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Waqf: भाजपा पर कितना असर, क्या बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश को लाभ? बंगाल-तमिलनाडु में सियासत गरमाने के आसार

Sat, 05 Apr 2025 09:39 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 05 Apr 2025 09:39 PM IST
सार

  • संसद से वक्फ वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद अब कानून बनने का रास्ता साफ। 
  • बिहार, बंगाल, तमिलनाडु तक गरमाएगी राजनीति।
  • राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि वक्फ से मुस्लिम समाज नाराज।
  • उन्होंने एनडीए के घटक दलों में घमासान का दावा भी किया।
  • बकौल तिवारी, भाजपा हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान के एजेंडे पर तेजी से काम कर रही है।

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Waqf Politics RJD Veteran Shivanand Tiwari on impact on BJP benefit to Nitish in Bihar and Bengal Tamil Nadu
राजद नेता शिवानंद तिवारी - फोटो : एएनआई

विस्तार

वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद के बजट सत्र के दौरान हंगामा खूब हुआ, विपक्ष के दलों ने खूब दलील रखी, लेकिन संसद के दोनों सदनों में वक्फ संशोधन विधेयक -2025 अच्छे बहुमत से पारित हो गया। राजद नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं भाजपा ने पूरे देश में हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान का मिशन तेजी से शुरू कर दिया है। यह लोग यही करते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि वक्फ संशोदन विधेयक के संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद भाजपा पर कितना राजनीतिक असर होगा?

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भाजपा के रणनीतिकार खुश हैं
शुक्रवार को भाजपा के मुख्यालय में वक्फ संशोधन विधेयक के बहुमत से पारित होने के बाद साफ देखने में आई। बुधवार 2 अप्रैल और बृहस्पतिवार 3 अप्रैल को लोकसभा, राज्यसभा के गलियारे में भाजपा के सांसद निजी चर्चा में इसे बहुत अहम बता रहे थे। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के चेहरे की चमक भी कुछ कह रही थी। हालांकि पहली बार राज्य सभा में शिवसेना के सांसद संजय राऊत के पास कुछ खास कहने के लिए नहीं था। संजय राऊत की इस भाव भंगिमा पर एनसीपी (अजीत पवार) के नेता प्रफुल्ल पटेल ने संजय भईया कहकर सदन में ही जमकर चुटकी ली। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह के उत्साह को देखकर भी अंदाजा लग रहा था कि देश की सरकार और खासकर भाजपा एक नए माइल स्टोन की तरफ बढ़ रही है। भाजपा के दर्जन से अधिक सांसदों ने निजी चर्चा में कहा कि अब बिहार से लेकर तमिलनाडु तक आपको असर दिखेगा। सामाजिक, राजनीतिक, सामाजिक रूप से सब अच्छा होगा।
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...लेकिन एनडीए के घटक दलों को करनी होगी जुगत
वक्फ को लेकर होने वाली राजनीति के संबंध में राजद के संस्थापक नेता शिवानंद तिवारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि एनडीए के घटक दलों में घमासान है। उनके नेता वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के अपने पार्टी के फैसले का विरोध कर रहे हैं। जद(यू) और चिराग पासवान की पार्टी को लोग छोड़ रहे हैं। पूर्वी चंपारण जद(यू) के नेता मोहम्मद कासिम अंसार, मुजफ्फर पुर से मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी, नदीम अख्तर, नवाज मलिक, एम राजू नैयर, गुलाम रसूल ने पार्टी छोड़ दी है। शिवानंद कहते हैं कि पसमांदा समेत पूरा मुस्लिम समाज इसका विरोध कर रहा है। पूर्व सांसद अशफाक करीम, एमएलसी गुलाम गौस, पूर्व एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी को सख्त एतराज है। शिवानंद कहते हैं कि मुसलमान के वोट को लेकर भाजपा चिंतित नहीं रहती। लेकिन जद(यू), लोजपा, टीडीपी जैसे तमाम घटक दलों को अल्पसंख्यकों का वोट मिलता है। उन्हें कुछ दिक्कत हो सकती है। हालांकि केन्द्र सरकार में मंत्री और जद(यू) के नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के पास इससे किसी राजनीतिक नुकसान फिक्र नहीं दिखाई देती। उन्होंने संसद में भी अपने तेवर दिखाए। प्रफुल्ल पटेल के अंदाज से एनसीपी की भी चिंता नहीं दिखी। आंध्र प्रदेश की टीडीपी के माथे पर भी बल नहीं दिखा। यह चर्चा करने पर शिवानंद कहते हैं कि राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ेगा, यह समय बताएगा। लेकिन सामाजिक ताना बाना तो प्रभावित हो रहा है।  
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विपक्ष के नेता पहुंचे अदालत
आईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर अदालत का रुख किया है। कांग्रेस के सांसद जावेद भी इसे चुनौती दे रहे हैं। हालांकि शरद पवार की एनसीपी और शिवसेना(यूटीबी) का एजेंडा अभी बहुत साफ नहीं हो सका है। कांग्रेस पार्टी अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि से कोई समझौता नहीं करनी चाहती। कांग्रेस वक्फ संशोधन विधेयक का खुलकर विरोध कर रही है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल समेत अन्य इसे लेकर लगातार रणनीतिक चर्चा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। राजद को भी इस विधेयक के पारित होने से सामाजिक ताना बाना के बिखरने की संभावना दिखाई दे रही है।  

 
भाजपा को कितना असर और कितने फायदे में रहेगी पार्टी?
शिवानंद तिवारी कहते हैं कि भाजपा हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान के रास्ते पर तेजी से चल पड़ी है। उसके उत्साह में हरियाणा, महाराष्ट्र के नतीजे ने काफी बढ़ोत्तरी कर दी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा के रणनीतिकारों की बाछें खिली है। इसी उत्साह में भाजपा ने तमिलनाडु जैसे संवेदनशील राज्य में भाषा का मुद्दा छेड़ दिया है। भाजपा मुख्यालय पर एक नेता ने कहा कि बिहार के चुनाव में इस बार आप देखेंगे। विपक्ष बस नाम मात्र का रह जाएगा। सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ही होगी। भाजपा की आईटी सेल के नेता अमित मालवीय पश्चिम बंगाल को लेकर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सुवेन्दु अधिकारी लगातार अक्रामक रुख अपनाए हैं और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार, बंगाल, तमिलनाडु को लगातार समय देने का भरोसा दिया है। शिवानंद तिवारी कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी काफी समय से सत्ता में बनी है। जनता में तीन बार की सरकार विरोधी मानसिकता का भी मामला है। कुल मिलाकर यह कि भाजपा को अल्पसंख्यक मतों की चिंता नहीं है। वक्फ संशोधन विधेयक के बहाने उसका बहुसंख्यक समाज को एकजुट करने का मंसूबा जरूर मजबूत होगा।

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कौन चाहता है बिहार में नीतीश कुमार मजबूत हों?
शिवानंद तिवारी लालू प्रसाद यादव के साथ साथ नीतीश कुमार को भी अपना पुराना साथी मानते हैं। सबने साथ में राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाया था। इसमें वरिष्ठ शिवानंद ही हैं। तिवारी कहते हैं कि कौन चाहता है कि अब नीतीश और उनकी पार्टी जद(यू) बिहार में मजबूत हो? विपक्ष के ऐसा चाहने का सवाल नहीं उठता। भाजपा बी ऐसा क्यों चाहेगी? कांग्रेस के नेता शकील के मुताबिक भाजपा और एनडीए बिहार में भले नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़े, लेकिन चुनाव बाद मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। भाजपा नेता बिहार में नीतीश कुमार को भावी चुनाव का चेहरा जरूर बताते हैं, लेकिन दबी जुबान से नीतीश की सेहत पर सवाल भी उठाते हैं। ऐसे में भाजपा की तैयारी बिहार में भी नीतीश का चेहरा घोषित करके फ्रंटफुट पर ही खेलने की है।

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