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CJI: 'कमर दर्द के कारण बदली कुर्सी तो सोशल मीडिया पर हुआ ट्रोल'; तनाव प्रबंधन पर बोले सीजेआई चंद्रचूड़

Sat, 23 Mar 2024 07:15 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: आदर्श शर्मा Updated Sat, 23 Mar 2024 07:15 PM IST
सार

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि एक सुनवाई के दौरान कमर दर्द के कारण कुर्सी पर बैठने पर असहज महसूस कर रहा था, जिसके कारण मैंने अपनी स्थिति बदली। इसके बाद सोशल मीडिया पर मुझे ट्रोल किया गया। 

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'Was trolled for changing seating position', Chief Justice of India while highlighting stress management
सीजेआई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघ द्वारा आयोजित 'भविष्यवादी न्यायपालिका के लिए समानता और उत्कृष्टता' शीर्षक से न्यायिक अधिकारियों के 21वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने असुविधा के कारण सुनवाई के दौरान अपने बैठने की स्थिति को बदलने के बाद ट्रोलिंग का सामना करने की एक हालिया घटना को याद किया।
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'तनाव प्रबंधन की क्षमता एक न्यायाधीश के जीवन में महत्वपूर्ण'
कार्य-जीवन संतुलन और तनाव प्रबंधन पर बोलते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि तनाव प्रबंधन की क्षमता एक न्यायाधीश के जीवन में महत्वपूर्ण है, खासकर जिला न्यायाधीशों के लिए। न्यायिक अधिकारियों के रूप में वे नियमित रूप से कमजोर वादियों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा, अदालतों में आने वाले बहुत से लोग अपने साथ हुए अन्याय को लेकर तनाव में रहते हैं।
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कई बार सीमा लांघी जाती है- चंद्रचूड़
न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि कभी-कभी न्यायाधीश के रूप में हमारे साथ व्यवहार में वे सीमा लांघ जाते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में मैंने बहुत से वकीलों और वादियों को देखा है, जब वे अदालत में हमसे बात करते समय सीमा लांघते हैं। कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने न्यायिक अधिकारियों को सलाह दी। उन्होंने कहा कि आपकी ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी है, जिसके लिए शांत और दयालु दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखना इन कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अभिन्न अंग है। 
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'दूसरों को ठीक करने से पहले खुद को ठीक करना होगा'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि तनाव को प्रबंधित करने और कार्य-जीवन में संतुलन हासिल करने की क्षमता अलग नहीं है, बल्कि पूरी तरह से न्याय देने के साथ जुड़ी हुई है। दूसरों को ठीक करने से पहले, आपको सीखना चाहिए कि खुद को कैसे ठीक किया जाए। वही न्यायाधीशों के बारे में भी यह सच है।


मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने साधा किया पुराना किस्सा
चंद्रचूड़ ने कहा कि अभी चार या पांच दिन पहले जब मैं एक मामले की सुनवाई कर रहा था, मेरी पीठ में थोड़ा दर्द था, इसलिए मैंने अदालत में अपनी कोहनियां अपनी कुर्सी पर रख लीं और कुर्सी पर अपनी स्थिति बदल ली। लेकिन इसको लेकर सोशल मीडिया में कई टिप्पणियां की गई। जिसमें कहा गया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश इतने अहंकारी है कि वह अदालत में एक महत्वपूर्ण बहस के बीच में ही उठ गए।
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