे अधिक दबाव दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना पर दिखाई दे रहा है, जहां कई जलाशयों का स्तर सामान्य से 16 से 46 प्रतिशत तक नीचे है।
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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बारिश का भौगोलिक वितरण बेहद असमान रहने के कारण जलाशय अपेक्षित गति से नहीं भर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप देश के 166 प्रमुख बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 26 प्रतिशत पानी मौजूद है, जबकि लगभग दो-तिहाई जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
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मानसून को लेकर क्या बोले विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ सप्ताह में जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ खेती, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर कई राज्यों में पड़ सकता है।
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दक्षिण और पूर्वी भारत सबसे अधिक प्रभावित
जलाशयों के स्तर का राज्यवार विश्लेषण भी चिंता बढ़ाने वाला है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 13 राज्यों में जल भंडारण पिछले दस वर्षों के औसत से कम है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। सबसे अधिक दबाव दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना पर दिखाई दे रहा है, जहां कई जलाशयों का स्तर सामान्य से 16 से 46 प्रतिशत तक नीचे है।