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Food Packs: पैकेज्ड फूड पर चेतावनी जरूरी! क्या स्टार रेटिंग बढ़ाएगी भ्रम? विशेषज्ञों ने उठाए गंभीर सवाल
Tue, 02 Dec 2025 05:26 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 02 Dec 2025 05:26 AM IST
सार
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल से प्रोसेस्ड फूड उद्योग को फायदा मिलेगा, जबकि उपभोक्ता वास्तविक जोखिम समझ नहीं पाएंगे। स्वास्थ्य समूहों के अनुसार फ्रंट-ऑव-पैक चेतावनी लेबल उपभोक्ता तक सही संदेश पहुंचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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पैकेज्ड फूड
- फोटो : freepik
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विस्तार
भारत में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर लेबलिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों, पोषण वैज्ञानिकों और उपभोक्ता अधिकार समूहों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित विकल्प चुनने में मदद करने के लिए पैक्ड फूड पर स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य किए जाने चाहिए। लेकिन खाद्य उद्योग का झुकाव स्टार रेटिंग मॉडल की ओर दिखाई दे रहा है। इसे विशेषज्ञ उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा करने वाला बता रहे हैं।
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न्यूट्रीशन एडवोकेसी इन पब्लिक इंटरेस्ट (एनएपीआई) और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार स्टार रेटिंग किसी खाद्य उत्पाद के पोषण का औसत निकालती है न कि जोखिम कारकों को सामने लाती है। यानी अगर किसी पैक्ड फूड में चीनी, नमक या अनहेल्दी फैट का स्तर बहुत अधिक हो, लेकिन उसमें कृत्रिम फाइबर या विटामिन मिलाए गए हों, तो उसे अधिक स्टार्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे उपभोक्ता जंक फूड को हेल्दी विकल्प समझकर खरीद सकते हैं। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि इस मॉडल से प्रोसेस्ड फूड उद्योग को फायदा मिलेगा, जबकि उपभोक्ता वास्तविक जोखिम समझ नहीं पाएंगे। स्वास्थ्य समूहों के अनुसार फ्रंट-ऑव-पैक चेतावनी लेबल उपभोक्ता तक सही संदेश पहुंचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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कई देशों में लागू है मॉडल
चेतावनी लेबल मॉडल चिली, मैक्सिको, ब्राजील, उरुग्वे, इस्राइल समेत यूरोप के कई देशों में लागू है और इन देशों में हाई शुगर व हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री में कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञ बताते हैं कि चेतावनी लेबल लागू होते ही कंपनियों ने अपने उत्पादों के फॉर्मुलेशन में सुधार शुरू किया, जो स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक संकेत है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार फ्रंट-ऑव-पैक लेबलिंग इस समय इसलिए बहस का विषय है क्योंकि यह जंक फूड और पैक्ड फूड के जोखिम ग्राहकों से नहीं छिपने देती। वैश्विक शोधों में साबित हुआ है कि इससे लोग अनहेल्दी खाद्य की खपत कम करते हैं। खाद्य उद्योग ऐसे लेबल से असहज है क्योंकि इससे उत्पाद की नकारात्मक छवि बन सकती है।
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